Corona की दूसरी लहर के बीच कैसे होगी बरगद वट सावित्री पूजा, जानिए उपाय

पति की दीर्घायु के लिए किया जाने वाला यह व्रत आज गुरुवार को मनाया जा रहा है. पूजा को लेकर व्रतियों में सवाल यह है कि Corona और सोशल डिस्टेंसिंग के बीच इस व्रत को कैसे पूरा करें. अगर बहुत से लोग वट वृक्ष के पास जमा हो जाएंगे तो इससे भीड़ होने के कारण सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन हो सकता है.

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Jun 10, 2021, 08:56 AM IST
  • बरगद की एक टहनी मंगा कर घर पर ही करें पूजा
  • इस उपाय से सुरक्षित भी रहेंगे, पूजा भी संपन्न होगी
Corona की दूसरी लहर के बीच कैसे होगी बरगद वट सावित्री पूजा, जानिए उपाय

नई दिल्लीः Corona महामारी की दूसरी लहर के बीच गुरुवार को Vat Savitri Vrat-2021 मनाया जा रहा है. देश में-राज्यों में कई जगहों पर प्रशासन ने ढील देनी शुरू की है, लेकिन महामारी के बुरे प्रभाव को देखते हुए एहतियात बरतना जरूरी है. Corona Curfew के इस दौर में सनातनी आस्था का पर्व ज्येष्ठ अमावस्या भी है.

कई स्थानों पर लोकबोली में इसे बरसाइत कहा जाता है. सुहागिन स्त्रियां बरगद वृक्ष की पूजा कर पति व परिवार की समृद्धि और सुरक्षा की मनोकामना मांगती हैं. कच्चे-पक्के दोनों ही भोजन का प्रसाद वट (बरगद) वृक्ष को अर्पित कर पूजा की जाती है. 

गुरुवार को मनाया जा रहा वट सावित्री व्रत
पति की दीर्घायु के लिए किया जाने वाला यह व्रत आज गुरुवार को मनाया जा रहा है. पूजा को लेकर व्रतियों में सवाल यह है कि Corona और सोशल डिस्टेंसिंग के बीच इस व्रत को कैसे पूरा करें. अगर बहुत से लोग वट वृक्ष के पास जमा हो जाएंगे तो इससे भीड़ होने के कारण सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन हो सकता है.

ऐसी स्थिति में वट वृक्ष की एक टहनी घर में लाकर गमले या भूमि में स्थापित करें, उसकी भी पूजा व परिक्रमा का फल वृक्ष की पूजा के बराबर ही मिलता है. 

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सत्यवान-सावित्री के कारण बना वट सावित्री व्रत 
पुराणें में वर्णन है कि इस दिन ही सावित्री ने अपने सतीत्व के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस मांग लिए थे. सुहाहिन स्त्रियां भी इसी संकल्प के साथ अपने पति की आयु और प्राण रक्षा के लिए व्रत रखकर पूजा करती हैं. मान्यता है कि ब्रह्मा, विष्णु, महेश और सावित्री भी वट वृक्ष में ही निवास करते हैं.

बरगद के वृक्ष की आयु खुद भी बहुत लंबी होती है. मान्यता है कि इस वृक्ष को खुद देवताओं ने अमृत से सींचा था. इसीलिए आरोग्य और स्वस्थ जीवन शैली का बरगद सबसे सुंदर प्रतीक है. 

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ऐसे करें पूजन
बरगद के पेड़ की पूजा त्रिदेव के रूप में ही की जाती है. अगर आप बरगद के पेड़ के पास पूजा करने नहीं जा सकते हैं तो आप अपने घर में ही त्रिदेव की पूजा करें. साथ ही अपने पूजा स्थल पर तुलसी का एक पौधा भी रख लें.

अगर उपलब्ध हो तो आप कहीं से बरगद पेड़ की एक टहनी मंगवा लें. गमले में रोप कर उसकी पारंपरिक तरीके से पूजा करें. अपने परिवार या जहां रहते हैं वहां के स्थान प्रभाव के अनुसार पूजन करें. 

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