मुख्यमंत्री पद का सपना टूटा! तो बेबस राउत भाजपा को देने लगे शाप

शिवसेना ने बाला साहब ठाकरे के सपने का हवाला देकर सीएम की कुर्सी का ख्वाब सजाया. जिस मुख्यमंत्री पद के लिए उसने इतना रायता फैलाया, वो खुद शिवसेना की लुटिया डुबो रहा है. जिसके बाद लाचार संजय राउत ने अब भाजपा को शाप देना शुरू कर दिया है

मुख्यमंत्री पद का सपना टूटा! तो बेबस राउत भाजपा को देने लगे शाप

नई दिल्ली: मुख्यमंत्री की कुर्सी का सपना संजोये शिवसेना ने महाराष्ट्र की राजनीति में ऐसा ड्रामा किया कि वो खुद कहीं की नहीं रही. शिवसेना को इस कगार पर पहुंचाने का इतिहास जब-जब लिखा जाएगा, तब-तब बाला साहब ठाकरे के खास बताए जाने वाले नेता संजय राउत का नाम सर्वोच्च स्थान पर आएगा.

बेबसी, दर्द का आलम!

संजय राउत की बेबसी और दर्द के आलम का तगाजा इससे लगाया जाता है कि वो इस कदर सदमे में हैं कि भारतीय जनता पार्टी को शाप देने लगे हैं. जनाब की आंख भरी-भरी है, लेकिन अपने दुख को छिपाने के लिए वो भाजपा को कोसने का काम बखूबी करते हैं. उनके इसी बड़बोलेपन के वजह से भाजपा-शिवसेना गठबंधन का ये हश्र हुआ कि शिवसेना की राजनीति का सबसे बड़ा सपना ऐसे टूटा कि उद्धव, आदित्य और संजय राउत समेत पूरी की पूरी शिवसेना बिखरी-बिखरी दिखाई दे रही है.

शाप देकर संजय ने निकाली भड़ास

पहले तो भाजपा-शिवसेना के गठबंधन पर महाराष्ट्र की जनता ने भरोसा कर उन्हें बहुमत दिया. लेकिन बच्चों की तरह, कुर्सी-कुर्सी करके शिवसेना ने बखेड़ा खड़ा कर दिया. उटपटांग बातें और अपने ही सहयोगी दल के खिलाफ आवाज बुलंद करने के अंदाज ने शिवसेना की असलियत सबके सामने ला दी. हर कोई समझ गया था, कि शिवसेना के तेवर उसके अलग रास्ते पर चलने के पहले का ट्रेलर है. और अचानक से शिवसेना ने भाजपा से रिश्ता तोड़कर उन पार्टियों को अपना दोस्त बना लिया, जिसे वो एक समय में कोसा करती थी. शिवसेना को सत्ता का स्वाद चखना था, और उसका ये सपना पूरा ही होने वाला था कि एक हाई वोल्टेज के झटके ने उसके सपनों का बंटाधार कर दिया. महाराष्ट्र के सीएम की कुर्सी पर दोबारा फडणवीस विराजमान हो गए. शिवसेना को बड़ा सदमा पहुंचा और उसके बड़बोले नेता संजय राउत की हताशा इस कदर सामने आई कि वो भाजपा को शाप देने लगे.

संजय राउत ने सीएम फडणवीस को पॉकेटमार बताते हुए हमला किया और बोला कि हम सरकार बनाने जा रहे जा रहे थे लेकिन फडणवीस ने पॉकेटमारी कर दी. शिवसेना को हिम्मती करार देते हुए राउत ने कहा कि भाजपा वाले हमारे ऊपर कितना भी जुल्‍म करेंगे, हम झुकेंगे नहीं. भाजपा को कोसते हुए बेबस संजय राउत ने शाप तक दे दिया और कहा कि हमारा शाप है कि भाजपा वाले खत्‍म हो जाएंगे.

ऐसी क्या मजबूरी है, कि शाप देना जरूरी है?

सवाल यहां, ये नहीं है कि संजय राउत ने भाजपा को शाप क्यों दिया? अरे, भाई... दिल टूटा है तो बद्दुआ तो निकलेगी ही. लेकिन शाप देने की स्थिति कब आ जाती है, इस सवाल के जवाब को जानना बेहद जरूरी है. कोई भी इंसान जब किसी सामने वाले को शाप देना शुरू कर दे, उस वक्त ये साबित हो जाता है कि वो सामने वाले का (जिसको शाप दे रहा है) कुछ भी बिगाड़ने की हालत में नहीं रहता है. वो पूरी तरह से टूट चुका रहता है. उसके पास कोई चारा नहीं बचता है, सिवाय अपने दुश्मन को बद्दुआ और शाप देने के. तो क्या शिवसेना की हालत दिल टूटे आशिक़ जैसी ही हो गई है? जिसकी प्रेमिका की शादी हो चुकी है? जो चाहकर भी कुछ करने की स्थिति में नहीं है, हां मगर उसके पति को सिर्फ शाप दे रहा है. 

(नोट- उपर लिखे वाक्य में प्रेमिका का तात्पर्य सीएम की कुर्सी से है, और पति का अर्थ कुर्सी पर विराजमान होने वाले सत्ताधारी पार्टी का है)

जारी है सियासी कशमशक

अगर सचमुच शिवसेना की हालत ये हो गई है, तो उसके इस दर्द का इलाज भला कैसे होगा? हालांकि, तीनों पार्टियों (एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना) ने देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है. महाराष्ट्र में बहुमत का बाहुबली कौन बनेगा. इसका ठीक-ठीक जवाब आज भी नहीं मिल पाया. राजनीति के इस सबसे नाटकीय अध्याय पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने तुरंत फ्लोर टेस्ट कराने की मांग को नामंजूर कर दिया. इसे सीएम देवेंद्र फड़णवीस के लिए थोड़ी राहत मान सकते हैं, लेकिन आगे क्या होने वाला है. इस पर सस्पेंस के बादल अब भी कायम हैं. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कल भी सुनवाई जारी रखने वाला है. यानी महाराष्ट्र में आगे क्या होगा.

भाजपा को ये मौका मिल गया है कि वो अपने समर्थक विधायकों को एकजुट कर सके. वहीं शरद पवार की पार्टी एनसीपी को ये मौका मिल गया है कि वो अजित पवार और नाराज विधायकों को मना सके. शिवसेना को इस बात का मौका है कि फडणवीस सरकार के ख़िलाफ रणनीति तेज कर सके. वहीं कांग्रेस को फडणवीस सरकार के खिलाफ रणनीति बनाने का मौका मिला है. इन सभी के अलावा राज्य की अन्य पार्टियों और निर्दलीय विधायकों को ये सोचने का मौका मिल गया है कि वो फडणवीस सरकार या विपक्ष में से किसी को चुन सकें.

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लेकिन इन सबके इतर संजय राउत कभी बड़बोलेपन से भाजपा को खरी खोटी सुनाते हैं, तो कभी शाप देकर रायता फैलाते हैं. ये कहना गलत नहीं होगा कि संजय राउत के फैलाए हुए रायते से शिवसेना फैल गई है. महाराष्ट्र के सीएम की कुर्सी के लिए जैसे ही देवेंद्र फडणवीस ने शपथ लिया संजय राउत ने भाजपा को पाप का सौदागर बता दिया.

संजय राउत कभी क्लर्क हुआ करते थे, फिर एडिटर बनकर राजनीति में आए. चुनावी नतीजे आने के बाद उन्होंने भाजपा-शिवसेना के गठबंधन को मिट्टी में मिलाने में अहम किरदार निभाया. कभी शायरी के जरिए तो कभी अपने लेख को हथियार बना कर उन्होंने शिवसेना की खूब जगहंसाई कराई. लेकिन लगता है कि अब उन्होंने हथियार डाल दिए है और वो शाप देकर ही भाजपा के खात्मे और शिवसेना की भलाई की दुआ मांगनी शुरू कर दी है.

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