सावरकर पर कांग्रेस का बयान, अदालत का अपमान

भारतीय जनता पार्टी ने वीर सावरकर को भारत रत्न देने की बात अपने संकल्प पत्र में शामिल की तो देश की सियासत में हो-हल्ला शुरू हो गया. पूरा विरोधी खेमा इस मसले पर अपनी छाती पीटने लगा. कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने तो सावरकर को लेकर कोर्ट के फैैसले को ही कटघरे में खड़ा कर दिया.

सावरकर पर कांग्रेस का बयान, अदालत का अपमान

नई दिल्ली: महाराष्ट्र चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने मास्टरस्ट्रोक खेला तो ये बात कांग्रेस और विरोधियों के गले आसानी से नहीं उतर रही है. भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) को भारत रत्न देने की बात शामिल की तो विपक्ष को ये बात कांटे की तरह चुभने लगी.

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कोर्ट का अपमान करते हुए वीर सावरकर को महात्मा गांधी की हत्या के पीछे साजिश में संलिप्त होने की बात कह दी. जबकि इस मामले में उन्हें कोर्ट ने बरी कर दिया था.

दिग्विजय सिंह ने क्या कहा?

दिग्विजय ने अपने बयान में भाजपा पर तंज कसते हुए ये कह दिया कि 'उनके (सावरकर) जीवन के 2 पहलू हैं, एक जो स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भागीदारी और माफी मांगने के बाद जब वे वापस आए. इसके अलावा उनका नाम महात्मा गांधी की हत्या के पीछे साजिश में भी दर्ज किया गया था.'

इसके अलावा कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने भी सावरकर को भारत रत्न देने के वायदे को कटघरे में खड़ा कर दिया.

मनीष तिवारी का तंज

उन्होंने सवाल पूछते हुए कहा कि भाजपा सावरकर को ही भारत रत्न क्यों देना चाहती है? गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को क्यों नहीं? तिवारी ने कहा, 'महात्‍मा गांधी की हत्‍या को लेकर सावरकर पर आरोप लगे थे, चार्जशीट फाइल हुई थी. लेकिन बाद में वह बरी हो गए'

अब ऐसे में ये सवाल उठता है कि अगर देश की अदालत ने किसी को निर्दोष साबित कर दिया है. तो भला कांग्रेस पार्टी और विरोधियों को इससे परेशानी क्या है? भाजपा के घोषणापत्र में शामिल इस मुद्दे का विरोध सिर्फ कांग्रेस पार्टी ही नहीं बल्कि ओवैसी भी कर रहे हैं.

क्या हुआ था उस वक्त?

दरअसल, साल 1948 में आजादी के कुछ महीने बाद महात्मा गांधी की हत्या के 6ठे दिन वीर सावरकर को हत्या के षड्यंत्र में शामिल होने की आशंका जताकर मुंबई से गिरफ्तार कर लिया गया था. लेकिन अगले साल फरवरी 1949 उन्हें में रिहा कर दिया गया था. इससे ये साबित हो गया था कि इस हत्याकांड में उनकी किसी प्रकार की संलिप्तता नहीं है.

इससे पहले भी हुई भारत रत्न की मांग

आपको बता दें, ये पहली दफा नहीं है जब भाजपा ने वीर सावरकर को भारत रत्न देने की बात कही हो, इससे पहले साल 2000 में अटल बिहारी वायपेयी की सरकार ने तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन को भारत रत्न के लिए प्रस्ताव भेजा था. लेकिन उस वक्त इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया था.

कौन हैं विनायक दामोदर सावरकर?

वीर सावरकर का जन्म साल 1883 में मुंबई (उस वक्त का बॉम्बे) में हुआ था. वो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बड़े क्रांतिकारी थे. इसके साथ ही वो एक राजनेता, वकील, लेखक, समाज सुधारक, विचारक, चिंतक और साहित्यकार भी थे. मुस्लिम लीग के जवाब में उन्होंने हिंदू महासभा से जुड़कर हिंदुत्व का झंडा ऊंचा किया था.

अंग्रेजों से बगावत के चलते उन्हें काला पानी की सजा सुनाई गई और 25 साल के लिए अंडमान भेज दिया गया. हालांकि करीब 9 साल के बाद ही उनकी इस सजा को खत्म कर दिया गया. 1966 में सावरकर के निधन के बाद भारतीय राजनीति में उनका नाम बार-बार लिया जाने लगा. कोई उन्हें विलेन साबित करना चाहता है तो कोई उन्हें हीरो मानता है. भाजपा या फिर RSS से उनका कोई ताल्लुक नहीं था, लेकिन भारतीय राजनीति का ये हिस्सा वीर सावरकर का सम्मान करती है.