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तो क्या महाराष्ट्र में दो नाव पर सवार है शिवसेना?

महाराष्ट्र की सरजमीं पर राजनीतिक पारा दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है. इस बीच असदुद्दीन ओवैसी ने भी शिवसेना की चुटकी ली है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वह दो नाव पर सवार हैं. इधर फडणवीस के शपथ ग्रहण की तैयारी तेज होती जा रही है.

तो क्या महाराष्ट्र में दो नाव पर सवार है शिवसेना?

नई दिल्ली: महाराष्ट्र के नतीजे आए 10 दिन से ज्यादा होने को हैं. भाजपा-शिवसेना गठबंधन को बहुमत मिलने के बावजूद ये साफ नहीं है कि सूबे में सरकार किसकी बनने जा रही है और अगला मुख्यमंत्री कौन होगा. शिवसेना और भाजपा के बीच चल रही तनातनी के चलते यही नहीं साफ हो पा रहा है कि कौन सी पार्टी किसके साथ सरकार बनाएगी. जिसे लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शिवसेना पर तीखा तंज कसा है.

ओवेसी का उद्धव पर जोरदार वार

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि उद्धव ठाकरे दो नावों की सवारी कर रहे हैं. वो जनता को मूर्ख ना बनाएं. अपने एक बयान में उन्होंने उद्धव पर तंज कसते हुए कहा कि 'अगर आपको दूल्हा बनना है, चीफ मिनिस्टर अपना बनाना है तो आप दो घोड़ों की सवारी नहीं कर सकते. दूल्हा एक घोड़े पर बैठकर बारात निकालता है. अब ये सोच रहे हैं कि बैठूं नहीं बैठूं. बैठना है बैठ जाओ. कूदकर बैठ जाओ. अभी ये सोच रहे हैं. अरे भाई फैसला लो.'

शिवसेना-भाजपा के बीच सीएम पद को लेकर खींचतान मची है. उद्धव ठाकरे अपने बेटे आदित्य ठाकरे को महाराष्ट्र का सीएम बनते देखना चाहते हैं. साथ ही सत्ता में बराबर की भागीदारी भी चाहते हैं. उनका दावा है कि चुनाव से पहले बीजेपी ने 50-50 के इस फॉर्मूले पर हामी भरी थी लेकिन भाजपा सीएम पद पर कोई समझौता करने को तैयार नहीं है. उसका कहना है कि चुनाव से पहले 50-50 जैसे किसी फॉर्मूले की बात नहीं हुई थी. 

50-50 फॉर्मूले पर ओवैसी का तंज

AIMIM अध्यक्ष ओवैसी ने भाजपा-शिवसेना के इस गतिरोध पर भी तंज कसा है. उन्होंने कहा कि 'फडणवीस बनते कौन बनते मेरे को नहीं मालूम, म्यूजिकल चेयर हो रहा है. और ऐसा लगता है शिवसेना दो कदम आगे और तीन कदम पीछे हट रही है. अभी ऐसा लग रहा है कि जैसे दो सौतनें आपस में लड़ रही हों. अजीबो गरीब बात है. मिलकर लड़े, अब इलेक्शन होते ही ये फिफ्टी-फिफ्टी क्या कोई बिस्किट निकला नया. फिफ्टी-फिफ्टी, कितना फिफ्टी-फिफ्टी करेंगे भाई आप? अरे महाराष्ट्र की आवाम के लिए कुछ तो बचाओ.'

ओवैसी के इस तंज से समझना आसान है कि वो शिवसेना-भाजपा में छिड़ी कुर्सी की जंग के आड़ में खूब मजे लूट रहे हैं. दोनों पार्टियों के बीच खिंची तलवारों को देखते ये बड़ा सवाल बना हुआ है कि महाराष्ट्र में सरकार कैसे बनेगी. ये अलग बात है कि मुंबई में शपथ ग्रहण की तैयारी शुरू हो गई है. 

ताजपोशी के लिए तैयार हो रहा मंच

जानकारी है कि भाजपा ने देवेंद्र फडणवीस की शपथ ग्रहण समारोह के लिए वानखेड़े स्टेडियम बुक करा लिया है. शपथ ग्रहण के लिए स्टेज बन रहा है, शामियाना लग रहा है, कुर्सियां लग रही हैं. सरकार बनाने की तस्वीर स्पष्ट हुए बिना ये तैयारियां लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई हैं. उधर भाजपा की तैयारी से शिवसेना की जमीन हिलती दिख रही है. शिवसेना नेता संजय राउत, एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार से मिल चुके हैं तो कांग्रेस में भी शिवसेना को समर्थन देने को लेकर मंथन चल रहा है. 

कांग्रेस-एनसीपी करेगी ऑफर?

कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई ने शिवसेना को समर्थन की बात कहते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी है. उन्होंने कहा है कि शिवसेना की ओर से सरकार बनाने के लिए समर्थन मांगा जाता है तो कांग्रेस को देना चाहिए. इस दौरान दलवाई ने ये भी कहा कि लेटर में यही बात है कि कांग्रेस-एनसीपी को शिवसेना अगर प्रपोजल देती है तो उस पर विचार करना चाहिए. कांग्रेस के इस चाल से शिवसेना नेता संजय राउत पिघलते दिखाई दे रहे हैं. हमेशा कांग्रेस को हाशिए पर रखने वाली पार्टी शिवसेना के ही अपने नेता संजय राउत दलवाई के इस बयान के बाद उनकी तारीफ में पुल बांधने लगे. राउत ने कहा कि 'हुसैन दलवाई जी एक सोशलिस्ट विचारधारा के नेता हमेशा रहे हैं कांग्रेस के अब वो एमपी हैं नेता भी हैं. हम उनको पहचानते हैं. मुस्लिम समुदाय में जो प्रोग्रेसिव विचारधारा के मुसलमान हैं. उस परिवार से हुसैन दलवाई जी आते हैं. इस प्रकार का खत उन्होंने लिखा है तो उसका स्वागत भी होना चाहिए.'

तो क्या भाजपा-एनसीपी का होगा मिलन?

महाराष्ट्र में मचे सियासी तूफान के बीच शरद पवार और सोनिया गांधी के बीच दिल्ली में अहम मुलाकात हो सकती है. सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि चार या पांच नवंबर को राजनीतिक हालात पर फैसला लेने के लिए दोनों नेता मिलेंगे. माना जा रहा है कि इस बैठक से महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर कांग्रेस और एनसीपी किसी नतीजे पर पहुंच सकते हैं. शिवसेना की नजरें जहां इस मुलाकात पर लगी हुई हैं. वहीं बीजेपी की सहयोगी आरपीआई के मुखिया रामदास आठवले ने भी संकेत दिए हैं कि अगर शिवसेना बीजेपी के साथ नहीं आती है तो वो एनसीपी के समर्थन के लिए शरद पवार से मिल सकते हैं.

महाराष्ट्र की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 9 नवंबर तक है. अगर 9 नवंबर तक राज्य में नई सरकार का गठन नहीं होता है तो महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लग सकता है. जिस तरह बीजेपी और शिवसेना के बीच तल्खी का दौर चल रहा है और कांग्रेस और एनसीपी वेट एंड वॉच की स्थिति में बने हुए हैं. उससे ये देखना दिलचस्प होगा कि महाराष्ट्र की सियासत किस मोड़ पर जाकर ठहरती है.