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शिवसेना को ऐसे साथ लाएगी भाजपा! मजबूरी है, लेकिन जरूरी है

शिवसेना की हालत ऐसी हो गई है, कि उसे नाक रगड़कर भाजपा के साथ मिलकर सरकार में शामिल होना ही पड़ेगा. वो भी पिछली बार की तरह, क्योंकि उसके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा. लेकिन सूत्रों ने ये दावा किया है कि भाजपा बिना बहुमत के सरकार बनाने का दावा नहीं पेश करेगी

शिवसेना को ऐसे साथ लाएगी भाजपा! मजबूरी है, लेकिन जरूरी है

नई दिल्ली: महाराष्ट्र में तमाम उठापटक के बीच भारतीय जनता पार्टी सरकार बनाने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है. लेकिन अपनी सहयोगी दल शिवसेना को अपने साथ लाने के बाद ही वह सरकार बनाने का दावा राज्यपाल के सामने पेश करेगी. भाजपा के सू्त्रों ने यह साफ किया है कि महाराष्ट्र में पार्टी बिना बहुमत की सरकार बनाने का दावा पेश नहीं करेगी.

शिवसेना की मजबूरी है, मगर साथ आना जरूरी है

शिवसेना के तल्ख तेवर को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी Wait and Watch की नीति पर चल रही है. भाजपा को पूरा भरोसा है कि महाराष्ट्र में महायुति की ही सरकार बनेगी. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह शिवसेना की मजबूरी भी निकलकर सामने आ रही है. क्योंकि एनसीपी की आड़ में शिवसेना बार-बार भाजपा को अल्टीमेटम दे रही थी. लेकिन इस बीच शरद पवार ने उसकी चाल को बेहाल कर दिया है. पवार ने ये बिल्कुल साफ कर दिया है कि वो शिवसेना को किसी तरह का प्रस्ताव नहीं देंगे. जिसके बाद उसका बैकफुट पर जाना मजबूरी ही सही, मगर अब जरूरी हो गया है.

तो कब तक इंतजार करेगी भाजपा?

कांग्रेस का सेना के साथ किसी तरह के सम्बन्ध नहीं रखने की खबर और शरद पवार का आज का बयान, शिवसेना की उम्मीदों पर ग्रहण का काम कर रहा है. इसके बावजूद सूत्रों का मानना है कि भाजपा शिवसेना के साथ आकर बैकफुट पर जाने के बाद ही सरकार बनाएगी. लेकिन सवाल तो यही है कि आखिर कब ये बातचीत का दौर शुरू होकर बयानबाजी के दौर पर फुलस्टॉप लगेगा? शिवसेना झुकने को तैयार नहीं है, भाजपा आगे बढ़ने को तैयार नहीं है. तो क्या महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगेगा? या फिर ये भी हो सकता है कि भाजपा और शिवसेना के बीच बाच बन गई है. और वो सरकार बनाने का दावा पेश करने की तैयारी में जुट गई हों. लेकिन अपने बैकफुट पर जाने से खबरों के बाजार में अपनी किरकिरी ना होने के डर से शिवसेना इसे जगजाहिर नहीं कर रही हो. अगर ऐसा है तो इसमें ज्यादा हैरानी की बात नहीं होगी. क्योंकि शिवसेना के पास और कोई दूसरा विकल्प बचा ही नहीं है.

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भाजपा सूत्रों का दावा

भाजपा निर्दलीय और छोटी पार्टीयों के साथ 121 विधायक होने का दावा कर रही है, जो बहुमत से काफी कम है
ऐसे में पार्टी ने फैसला किया है कि अपनी तरफ से अल्पमत की सरकार का दावा नहीं करेगी

लेकिन अगर 8 तारीख तक किसी की सरकार नहीं बनती है और राज्यपाल सबसे बड़े दल के तौर पर भाजपा को सरकार बनाने के लिए बुलाते है, तो उस परिस्थिति में पार्टी सभी बड़े नेताओं से विचार विमर्श करने के बाद तय करेगी कि सरकार बनानी है या नहीं.

इतिहास क्या कहता है?

महाराष्ट्र में सरकार के गठन की अंतिम तारीख 8 नवम्बर है. साल 2014 में भी भाजपा ने बहुमत नहीं होने के बावजूद सरकार बनाने का दावा पेश किया था. और एनसीपी ने वॉकआउट करके परोक्ष रूप से भाजपा का समर्थन किया था. सरकार बनने के बाद शिवसेना ने बीजेपी का समर्थन किया था और सरकार में शामिल हुई थी. 

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माना जा रहा है कि भाजपा के लिए पिछली बार वाला फॉर्मूला मास्टरस्ट्रोक साबित होगा. क्योंकि भाजपा अगर ऐसा करती है, और शरद पवार की पार्टी एनसीपी ने पिछली बार की तरह सदन से वॉकआउट कर दिया तो शिवसेना को नाक रगड़कर साथ आने पर मजबूर कर ही दिया था.