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क्या RSS के दखल के बाद फडणवीस का सीएम बनना हुआ तय?

महाराष्ट्र में सत्ता के सबसे बड़े सिंहासन यानी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा? इस सवाल का जवाब जानने के लिए ह कोई बेकरार है. RSS के दखल के बाद माना जा रहा है कि फडणवीस का फुल टाइम सीएम बनना तय हो चुका है. यानी शिवसेना को बैकफुट पर जाना ही पड़ेगा.

क्या RSS के दखल के बाद फडणवीस का सीएम बनना हुआ तय?

नई दिल्ली: महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर गठबंधन के साथी शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी के बीच बात बनती दिखाई दे रही है. क्योंकि एनसीपी प्रमुख ने ये साफ कर दिया है कि वह शिवसेना को कोई ऑफर नहीं करने वाले हैं और वो विपक्ष में बैठना ही पसंद करेंगे. इस बीच बीजेपी-शिवसेना के बीच कुर्सी की लड़ाई मुंबई से नागपुर संघ के मुख्यालय पहुंच गई है. माना जा रहा है कि अगले कुछ घंटों में शिवसेना और भाजपा के बीच छिड़ी जंग पर फुलस्टॉप लगना तय है.

संघ प्रमुख मोहन भागवत का दखल

शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के सलाहकार किशोर तिवारी ने इस सिलसिले में मोहन भागवत को चिट्ठी लिखकर दखल देने की मांग की थी. इसके बाद देर रात देवेंद्र फड़णवीस संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात करने के लिए नागपुर पहुंच गए. दोनों के बीच करीब डेढ़ घंटे तक बातचीत हुई. ऐसे में माना जा रहा है कि सीएम पद पर फंसे पेंच को निकालने के लिए अब संघ ही नैय्या पार लगा सकता है. लेकिन महाराष्ट्र में कोई भी दल इस मामले में अभी अपने पत्ते खोलने के लिए तैयार नहीं है. लेकिन इसके साथ ही सभी ने ये संकेत देना भी शुरु कर दिया है कि उनके पास सरकार बनाने का प्लान तैयार है. साथ ही शिवसेना और बीजेपी दोनों ने अपना स्टैंड सख्त कर लिया है.

भाजपा के तेवर हुए और भी हाई

भाजपा का कहना है कि उसके पास अभी तक शिवसेना का कोई भी प्रस्ताव नहीं आया है. हालांकि सरकार बीजेपी की ही बनेगी और और वो इसके लिए पूरी तरह से तैयार है. महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष ने मीडिया को बताया कि 'महाराष्ट्र की जनता ने भारतीय जनता पार्टी-शिवसेना को जनादेश सरकार बनाने के लिए दिया है, इस जनादेश का आदर करते हुए जल्द ही हम महाराष्ट्र में हम सरकार बनाएंगे. शिवसेना की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं आया है, वो प्रस्ताव आने के बाद चर्चा कभी भी हम कर सकते हैं, शिवसेना-भारतीय जनता पार्टी मिलकर जल्दी से जल्दी सरकार बनाएंगे.'

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल के इस बयान से समझना आसान हो जाता है कि शिवसेना पर कुर्सी का भूत उतारने के लिए भाजपा ने पूरा मन बना लिया है. हालांकि उधर शिवसेना सीएम पद को लेकर अपनी जिद पर अड़ी हुई है. ठाकरे परिवार के उत्तराधिकारी आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने की मांग वाले पोस्टर मुंबई में नजर आने लगे हैं, शिवसेना मुख्यमंत्री पद की मांग यानी 50-50 पॉवर शेयरिंग को लेकर अड़ी हुई है. लेकिन शिवसेना ये दिखाना नहीं चाहती कि सरकार गठन की राह में वो विलेन बन कर खड़ी है.

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संजय राउत की बोली पर लगाम कब?

संजय राउत बार-बार मीडिया के सामने आकर 50-50 फॉर्मूले का राग अलाप रहे हैं. लेकिन शिवसेना के अन्य नेताओं की चुप्पी टूट नहीं रही हैय इस बीच शरद पवार के बयान के बाद से शिवसेना के साथ-साथ राउत को करारा झटका लगा होगा. क्योंकि वह दूसरे विकल्प को लेकर अपने दावे करते आए हैं. उन्होंने इतना तक बोल दिया था कि 170 विधायक उनकी पार्टी के संपर्क में हैं और वह सरकार बनाकर दिखाएंगे. उन्होंने शरद पवार से मुलाकात की, जिसका जिक्र आज खुद पवार ने किया और यह साफ किया कि उस मुलाकात में सरकार बनाने पर किसी तरह की कोई चर्चा नहीं हुई थी.

भाजपा के सूत्रों के का दावा

भारतीय जनता पार्टी ने बिल्कुल मूड बना रखा है कि वह मुख्यमंत्री का पद किसी कीमत पर नहीं छोड़ेगी. खबर ये भी आ रही है कि गृहमंत्री का पद भी शिवसेना को देने को तैयार नहीं है. बाकी पदों को लेकर 50-50 के फार्मूले पर शिवसेना से बातचीत को तैयार है. लेकिन उसमें सीएम की कुर्सी नहीं शामिल होगी. समर्थन की स्थिति स्पष्ट होने तक भाजपा खुद सरकार बनाने का दावा नहीं करेगी. लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि शरद पवार के स्टैंड क्लीयर करने के बाद शिवसेना के पास कोई भी दूसरा विकल्प बचा ही नहीं है.

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अल्टीमेटम के बीच पवार ने बिगाड़ा खेल

सुत्रों के मुताबिक शिवसेना ने बीजेपी को 48 घंटों का अल्टीमेटम दिया था. अगर इसके बाद भी बात नहीं बनी तो शिवसेना का प्लान B तैयार होने का दावा किया गया था. इस प्लान बी में यह शामिल किया गया था कि सरकार बनाने के लिए शिवसेना भाजपा से समर्थन नहीं लेगी. माना जा रहा था, कि शिवसेना और एनसीपी की सरकार में कांग्रेस का बाहर से समर्थन होगा. लेकिन शिवसेना ने जिस तरह से यह संकेत दिए, उसपर बुरी तरह से पानी फिर गया. उसके सारे दावे और धमकी उस वक्त धरे के धरे रह गए जब शरद पवार मीडिया के सामने आए और अपना रुख साफ कर दिया. यानी शिवसेना का ये 48 घंटे वाले अल्टीमेटम की पवार ने खटिया खड़ी कर दी.

इसी बीच संघ मुख्यालय नागपुर में सीएम फडणवीस ने जब मोहन भागवत से मुलाकात की, तो सुर्खियां तेज हो गई. उसके कुछ ही घंटों बाद एनसीपी प्रमुख ने जो ऐलान किया उससे शिवसेना, खासकर संजय राउत की जुबान पर ताला जड़ना तय हो जाता है. अब देखना ये दिलचस्प हो जाएगा कि क्या शिवसेना बैकफुट पर आती है या नहीं.