कृष्ण-अर्जुन और राक्षस की कहानी जो बताती है जीवन में कैसे करें संकटों का सामना

महाभारत की यह कथा बताती है कि जीवन में आने वाले संकटों का सामना किस तरह करना चाहिए. बहुत अधिक क्रोध करने का क्या परिणाम होता है और मनुष्य किस वजह से समस्याओं से हारता है. 

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : May 6, 2021, 08:25 AM IST
  • घने जंगल में राक्षस ने किया कृष्ण-अर्जुन और भीम पर हमला
  • जैसे-जैसे भीम-अर्जुन का क्रोध बढ़ा राक्षस उन पर भारी पड़ गया
कृष्ण-अर्जुन और राक्षस की कहानी जो बताती है जीवन में कैसे करें संकटों का सामना

नई दिल्लीः बात द्वापरयुग की है. महाभारत का युद्ध होने में अभी कुछ समय था. कृष्ण-अर्जुन इसी तैयारी में जुटे हुए थे. एक बार इसी सिलसिले में कृष्ण-अर्जुन और भीम कहीं जा रहे थे. रास्ते में घना जंगल पड़ा और उसे पार करते-करते रात हो गई. 

जंगल से जा रहे थे कृष्ण-अर्जुन
घुप्प अंधेरा हो जाने के कारण तीनों ने तय किया कि अब आगे बढ़ना संभव नहीं है. इसलिए यहीं ठहर जाते हैं. सुबह होने पर बढ़ चलेंगे. इस पर भीम बोले कि यह जंगल मायावी लगता है, इसलिए यहां ठहर तो सकते हैं लेकिन यहां सोना ठीक नहीं होगा. कृष्ण और अर्जुन दोनों को थका हुआ भांपकर भीम ने कहा तुम दोनों सो जाओ मैं जागकर पहरा देता हूं. 

भीम देने लगे पहरा
इस पर कृष्ण ने कहा थके तो हम तीनों ही हैं. ऐसा करते हैं बारी-बारी से एक प्रहर जागकर पहरा देते हैं. सहमति होने पर कृष्ण और अर्जुन सो गए और भीम जागकर पहरा देने लगे. 

कुछ ही पलों में कृष्ण-अर्जुन गहरी नींद में चले गए और तभी भीम को एक भयानक आकृति उनकी ओर आती दिखी. वह कोई राक्षस था.

राक्षस से हुआ युद्ध
राक्षस उन्हें देखते ही जोर से चीखा और भीम क्रोध में भर गए. इस घटना का एक विचित्र असर हुआ- क्रोध के कारण भीम का आकार कुछ छोटा हो गया और राक्षस का आकार बढ़ गया. इसके बाद राक्षस फिर चीखा और फिर से भीम ने और क्रोध दिखाया. इस बार उनमें उतावलापन भी था. राक्षस का आकार बढ़ते देख भीम चिंतित भी होने लगे. 

भीम को मिली हार
इसके बाद दोनों में युद्ध होने लगा, लेकिन भीमकाय भीम राक्षस के सामने छोटे होने लगे और राक्षस का आकार बड़ा होने लगा. एक पहर तक लगातार युद्ध हुआ और अर्जुन के जागने का समय हुआ. इतने में राक्षस ने जोर का मुक्का मारा और भीम आधी मुर्छा में चले गए. अर्जुन को उठता देखकर राक्षस भाग गया. अर्जुन ने सोचा भीम नींद में हैं. भीम ने भी कुछ नहीं बताया. 

अर्जुन देने लगे पहरा
अर्जुन उठकर पहरा देने लगे. कुछ ही देर में राक्षस फिर आया और अर्जुन को धमकाने लगा. पहले से विशालकाय राक्षस के अचानक आ धमकने से अर्जुन क्रोध और भय दोनों से भर उठे.

दोनों में युद्ध हुआ, लेकिन राक्षस के प्रति अधिक चिंता और उतावले पन के कारण अर्जुन उसके सामने हल्के पड़ने लगे. जितना वह क्रोध करते राक्षस बड़ा होता जाता था. अर्जुन की सारी विद्याएं धरी की धरी रह गईं. 

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अर्जुन का राक्षस से हुआ युद्ध
अब राक्षस ने आकार बढ़ाया और अर्जुन को उठाकर पटक दिया. इतने में कृष्ण के उठने का समय हो गया. राक्षस फिर से भाग गया. अब कृष्ण पहरा देने लगे. कुछ देर बाद वही राक्षस उनके सामने आया और जोर से चीखा.

कृष्ण पर भी राक्षस ने किया हमला
कृष्ण जरा भी घबराए नहीं और बोले, “बताओ तुम इस तरह चीख क्यों रहे हो, क्या चाहिए तुम्हे?”

इस बार भी कुछ विचित्र घटा- कृष्ण के साहस के कारण उनका आकार कुछ बढ़ गया और राक्षस का आकर कुछ घट गया. राक्षस को पहली बार कोई ऐसा मिला था जो उससे डर नहीं रहा था. घबराहट में वह पुन: कृष्ण पर जोर से चीखा!

कृष्ण ने किया राक्षस का सामना
इस बार भी कृष्ण नहीं डरे और उनका आकर और भी बड़ा हो गया जबकि राक्षस पहले से भी छोटा हो गया. एक आखिरी कोशिश में राक्षस पूरी ताकत से चीखा पर कृष्ण मुस्कुरा उठे और फिर से बोले, “बताओ तो क्या चाहिए तुम्हें?”
इस तरह हंसकर और प्यार से बात करने पर राक्षस तिलचट्टे के आकार जितना हो गया. कृष्ण ने उसे हथेली में लेकर अपनी धोती में बाँध लिया और फिर  कमर में खोंस कर रख लिया.

सुबह अर्जुन ने बताई रात की घटना
कुछ ही देर में सुबह हो गयी, कृष्ण ने भीम-अर्जुन को चलने के लिए उठाया और आगे बढ़ने के लिए कहा! वे धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगे. इस पर अर्जुन ने संकोच करते हुए रात की पूरी घटना बताई. कृष्ण तो सब जानते ही थे. उन्होंने भीम की ओर देखा. लज्जित हुए भीम से कुछ कहते नहीं बन रहा था. 
इस पर कृष्ण ने मुस्करा कर अपनी कमर में बंधे उसी राक्षस को निकाला और दिखाया. अर्जुन और भीम चौंक पड़े और कहा-यह तो वहीं राक्षस है. 

कृष्ण ने बताई राक्षस की असलियत
कृष्ण बोले, यह राक्षस नहीं तुम दोनों के मन में घर बना चुका अनावश्यक क्रोध है. यह तुम्हारा उतावलापन भी है. जितना तुम क्रोध को बढ़ाओगे इसका आकार बढ़ता जाएगा. यह ताकतवर हो जाएगा.

तुम इसके सामने बौने हो जाओगे. यह जीवन में आने वाली समस्या का भी प्रतीक है. जब जीवन में तुम किसी समस्या को लेकर उसका सामना करने से बचोगे तो वह ऐसे ही अनियंत्रित हो जाएगी और तुम्हें कमजोर बना देगी.

मैंने सिर्फ हंसकर इसका सामना किया. क्रोध बिल्कुल नहीं किया. इसके कारण इसका आकार छोटा होता चला गया. 

इस कथा से मिलती है शिक्षा
यह राक्षस वाकई, हमारे जीवन में आने वाली समस्याएं हैं. विपरीत स्थितियों का सामना करने के बजाय सिर्फ उनकी चिंता करने और उनपर क्रोध करने से स्थिति और गंभीर हो जाती है. लेकिन अगर हम इनका हंसकर सामना करते हैं, तो यही समस्याएं धीरे-धीरे छोटी होती चली जाती हैं और अंततः हम उनपर काबू पा लेते हैं.

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