भाजपा के इस फैसले से तिलमिलाई शिवसेना! 5 नवंबर को शपथ ले सकते हैं फडणवीस

भाजपा और शिवसेना के बीच वैसे तो सबकुछ पूरी तरह से ठीक नहीं है, लेकिन दोनों पार्टियों के बीच बढ़ रही दरार की एक सबसे बड़ी वजह संजय राउत के तेवर भी हैं. कहीं ऐसा ना हो कि राउत के बड़बोलेपन के चलते गठबंधन पर भी बुरा असर पड़ जाए.

भाजपा के इस फैसले से तिलमिलाई शिवसेना! 5 नवंबर को शपथ ले सकते हैं फडणवीस

नई दिल्ली: महाराष्ट्र में महासंग्राम के बाद बीजेपी ने सरकार बनाने का प्लान तैयार कर लिया है. शिवसेना से खिंचतान के बीच बीजेपी ने नया रास्ता बना लिया है. बीजेपी साफ कर चुकी है कि वो शिवसेना के 50-50 के फॉर्मूले के आगे नहीं झुकेगी. सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र में शिवसेना के बिना फडणवीस सरकार बना सकते हैं.

और बौखला गई शिवसेना

आगामी 5 नवंबर को देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में फड़णवीस का शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है. फडणवीस के शपथ लेने की खबरों के बाद शिवसेना ने एक फिर बीजेपी को धमकी दी है. शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा है कि शिवसेना ने ठान लिया तो बहुमत जुटा लेगी. संजय राउत का ये बयान NCP प्रमुख शरद पवार से मुलाकात के बाद आया है. उन्होंने कहा कि बीजेपी इनकार करती है तो उनके पास सरकार बनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा.

क्या बोले संजय राउत?

शिवसेना नेता संजय राउत ने शपथ वाली खबर फैलने के बाद भाजपा पर जोरदार हमला बोला है. उन्होंने कहा कि 'मैं किससे मिलता हूं या हमारे और नेता किससे मिलते हैं, उस पर मत जाइए. अगर हम चाहे तो दो तिहाई बहुमत से हमारी सरकार, हमारी मुख्यमंत्री बन सकता है. इसीलिए जिनके पास बहुमत नहीं है, वो ये डेयरिंग ना करें.' इस दौरान राउत ने ये तक बोल दिया कि जो सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं उनके लिए फजीहत हो जाएगी.

शिवसेना का एक धड़ा हो रहा है बागी!

राउत को अपनी ही पार्टी ने इस मसले पर कुछ भी बोलने से मना किया था. इसका सबसे बड़ा नजारा उस वक्त देखने को मिला था जब, शिवसेना विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी. बैठक के बाद बाहर निकलते वक्त संजय राउत के चेहरे पर 12 बजा हुआ था. सूत्रों का कहना है कि उस वक्त उनको इस मसले पर अपनी जुबान पर काबू रखने को कतहा गया था. जब राउत के पास कोई और चारा नहीं बचा तो वो शरद पवार की चौखट पर चले गए. और उसके बाद एक बार फिर उनके तेवर हाई हो गए. राउत को अपनी जुबान जरा भी लगाम नहीं है. वो जब कभी भी अपनी जुबान खोलते हैं, कुछ ऐसा बोल देते हैं जो भाजपा-शिवसेना गठबंधन के रिश्तों में खटास फैलाने वाला बयान होता है. मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर शिवसेना के सभी बड़े नेता ने फिलहाल कुछ भी ऊल-जुलूल बात नहीं की. उद्धव हो या फिर आदित्य ठाकरे इस मसले पर कुछ नहीं बोल रहे हैं. माना जा रहा है कि उद्धव और अमित शाह के बीच फॉर्मूले पर बात होगी उसके बाद ही फैसला लिया जाएगा. लेकिन लगता है कि पार्टी से फटकार लगने के बाद संजय राउत बागी तेवर अपना रहे हैं. जो भाजपा-शिवसेना के बीच दरार पैदा करने में अहम किरदार निभा सकती है.

आखिर क्या चाहते हैं राउत?

बीजेपी और शिवसेना के तेवर बता रहे हैं कि फिलहाल कोई भी किसी तरह के समझौते के मूड में नहीं है. लेकिन इतना तो तय है कि महाराष्ट्र में दोबारा सरकार बनाने के लिए बीजेपी की राह आसान नहीं होगी. इस राह की और भी मुश्किलें बढ़ा रहे हैं, शिवसेना के नेता संजय राउत. इस सियासी खींचतान के बीच महाराष्ट्र में नए समीकरण भी सामने आने लगे है. NCP की नजर अब विधानसभा स्पीकर पर है. महाराष्ट्र में अगर शिवसेना और NCP साथ आए तो NCP स्पीकर की कुर्सी पर दांव खेल सकती है. वहीं शिवसेना के विधायक NCP और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं. तो क्या अब ये माना जाए कि भाजपा से रिश्ते खराब होने के बाद शिवसेना कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के साथ समझौता कर सकती है.

तेज हुई बयानबाजी

इसे लेकर एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि 'मुख्यमंत्री सबसे बड़े दल के नाते क्लेम करें सरकार बनाएं, विधानसभा के पटल पर बहुमत सिद्ध करें. अगर वो बहुमत सिद्ध नहीं कर पाते हैं तो निश्चित रूप से सरकार गिर जाती है तो पर्याय सरकार बनाने के लिए हम प्रयास करेंगे. हम उसको नकारते नहीं हैं.'

उधर, भाजपा-शिवसेना की सियासी तकरार को देखते हुए कांग्रेस भी वेट एंड वॉच की नीति पर चल रही है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बीजेपी की वादाखिलाफी के कारण मौजूदा सियासी संकट खड़ा हुआ है. कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण ने कहा है कि 'भाजपा अपने सहयोगी के साथ वादे को निभाने में असफल रही है. जिसके कारण महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है. हम स्थिति को देख रहे है और सही वक्त पर फैसला लेंगे.'

महाराष्ट्र के मौजूदा सियासी समीकरण ऐसे है कि कोई भी दल अकेले सरकार नहीं बना सकता. महाराष्ट्र में कुल 288 विधानसभा सीटें हैं, ऐसे में बहुमत के लिए 145 का आंकड़ा चाहिए. जबकि, बीजेपी के पास 105 विधायक है तो शिवसेना के पास 56 सीटें है. एनसीपी के पास 54 और कांग्रेस के पास 44 सीटें हैं. ऐसे में अब देखना ये है कि बहुमत का आकंड़ा कौन जुटाता है.