शरद पवार से 'पीछा छुड़ाने' के लिए बेताब थे अजित पवार!

महाराष्ट्र की राजनीति में जो सियासी उलटफेर हुआ, उसे देखकर हर किसी के होश फाख्ता हो गए हैं. लेकिन, शरद पवार के भतीजे ने ऐसा खेल खेला जो किसी ने सोचा भी नहीं था. पार्टी में अपना कद देखकर अजित पवार ने लंबे समय से अलग रास्ता अपनाने के लिए बेकरार थे.

शरद पवार से 'पीछा छुड़ाने' के लिए बेताब थे अजित पवार!

नई दिल्ली: क्रिकेट को अनिश्चितताओं का खेल कहा जाता है. लेकिन सियासत उससे भी अनिश्चितता का खेल नहीं, जैसे क्रिकेट में आखिरी गेंद तक खेल का पासा पलट सकता है ठीक वैसे ही सियासत में भी आखिरी दांव में कौन भारी पड़ता है, उसका पता चाल चलने के बाद ही लगता है. महाराष्ट्र की राजनीति में कुछ ऐसा ही देखने को मिला है. शरद पवार के भतीजे ने ऐसा रुख अपनाया कि सियासी अखाड़े में अच्छे-अच्छों की खटिया खड़ी हो गई. 

अलग रास्ते पर चलने को बेकरार थे अजित

माना जा रहा है कि महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार कई दिनों से ऐसे ही कदम उठाने की राह देख रहे थे. ऐसे में उन्होंने इस मौके को हाथ से जाने नहीं दिया. शरद पवार से अजित की नाराजगी की कहानी काफी लंबी है. आपको पूरी दास्तां तफ्सील से समझाते हैं.

अजित पवार ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कॉपरेटिव पॉलिटिक्स से शुरु की. पिता के निधन के बाद अजित पवार ने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी. और शुगर फैक्ट्री के जरिये राजनीति में कदम रखा. अपने चाचा शरद पवार के राजनीतिक रसूख के सहारे अजित पवार कॉपरेटिव बैंक के चेयरमैन से लेकर विधायक, सांसद, मंत्री और उप मुख्यमंत्री तक का सफर तय किया. 

यहां से शुरू हुई अजित की नाराजगी की कहानी

एक वक्त था जब लगभग तय माना जा रहा था कि अजित पवार ही शरद पवार के राजनीतिक वारिस होंगे. लेकिन बाद में कहानी ने इतने ट्विस्ट लिए कि अजित को अपने हाथ से बाजी निकलती दिखने लगी. पहले सुप्रिया सुले की राजनीति में एंट्री हुई और फिर शरद पवार ने अपने दूसरे भाई के परिवार को भी राजनीति में उतार दिया. अजित पवार को लगने लगा कि एनसीपी में नंबर दो का पद उन्हें नहीं मिलने वाला है. 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले एनसीपी ने जब बीजेपी-शिवसेना सरकार के खिलाफ यात्रा निकाली. तो उसका नेतृत्व भी अजित पवार को नहीं दिया गया. शरद पवार ने पार्टी के दूसरे नेताओं को इसकी जिम्मेदारी दी.

लेकिन चुनाव परिणाम के बाद जब शिवसेना सीएम पद पर अड़ गई. और शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया. तो अजित पवार ने इसमें प्रमुख भूमिका निभाई. शिवसेना के साथ सरकार बनाने की योजना पर वो पत्रकारों को छकाते रहे.

भ्रष्टाचार के आरोपी हैं अजित पवार

अजित पवार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं. महाराष्ट्र में हुए करीब 70 हजार करोड़ के सिंचाई घोटाले का अजित पवार सामना कर रहे हैं. जिस समय ये कथित घोटाला हुआ. उस समय अजित पवार महाराष्ट्र में सिंचाई मंत्री थे. अजित पवार पर आरोप लगा कि 2009 में उप मुख्यमंत्री रहते हुए बतौर जल संसाधन मंत्री सिर्फ 3 महीने में 20 हजार करोड़ की 32 परियोजनाओं को उन्होंने मंजूरी दे दी. जब मामले ने तूल पकड़ा और सीएजी ने मंत्रालय के अधिकारियों से पूछताछ शुरु की. तो आंच अजित पवार तक भी पहुंची. जिसके बाद अजित पवार को पृथ्वीराज चौहान की सरकार से इस्तीफा देना पड़ा.

बताया जाता है कि अजित पवार उस समय इस्तीफा नहीं देना चाहते थे. लेकिन एनसीपी के दूसरे नेताओं के दबाव में शरद पवार ने अजित पवार का इस्तीफा दिलवा दिया. लगने लगा कि चाचा-भतीजा में बड़ी दरार आ गई है. उस समय अजित पवार के इस्तीफे के विरोध में एनसीपी कोटे के सभी मंत्रियों ने पार्टी अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दिया. शिवसेना ने इसे घोटाले में फंसी एनसीपी का नाटक करार दिया. लेकिन वक्त-वक्त की बात है, जिस एनसीपी के एक-एक मुद्दे को शिवसेना बखेड़ा खड़ा कर देती थी, सत्ता का स्वाद चखने के लालच में उसी शिवसेना ने उसके सामने मत्था टेक दिया.

बयानों को लेकर चर्चा में रहे हैं अजित पवार

अजित पवार अपनी दबंगई और विवादित बयानों को लेकर भी सुर्खियों में रहे. साल 2011 में जब वो महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री थे. और नांदेड़ में एक सिंचाई परियोजना के उद्घाटन के लिए पहुंचे. तो एक किसान ने उनसे किसानों के विस्थापन को लेकर सवाल कर दिया. जिसपर अजित पवार भड़क उठे और उस किसान को डांट कर बैठा दिया. इस वाकये को जब वहां मौजूद पत्रकारों ने कवर करना शुरु किया. तो अजित पवार पत्रकारों पर ही भड़क उठे.

उस वक्त अजित पवार ने ये तक कह दिया था कि 'कहीं थोड़ी सी बाढ़ भी आ जाती है तो ऐसा दिखाते हैं कि जैसे पूरा गांव डूब रहा हो. इनलोगों को उखाड़ फेंकना चाहिए. इनलोगों को डंडे पड़ने चाहिए.' यानी अजित पवार के मुताबिक मीडिया को डंडे पड़ने चाहिए. इसी तरह औरंगाबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अजित पवार पत्रकारों के सवाल पर भड़क उठे थे. अजित पवार ने पत्रकारों को डांट कर चुप रहने को कहा था.

कांग्रेस ने बताया 'काला दिन'

महाराष्ट्र में भाजपा के गेमचेंजर दांव से कांग्रेस हैरान है. वो इसे काला दिन बता रही है. कांग्रेस एनसीपी से भी नाराज है. भारतीय जनता पार्टी के आधी रात का प्लान पूरा हो जाने पर सबसे बड़ा सदमा शिवसेना को लगा है. वो इसे भाजपा की डकैती बता रही है. पार्टी का आरोप है कि अजित पवार को ब्लैकमेल किया गया है.

अजित ने तोड़ा शरद पवार का भरोसा

अब शरद पवार का दावा है कि अजित पवार ने उनका भरोसा तोड़ा, ये उनका व्यक्तिगत फैसला है. हम उनके साथ नहीं. वहीं अजित पवार का दावा है कि उन्होंने शरद पवार को सबकुछ पहले ही बता दिया था और उन्होंने स्थिर सरकार के लिए भाजपा का साथ दिया है.

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शुक्रवार 22 नवंबर तक शिवसेना एनसीपी कांग्रेस के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए आश्वस्त थी लेकिन उसे इस बात का जरा भी आभास नहीं था कि शनिवार की सुबह एक भूचाल आने वाला है.

फिलहाल, एनसीपी में दो फाड़ के बाद चुनौती विधानसभा में बहुमत साबित करने की है. एनसीपी के कितने विधायक अजित पवार के साथ और कितने शरद पवार के साथ हैं इसका पता सदन के अंदर ही चलेगा. कह सकते हैं महाराष्ट्र में रोमांच अभी खत्म नहीं हुआ है. कयासों का बाजार गर्म है. यहां तक कहा जा रहा है कि कहीं आधी रात के प्लान की स्क्रिप्ट पहले ही बड़े नेताओं ने लिख दी थी.

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