महाराष्ट्र से सबक सीख झारखंड में फूंक-फूंक कर कदम रख रही है भाजपा

दूध का जला छांछ भी फूंक-फूंक कर पीता है. भाजपा ने शायद यह मंत्र अपने जेहन में उतार लिया है. महाराष्ट्र में पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया, सबसे बड़े जनाधार वाली पार्टी बनी और फिर भी सरकार बनाने से वंचित रही. भाजपा ने महाराष्ट्र में जो गलती की, वहीं गलती अब झारखंड में नहीं दोहराना चाहती. 

महाराष्ट्र से सबक सीख झारखंड में फूंक-फूंक कर कदम रख रही है भाजपा

रांची: झारखंड विधानसभा चुनाव तारीख की घोषणा से पहले कयास लगाया जा रहा था कि भाजपा अपनी सहयोगी दल आजसू के साथ गठबंधन में चुनावी मैदान में उतरेगी. अब के समीकरण कुछ और ही कहानी बयान करने लगे हैं. भाजपा ने पिछले ही दिनों 52 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी. तब तक आजसू से कोई बात नहीं हुई थी. बाकी बचे 29 सीटों में से आजसू 19 सीटें चाहती थी, जो शायद भाजपा के लिहाज से कुछ ज्यादा है. भाजपा ने 9 सीटें देने तक की शर्त रखी. उधर भाजपा की बिहार की सहयोगी दल लोजपा ने भी झारखंड चुनाव में उतरने की इच्छा जताई थी. लेकिन अब लोजपा भी एनडीए से अलग 50 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी. 

आजसू और लोजपा ने की थी सहयोग की मांग

आजसू के सुदेश महतो ने पिछले दिनों कहा था कि वे भाजपा के सहयोगी दल बने रहना चाहते हैं. उन्होंने भाजपा से 19 सीटों की मांग की है. उन्होंने यह भी कहा था कि एनडीए प्रदेश में बड़ी जीत हासिल करेगी. वहीं दूसरी ओर बिहार में एनडीए की सहयोगी पार्टी लोजपा ने भाजपा के सामने झारखंड में साथ उतरने की मंशा जाहिर की थी. लोजपा ने हालांकि सीटों की मांग को लेकर कोई मसौदा नहीं रखा था. और क्योंकि भाजपा ने पहले ही अपने 52 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है तो बाकी बची 29 सीटों में आजसू और लोजपा दोनों ही को सीटें देने की बातें कही गई. लेकिन भाजपा ने आजसू को स्पष्ट तौर पर यह कहा कि पार्टी 9 सीटों से ज्यादा सीट देने को तैयार नहीं. वहीं भाजपा एक और घटक दल के साथ चुनावी मैदान में उतरने के मूड में नहीं. 

चिराग ने कहा 'अकेले लडेंगे चुनाव'

भाजपा की इस चुप्पी के बाद पार्टी का इशारा समझ चुके लोजपा के नए अध्यक्ष और जमुई से सांसद चिराग पासवान ने अलग राह बनाने की ठानी. उन्होंने एनडीए से अलग जाने का फैसला किया और घोषणा किया कि लोजपा झारखंड में 50 सीटों पर अलग चुनाव लड़ेगी. पिछले ही दिनों सांसद चिराग पासवान झारखंड लोजपा प्रमुख बिरेंद्र प्रधान से मिलने पहुंचे थे. वहां पार्टी सदस्यों से बातचीत के बाद आज उन्होंने ट्वीट किया कि "झारखंड में चुनाव लड़ने का आखिरी फैसला प्रदेश ईकाई को लेना था. लोक जनशक्ति पार्टी झारखंड प्रदेश इकाई ने यह फ़ैसला लिया है कि पार्टी 50 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी. आज शाम तक पार्टी के उमीदवारों की पहली सूची का ऐलान हो जाएगा."चिराग के इस फैसले के बाद भाजपा और लोजपा की राहें झारखंड में तो अलग हो गईं हैं.  

रघुबर सरकार के कामों पर भाजपा को नाज

दरअसल, मुख्यमंत्री रघुबर दास के नेतृत्व में प्रदेश में भगवा झंडे की चमक बुलंद हुई है. पार्टी को इस बात का ऐहसास है कि अकेले चुनाव में आने पर भी भाजपा प्रदेश में अपने कामों की बदौलत सरकार बना पाने में सफल होगी. उम्मीदवारों की घोषणा करने रविवार को रांची पहुंचे भाजपा कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी आत्मविश्वास के साथ कहा था कि प्रदेश में भाजपा दोबारा अकेले भी बहुमत के साथ जीतकर सरकार बनाएगी. मुख्यमंत्री रघुबर दास झारखंड में अपना कार्यकाल पूरा करने वाले पहले सीएम हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रदेश पर भ्रष्टाचार और अस्थिर सरकार का जो धब्बा लगा था, वह बहुत हद तक इस सरकार में कम हुआ. 

नहीं चाहते महाराष्ट्र वाली स्थिति

भाजपा ने महाराष्ट्र के तर्ज पर यह फैसला किया कि वह झारखंड में ज्यादातर कमांड अपने पास ही रखेगी. पार्टी ने तकरीबन 36 फीसदी मतों के साथ 105 सीटों पर जीत दर्ज की थी. लेकिन सहयोगी दल शिवसेना के 50-50 फार्मूले वाली जिद के बाद सारा मामला फंस गया. नौबत यह आ गई कि भाजपा सरकार बनाने से बाहर हो गई और अब मामला जनाधार के खिलाफ वाला हो गया है. झारखंड में बेहतर स्थिति में भाजपा फिर से वहीं रिस्क नहीं लेना चाहती और शायद इसलिए पार्टी ने अपने शर्तों पर चुनाव में उतरने का फैसला कर लिया है.