close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

शिवसेना के होश ठिकाने लाने के लिए पिछली बार वाला फॉर्मूला ही बेहतर!

महाराष्ट्र में किसकी सरकार होगी, इसे लेकर अबतक संशय बरकरार है. शिवसेना अपने जिद पर अड़ी हुई है, लोकिन शायद वो पिछली बार का हाल भूल चुकी है, कि कैसे उसे नाक रगड़कर भाजपा के साथ सरकार में आना ही पड़ा था. भाजपा को एक बार फिर वही फॉर्मूला अपनाना चाहिए.

शिवसेना के होश ठिकाने लाने के लिए पिछली बार वाला फॉर्मूला ही बेहतर!

नई दिल्ली: हरियाणा में तो भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई में गठबंधन की सरकार बन गई. लेकिन महाराष्ट्र का पेंच लगातार उलझता ही जा रहा है. दो दलों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा वहीं मसला उलझ सा गया है. शिवसेना इस जिद पर अड़ी है कि उसे 50-50 वाले फॉर्मूला और शर्त पर ही सरकार में शामिल होना है. यानी 2.5 साल तक आदित्य ठाकरे को सीएम की कुर्सी देनी होगी.

शिवसेना ने भाजपा को दिया अल्टीमेटम

महाराष्ट्र में सीएम पद को लेकर अब भी खींचतान जारी है. इस बीच शिवसेना नेता संजय राउत ने बीजेपी पर हमला करते हुए पार्टी को अल्टीमेटम दिया है. राउत ने कहा कि शिवसेना को सत्ता की कोई भूख नहीं है, बीजेपी को गठबंधन धर्म का पालन करना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि महाराष्ट्र में कोई दुष्यंत चौटाला नहीं है जिसका पिता जेल में बंद है. हम देख रहे हैं कि कोई कितना गिर सकता है, शिवसेना गंदी राजनीति नहीं करती है.

संजय राउत ने ये भी कहा कि 'शिवसेना सत्य और नीति की ही राजनीति करती है. शिवसेना सत्ता की भूखी नहीं है. सत्ता के लिए कुछ भी करना लोकतंत्र की हत्या करना या किसी को साथ साथ लेकर किसी के खिलाफ चुनाव लड़ना नैतिकता के पाठ पढ़ाना ऐसा बहुत लोग हैं. शिवसेना ने हमेशा खुद को ऐसी राजनीति से दूर रखा है.'

क्या हैं मायने?

शिवसेना लाख ये कह ले कि उसे सत्ता की भूख नहीं है, लेकिन इस वक्त हर कोई देख रहा है कि कैसे वह सीएम की कुर्सी के लिए अपने जिद पर अड़ी है. महाराष्ट्र की सियासत में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि सरकार बनाने को लेकर पेंच कुछ इस कदर फंसा हुआ है. ऐसा ही कुछ नजारा साल 2014 के विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिला था. उस वक्त भी किसी पार्टी को बहुमत हासिल नहीं हुई थी. यहां तक कि भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना ने उस वक्त अलग-अलग चुनाव लड़ा था. उस चुनाव में भाजपा ने अकेले बल पर 122 सीटों पर कब्जा जमाया था.

पिछली बार वाला फॉर्मूला आएगा काम

शिवसेना ने अपने तेवर दिखाकर भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ा दी है. लेकिन, भारतीय जनता पार्टी अगर पिछली बार वाले तर्ज पर दांव खेलती है, तो इस बार भी शिवसेना को नाक रगड़कर मजबूरी में भाजपा के साथ आना ही पड़ेगा. याद दिला दें, कि साल 2014 में जब भाजपा ने अकेले चुनाव लड़कर 122 सीट अपने नाम किया था. उस दौरान बीजेपी ने सबसे पहले राज्यपाल से मुलाकात करके सरकार बनाने का दावा पेश किया था. इस साल भी बीते सोमवार को सीएम देवेंद्र फडणवीस ने राज्यपाल से मुलाकात की है. ऐसे में अगर भाजपा पिछले साल की तरह आगे बढ़कर सरकार बनाती है, तो शिवसेना के पास कोई चारा नहीं बचेगा.

NCP के चक्कर में तो नहीं है शिवसेना?

शिवसेना के हाव भाव से तो कुछ ऐसा ही प्रतीत हो रहा है कि वो सीएम की कुर्सी के लिए भाजपा के बिना भी समझौता कर सकती है. इसके लिए उसने पहले भी संकेत दे दिए थे. शिवसेना ने पहले ही साफ कर दिया है कि अगर भाजपा ने 50-50 वाले फॉर्मूले को नजरअंदाज किया तो वो किसी दूसरे विकल्प के बारे में भी विचार कर सकते हैं. अब ऐसे में संजय राउत का ये ट्वीट हर किसी को ये सोचने के लिए मजबूर कर देगा कि क्या शरद पवार की पार्टी एनसीपी के चक्कर में तो नहीं पड़ रही है ठाकरे की पार्टी.

संजय राउत का ट्वीट

अगर शिवसेना ने ऐसा सोचा भी है तो उसे साल 2014 का हाल जरूर याद कर लेना चाहिए. उस दौर में भी बड़े भाई-छोटे भाई को लेकर छिड़ी जंग में शिवसेना को जबरदस्त पटखनी झेलनी पड़ी थी. इतना ही नहीं, भाजपा ने शिवसेना के बिना ही उस वक्त सरकार बना लिया था और उसे एनसीपी ने सदन के भीतर सरकार बनाने के लिए समर्थन भी दे दिया था. ऐसे में शिवसेना ने अगर NCP के लॉलीपॉप के चक्कर में पड़कर उल्टी सीधी हरकत करने की कोशिश भी की, तो उसके लिए मुश्किलें बढ़ सकती है. कहीं इस बार भी भाजपा को सदन के भीतर समर्थन मिल गया, तो शिवसेना के ना सिर्फ सपनों पर पानी फिर जाएगा, बल्कि उसकी राजनीति पर भी बहुत बुरा असर पड़ेगा.

भाजपा के लिए क्या सचमुच ऑल इज वेल?

शिवसेना के बदले रुख ने महाराष्ट्र में बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. हालांकि, बीजेपी अपनी दुश्वारियों पर ऑल इज वेल का मुलम्मा चढ़ाने से पीछे नहीं हट रही. ठाकरे परिवार से किसी को सीएम की कुर्सी पर देखने की हसरतों को ऐसा पंख लगा है कि शिवसेना को ना तो जनता से किया अपना वादा याद है ना बीजेपी से किया कोई करार, पार्टी ने साफ कर दिया है कि या तो बीजेपी फिफ्टी-फिफ्टी के फॉर्मूले पर अमल करे नहीं तो शिवसेना दूसरे विकल्पों पर भी गौर करने से गुरेज नहीं करेगी. 

शिवसेना चाहती है कि आदित्य ठाकरे 2.5 साल के लिए मुख्यमंत्री बनें. लेकिन बीजेपी इसके लिए कतई तैयार नहीं है. केंद्रीय नेतृत्व ने टू टूक कह दिया है कि फडणवीस ही अगले सीएम होंगे और वो भी पूरे पांच साल के लिए.

हवा ऐसी उड़ रही है, कि शिवसेना कोई भी दूसरे विकल्प के बारे में विचार करने लगी है. लेकिन एनसीपी ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं. आपको बता दें, भाजपा ने अपने विधायक दल की बैठक 30 अक्टूबर को बुलाई है जिसमें देवेंद्र फडणवीस को विधायक दल का नेता चुना जाना तय है. इसके बाद महाराष्ट्र की सियासत किस करवट बैठती है ये देखना बेहद दिलचस्प होगा.

ये वीडियो भी देखें: