अजित पवार के दोनों हाथ में लड्डू! क्या बागी भतीजे को मंत्री पद का तोहफा?

तो क्या चाचा से और पार्टी से बगावत के बावजूद अजित पवार को महाराष्ट्र सरकार में मंत्री पद का तोहफा मिलेगा? क्या अजित पवार मंत्री बनाए जाने के ऑफर के बाद एनसीपी में वापस आए हैं? महाराष्ट्र के सियासी हलकों में ये चर्चा जोर पकड़ रही है कि छोटे पवार को उद्धव सरकार में मंत्री की कुर्सी पर बिठाया जा सकता है.

अजित पवार के दोनों हाथ में लड्डू! क्या बागी भतीजे को मंत्री पद का तोहफा?

नई दिल्ली: भले ही अजित पवार ने अपने चाचा और एनसीपी-कांग्रेस-शिवसेना के गठबंधन से बगावत का झंडा बुलंद किया. भले ही उन्होंने चाचा से दगा कर भारतीय जनता पार्टी का हाथ थामने की गलती की. इन सभी कारनामे के बावजूद एनसीपी अजित पवार को मंत्री बनाने की तैयारी में है. 

अजित पवार की चांदी ही चांदी!

जो अजित पवार फडणवीस सरकार में तीन दिन के लिए डिप्टी सीएम की कुर्सी पर बैठे थे. उनकी बतौर मंत्री ताजपोशी की खबरों ने तूल पकड़ लिया है. उद्धव ठाकरे सरकार में भी अजित पवार के मंत्री बनने की बात सामने आने लगी है. मतलब छोटे पवार की तो चांदी ही चांदी है. उनके दोनों हाथों में लड्डू है. छोटे पवार ने ये भी साफ कर दिया है कि पार्टी जो भी फैसला लेगी वो उन्हें मंजूर होगा.

एनसीपी नेता अजित पवार से जब मीडिया ने ये सवाल पूछा कि क्या आपको मंत्री बनाए जाने की बात चल रही है, तो इस सवाल से बचते हुए उन्होंने बोला कि 'इस बारे में मुझे कुछ नहीं कहना है. मुख्यमंत्री उद्धवजी ठाकरे के ऊपर है उन्हें कौन कौन चाहिए उसका फैसला करने वाले हैं. उसके बारे में मैं कुछ बता नहीं सकता, जो निर्णय पार्टी लेगी वो निर्णय मुझे मंजूर है.'

वापसी की बात नहीं मानते हैं अजित

भले ही अजित पवार ने सब कुछ पार्टी के ऊपर डाल दिया हो लेकिन अंदरखाने खबर यही है कि चाचा शरद पवार से अजित की मुलाकात और बहन सुप्रिया सुले से बातचीत के बाद उन्हें वापसी का तोहफा मंत्री के तौर पर देने का फैसला हुआ है. हालांकि अजित पवार पार्टी में वापसी की बात नहीं मानते. अजित पवार ने ये साफ तौर पर कह दिया कि 'मैं पार्टी से कब बाहर गया था.'

माना जा रहा है कि शरद पवार भी नहीं चाहते कि भतीजे अजित पवार को नाराज किया जाए. भले ही शरद पवार की पार्टी पर तगड़ी पकड़ है लेकिन ग्रासरूट लेवल पर अजित पवार की पकड़ भी कुछ कम नहीं है. छोटे पवार आक्रामक और महत्वाकांक्षी भी भी हैं. ऐसे में भविष्य में वो पार्टी को नुकसान पहुंचाने की न सोचें इसलिए उन्हें शांत करने के लिए मंत्री पद देने की तैयारी की गई है.

परिवार को बचाने के लिए हो सकता है फैसला

एक वजह ये भी है कि शरद पवार सरकार में भी पवार परिवार का दखल बनाए रखना चाहते हैं. सुप्रिया सुले केंद्र की राजनीति में व्यस्त हैं, ऐसे में मंत्री पद के लिए अजित पवार के अलावा दूसरा नाम परिवार में नहीं हो सकता था. चर्चा तो ये भी है कि अजित पवार सरकार में दूसरे नंबर का सिंहासन यानी डिप्टी सीएम का पद दिया जा सकता है. लेकिन मंगलवार तक खबरों के बाजार में ये हवा चल रही थी कि एनसीपी उपमुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए एनसीपी अध्यक्ष जयंत पाटिल के नाम की बाक चल रही थी.

अगर छोटे पवार को ये पद मिलता है तो इसका खामियाजा पाटिल को उठाना पड़ सकता है. क्योंकि अजित पवार को विधायक दल का नेता पद से हटाने के बाद पार्टी ने जयंत पाटिल को ही विधायक दल का नेता चुना था और उनको ही डिप्टी सीएम बनाए जाने की चर्चा थी. इस मामले में पाटिल का कहना है कि हमारी पार्टी के नेता शरद पवार साहब हैं. वो उसके ऊपर निर्णय करेंगे.

मजबूरी है या जरूरी है?

महाराष्ट्र की सियासत में चार दिन चला हाई वोल्टेज ड्रामा अजित पवार के इर्द गिर्द ही घूमता रहा. चाचा की उंगली पकड़कर सियासत की ABCD सीखने वाले अजित ने अपना साम्राज्य स्थापित करने में जल्दबाजी की बावजूद इसके चाचा ने न घर के और न पार्टी के दरवाजे उनके लिए बंद किए. ये शरद पवार का भतीजे के लिए मोह है या मजबूरी या दोनों है जरूरी?

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दरअसल, एनसीपी में शरद पवार के उत्तराधिकारी को लेकर बेटी सुप्रिया सुले और भतीजे अजित पवार के बीच टकरार की बातें सामने आती रही है. एक समय बात इतनी बिगड़ गई थी कि अजित पवार ने पार्टी से इस्तीफा तक दे दिया था लेकिन उन्हें मना लिया गया. इस बार जब बीजेपी के साथ अजित पवार ने सरकार बनाई तब भी उन्हें एनसीपी की ओर से मनाने का दौर चलता रहा. साथ ही अजित की तगड़ी घेराबंदी कर दी गई. सियासत के सारे दांव सिखाने के बावजूद गुरू ब्रह्मास्त्र अपने लिए रखता है. शरद पवार ने कुछ वैसा ही किया और अजित पवार चित्त हो गए. लेकिन अब उनके मंत्री बनने की चर्चा ने हर किसी का ध्यान आकर्षित कर लिया है.