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जब बाला साहब ठाकरे ने नारा दिया, 'लुंगी हटाओ पूंगी बजाओ'

महाराष्ट्र में एक दौर ऐसा आया कि मराठी मानुष काफी उत्तेजित हो गए. बाला साहब ठाकरे के आंदोलन में सरकारी दफतरों, गैर मराठी लोगों पर हमले शुरू हो गए. इसी बीच 1966 में एक पार्टी बनी, जिसे आज शिवसेना के नाम से जाना जाता है.

जब बाला साहब ठाकरे ने नारा दिया, 'लुंगी हटाओ पूंगी बजाओ'

नई दिल्ली: गुलामी के दौर को आंखों के सामने देखने वाले बाला साहब ठाकरे को महाराष्ट्र की सियासी मिट्टी की रंग और खुशबू का भरपूर ज्ञान था. इसकी शुरुआत उनके कार्टूनिस्ट बनने के साथ हुई थी. लेकिन सबसे खास बात तो ये है, कि 50 के दशक में महाराष्ट्र नाम को कोई राज्य नहीं हुआ करता था. उस समय बॉम्बे प्रेजीडेंसी हुआ करती थी. लेकिन आंदोलन के बाद एक बड़ा इतिहास लिखा गया.

आंदोलन के बाद 1 मई साल 1960 को बॉम्बे प्रेजीडेंसी से टूटकर दो राज्य बने. इन दोनों राज्य को आज महाराष्ट्र और गुजरात के नाम से जाना जाता है. इसी समय बाल ठाकरे ने अखबार की नौकरी छोड़कर कार्टून की एक पत्रिका शुरू कर दी. इस पत्रिका का नाम मार्मिक था. लेकिन उस वक्त महाराष्ट्र में गैर मराठियों का भारी वर्चस्व हुआ करता था. ज्यादातर सरकारी नौकरी में दक्षिण भारतीय ऊंचे ओहदे पर विराजमान थे.

..और किंगमेकर बन गए बाल ठाकरे

गैर मराठियों के वर्चस्व के खिलाफ विरोध के सुर तेज होते गए और वर्चस्व को तोड़ने के लिए बाला साहब ठाकरे ने एक नारा दिया, ‘लुंगी हटाओ पूंगी बजाओ’. इस नारे के साथ ही मराठी मानुष हावी होता गया और उन्होंने सरकारी दफतरों, गैर मराठी लोगों पर हमले शुरू कर दिए. इसके बाद बाल ठाकरे ने 19 जून 1966 को अपनी पार्टी बना ली. पार्टी का नाम शिवसेना रखा गया. पार्टी की पहली रैली के लिए दादर के शिवाजी पार्क में दशहरे का दिन चुना गया. इसी रैली से बाल ठाकरे ने किंगमेकर की भूमिका शुरू कर दी. 

शिवसेना का पहला सियासी इम्तिहान ठाणे म्युनिसिपल चुनाव में हुआ. शिवसेना ने इस चुनाव में 40 में से कुल 15 सीटों पर कब्जा जमा लिया. ये जीत शिवसेना के लिए एक बड़ा संकेत था. गिरगांव और दादर की जनता ने बाल ठाकरे पर भरोसा जताया. इस चुनाव के बाद बाल ठाकरे मराठियों के घोषित नेता बन चुके थे. लेकिन इस दौरान बाल ठाकरे ने ये आभास कर लिया था कि मराठी राजनीति से वो एक राष्ट्रीय नेता के तौर पर नहीं उभर सकते हैं. यही वजह है कि साल 1970 में बाल ठाकरे ने खुद को एक हिंदू नेता के तौर पहचान बनाने की कोशिश शुरू कर दी.

बाला साहब ठाकरे ने शिवसेना को न सिर्फ बनाया, बल्कि कहा ये भी जाता है कि शिवसेना की पहचान ही बाल ठाकरे के चलते है. उस वक्त शिवसेना सूबे में बीजेपी के बड़े भाई की भूमिका अदा करती थी. लेकिन आज वक्त का पहिया घूम चुका है. और शिवसेना को आज इस गठबंधन और बीजेपी के छोटे भाई का दर्जा मिला है. हालांकि बाला साहब ठाकरे के रहते रहते बीजेपी हमेशा ही छोटे भाई के तौर पर रही है.