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हरियाणा में सरकार बनाना कांग्रेस के लिए है दूर की कौड़ी

हरियाणा के चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस पार्टी में भी जद्दोजहद बढ़ गई है. लगातार तिकड़में चल रही हैं. कांग्रेस की कोशिश हरियाणा में सरकार बनाने से ज्यादा भाजपा को सत्ता से दूर रखने की लगती है.   

हरियाणा में सरकार बनाना कांग्रेस के लिए है दूर की कौड़ी
हुड्डा को कमान सौंपने में हुई देर

नई दिल्ली: हरियाणा में कांग्रेस चूक जरुर गई है. लेकिन पिछले दरवाजे से उसकी कोशिशें लगातार जारी हैं. मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की तमाम कोशिशों के बावजूद कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से काफी दूर रह गई. लेकिन फिर भी वह जोड़ तोड़ करने से बाज नहीं आ रही है. 

जेजेपी के समर्थन से भी बनता नहीं दिख रहा काम
हरियाणा में सरकार बनाने के लिए कम से कम 46 विधायक चाहिए. लेकिन हरियाणा में कांग्रेस 31 सीटों पर ही सिमटकर रह गई है. ऐसी स्थिति में उसे कम से कम 15 विधायकों का समर्थन हासिल करना होगा. सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि कांग्रेस नेता दुष्यंत चौटाला की जननायक जनहित पार्टी का समर्थन हासिल करने की फिराक में हैं. लेकिन बात इससे भी बनती हुई नहीं दिखाई दे रही है. क्योंकि दुष्यंत की जेजेपी के 10 विधायक जीते हैं. अगर यह सभी कांग्रेस का समर्थन कर भी दें तो उसके पास 41 ही विधायक होंगे. जो कि बहुमत के 46 विधायकों के आंकड़े से काफी दूर है. 

निर्दलीय विधायकों पहले ही भाजपा के पाले में जा चुके हैं
कांग्रेस को हरियाणा में सरकार बनाने के लिए जेजेपी के अलावा 5 निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन हासिल करना होगा. लेकिन ऐसी खबर है कि हरियाणा में जीते हुए 9 निर्दलीय विधायकों में से 8 विधायकों को भाजपा ने अपने पाले में खींच लिया है. ऐसे में कांग्रेस के पास ज्यादा विकल्प बचते हुए नहीं दिखाई दे रहे हैं. 

दुष्यंत चौटाला को सीएम बनाने का शिगूफा
ऐसी खबर आ रही है कि कांग्रेस ने दुष्यंत चौटाला को मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव दिया है. हालांकि उनके पास महज 10 ही विधायक हैं. लेकिन अगर वह 5 निर्दलीयों का समर्थन हासिल कर लेते हैं तो कांग्रेस बाहर से समर्थन करके उनकी सरकार बनवा सकती है. कांग्रेस के रणनीतिकार कर्नाटक में ऐसा प्रयोग कर चुके हैं. ऐसा करने से कांग्रेस अपना मुख्यमंत्री तो नहीं बना पाएगी. लेकिन भाजपा को सत्ता से दूर रखने में जरुर सफल हो जाएगी. लेकिन हरियाणा की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए ऐसा हो पाना संभव नहीं लगता है. 

हुड्डा के हाथ में होती कमान तो कांग्रेस को मिल सकती थी सत्ता
हरियाणा में कांग्रेस की इस दुर्गति का कारण पार्टी के अंदर अंदरुनी खींचतान रही. 2014 में हुए आम चुनाव के बाद से ही पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. लेकिन उन्हें अपनी बात कांग्रेस आलाकमान तक पहुंचाने में पूरा 5 साल लग गए. बात इतनी बढ़ी कि हुड्डा ने राज्य में कांग्रेस तोड़ने तक की धमकी दे दी थी. आखिरकार चुनाव से मात्र 15 दिन पहले हुड्डा को हरियाणा की कमान सौंप दी. ऐसे में उनके पास उम्मीदवारों के चयन और तैयारी के लिए बहुत कम समय बचा. हालांकि हुड्डा फिर भी कांग्रेस को मुकाबले में ले आए. उन्हें जितना कम समय तैयारी के लिेए मिला था, उस लिहाज से कांग्रेस का प्रदर्शन हरियाणा में बहुत बेहतर रहा. 
ऐसे में सबके मन में यही सवाल आता है कि अगर हुड्डा को पहले ही कांग्रेस की कमान सौंपी जाती तो शायद कांग्रेस को हरियाणा में और सीटें मिल जाती. 

लेकिन फिलहाल तो वर्तमान समीकरणों के हिसाब के हरियाणा में कांग्रेस की सरकार बनती हुई नहीं दिखाई दे रही है.