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खडसे की 'शह' पर शाह की 'मात'

लंबे समय से भाजपा से रूठे हुए कद्दावर नेता एकनाथ खडसे की चालाकी उनपर ही भारी पड़ गई. बीजेपी के चाणक्य अमित शाह ने एक ऐसा पासा फेंका कि खडसे के बगावती तेवर ठंडे पड़ गए. और एकनाथ खडसे अपना नामंकन वापस लेने को मजबूर हो गए

खडसे की 'शह' पर शाह की 'मात'
खडसे की चालाकी पर भारी 'शाह नीति'

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह का दांव कभी खाली नहीं जाता है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण हाल ही में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में देखने को मिला है. दरअसल, महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार में मंत्री रहे एकनाथ खडसे लंबे वक्त से अपनी पार्टी से खासा नाराज चल रहे थे. भाजपा ने अपनी तीन टिकट लिस्ट में उनके नाम को शामिल नहीं किया तो उन्होंने ने बगावती तेवर अपनाते हुए निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मुक्ताई नगर सीट से पर्चा दाखिल कर दिया.

एकनाथ खडसे के सुर लंबे समय से अपनी पार्टी के खिलाफ तेज हो रहे थे. ऐसे में कापी हद तक इस बात की आशंका जताई जा रही थी कि उनका टिकट कटना पक्का है और वही हुआ. खडसे ने एक बार या दो बार नहीं बल्कि कई दफा ये इशारा पहले ही कर दिया था कि अगर उन्हें भाजपा से टिकट नहीं मिला तो उनकी राजनीति एक पार्टी तक सीमित नहीं है.

खड़से पर शाह नीति ने ऐसे पाया काबू

भाजपा ने जब मुक्ताई नगर सीट से प्रत्याशी के नाम पर मुहर भी नहीं लगाया था, उससे पहले ही एकनाथ खडसे ने बतौर निर्दलीय प्रत्याशी इस विधानसभा सीट से नामांकन दाखिल कर दिया. जो सीधे तौर पर अपनी ही पार्टी को खुली चुनौती थी. लेकिन खडसे के इस चालाकी का जवाब शाह नीति ने उन्हीं के अंदाज में दिया. जिस सीट से एकनाथ खडसे ने नामांकन दाखिल किया, उसी सीट से भाजपा ने खडसे की ही बेटी को चुनावी मैदान पर उतार दिया. यानी अगर खडसे चुनाव लड़ेंगे तो उनका मुकाबला अपनी ही बेटी के साथ होगा. पार्टी ने खडसे की जगह मुक्ताई नगर सीट से उनकी बेटी रोहिणी को टिकट दिया है. ऐसे में खडसे के पास बैकफुट पर जाने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं बचा. यानी ये कहना सौ टका सही होगा कि शाह नीति से बच पाना हर किसी के बस की बात नहीं है.

महाराष्ट्र की राजनीति में एक से एक दिलचस्प मोड़ आ रहे हैं और जबरदस्त उठा-पटख देखने को मिल रही है. मुक्ताई नगर सीट पर भाजपा से रूठे नेता ने पर्चा दाखिल किया तो पार्टी ने एकनाथ खडसे की जगह उनकी बेटी रोहिणी को टिकट दे दिया. खडसे मुख्यमंत्री फडणवीस के बाद महाराष्ट्र में भाजपा का दूसरा बड़ा चेहरा माने जाते हैं. ऐसे में उनके शह पर जबरदस्त मात मिली है. 

नामांकन दाखिल करके ये कहा...

बतौर निर्दलीय उम्मीदवार पर्चा भरने के बाद एकनाथ ने कहा था, 'मैंने 42 साल तक पार्टी की सेवा की, अगर पार्टी के प्रति निष्ठावान रहना अपराध है तो अपराधी हूं.' हालांकि इस बयान के बाद खडसे भाजपा के प्रति नरम अंदाज में पेश आएं.

आपको बता दें कि खडसे को भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद साल 2016 में राजस्व मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था. वो 1991 से मुक्ताई नगर से विधायक हैं. माना जाता है कि इस क्षेत्र में उनका खासा प्रभाव है. पार्टी उन्हें नाराज नहीं करना चाहती थी, इसीलिए बेटी रोहिणी को मैदान में उतारा गया है. और कहीं न कहीं भाजपा ने उन्हें शांत रखने का सबसे बेहतर पैंतरा अपनाया है.