महाराष्ट्र: गृहमंत्री अमित शाह के इशारे पर 'भूपेंद्र कार्ड' से बनी भाजपा सरकार !

जैसे ही महाराष्ट्र में भाजपा ने हथियार डाल दिए थे राजनीति के सूरमा माने लगे थे कि कुछ नया गेम होने वाला है. भाजपा इतनी जल्दी हार मानने वालों में से नहीं. हुआ भी वहीं. राजनीति के नए चाणक्य गृहमंत्री अमित शाह ने अपने एक तुरूप का इक्का इस्तेमाल किया और शह और मात के इस खेल में अजित पवार को अपने साथ मिला शिवसेना को उसकी गलती का एहसास दिलाया. वह और कोई नहीं भाजपा के केंद्रीय महामंत्री भूपेंद्र यादव ही हैं. 

महाराष्ट्र: गृहमंत्री अमित शाह के इशारे पर 'भूपेंद्र कार्ड' से बनी भाजपा सरकार !

मुबंई: महाराष्ट्र के हाई वोल्टेज ड्रामे का अब अंत हो गया है. भाजपा ने बड़ा कार्ड खेला और एनसीपी के अजित पवार को अपने पाले में किया. सरकार बनी और दूसरी पारी खेलने को कमर कस चुके मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस के बाद सरकार के दूसरे नंबर पर शपथ लिया अजित पवार ने. अजित पवार का भाजपा के साथ आने का फैसला निजी बताते हुए शरद पवार ने कहा कि वह इसका समर्थन नहीं करते. लेकिन सवाल यह है कि क्या अजित पवार ने शरद पवार से बिना पूछे ये फैसला अचानक ही कर लिया ? सिर्फ इसलिए कि शिवसेना का साथ देने से अच्छा उन्हें भाजपा का साथ देना ही अच्छा लगा. दरअसल, शह और मात के इस खेल में गृहमंत्री अमित शाह ने बाजी मारी. और शाह के उस पैंतरे के मुख्य खिलाड़ी थे भूपेंद्र यादव, वहीं भूपेंद्र यादव जो भाजपा के केंद्रीय महामंत्री हैं. 

भूपेंद्र यादव के सहारे महाराष्ट्र में लहराया भगवा झंडा 

भाजपा के केंद्रीय महामंत्री भूपेंद्र यादव को यह जिम्मा दिया गया था कि तमाम लाइमलाइट से दूर वे अजित पवार पर नजरे गड़ाए रखें और बातचीत का सिलसिला जारी रहे. पूरा खेल बड़ी साफगोई के साथ खेला गया. इस खेल के दो सिरे हैं. पहली शिवसेना की ओर जाती है. प्रदेश में सबकी नजरें इस बात पर टिकी रही कि उद्धव ठाकरे अब क्या नया गुल खिलाते हैं. इधर दूसरे सिरे में भाजपा ने चुपचाप अपना काम किया. मीडिया और तमाम राजनीतिक परिदृश्य में शिवसेना के उद्धव ठाकरे और एनसीपी के शरद पवार छाए रहे और असली खेल चिलमन के पीछे से भाजपा के तुरूप के इक्के सह केंद्रीय महामंत्री भूपेंद्र यादव ने कर दिखाया. भाजपा एक तरफ से पिछले हफ्ते तक शिवसेना से बातचीत करती रही कि शायद पार्टी सरकार बनाने को राजी हो जाए. लेकिन पार्टी ने कभी 50-50 फार्मूले पर अपनी रजामंदी नहीं दिखाई. यहीं कारण है कि मामला अंत तक अधर में ही रहा. 

यह भी पढ़ें: नई नहीं है राजनीति में चाचा-भतीजे की रार

टूट गए कईयों के मंत्री पद की शपथ लेने के ख्वाब

अब भाजपा को यह सिग्नल मिल गया था कि शिवसेना से बात नहीं बनने वाली. इसके बाद भगवा झंडे के केंद्रीय महामंत्री भूपेंद्र यादव ने एनसीपी के विधायक दल के नेता अजित पवार के साथ मेल-मिलाप शुरू किया और बातचीत जारी रही. शुक्रवार को बात अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी. ठीक उसी वक्त जब दूसरी ओर एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार कांग्रेस के साथ मिलकर शिवसेना की सरकार बनाने की जद्दोजहद में लगे हुए थे. लोग यह मान चुके थे कि शिवसेना ने कर दिखाया, लेकिन तभी महाराष्ट्र की राजनीति का असली एटम बम आ कर गिरा और कईयों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और कईयों के सुबह उठकर मंत्री पद की शपथ लेने का सपना गले तक आ कर ही बाय-बाय कह ठेंगा दिखाते हुए चला गया.

पहले देवेंद्र फड़णवीस से तो फिर शाह को कहा मेरा काम खत्म हुआ

एनसीपी के अजित पवार से बातचीत पूरी होने के बाद भूपेंद्र यादव ने चैन की सांस लेते हुए पहले महाराष्ट्र के निवर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस से और फिर गृहमंत्री अमित शाह से कहा मेरा काम पूरा हुआ, आगे आप संभालें. इसका मतलब कि यादव ने देवेंद्र फड़णवीस और अजित पवार की बात कराई, सरकार बनाने का खाका तैयार हुआ और अगले ही सुबह झटपट पहले राष्ट्रपति शासन हटाया गया और दो घंटे बाद ही राजनीतिक झटका सबको मिला. देवेंद्र फड़णवीस ने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और साथ दिया उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर अजित पवार ने. 

यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र की राजनीति के नए डार्कहॉर्स 'अजित पवार' क्यों भड़के शरद पवार से ?

अब आगे क्या होने वाला है अजित के साथ ?

महाराष्ट्र की राजनीति का अंत अब भी हुआ है या नहीं सवाल यह भी लगातार उठ रहे हैं. दरअसल, बात यह है कि चाचा शरद पवार से कन्नी काट अजित पवार ने भाजपा को समर्थन तो दे दिया लेकिन शरद पवार फिलहाल माफ करने के मूड में नहीं दिख रहे. एनसीपी के विधायक दल के नेता अजित पवार सहित शाम चार बजे एनसीपी प्रमुख शरद पवार के नेतृत्व में बैठक करेंगे. अब सबकी नजरें इस पर है कि क्या इस बैठक के बाद फिर कुछ अलग तस्वीर देखने को मिलेगी या शरद पवार अपने भतीजे के फैसले के साथ जाते दिखाई देंगे ?