close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

चुनावी बयानबाजियों के दौर में अब तक 'किसने क्या खोया, किसने क्या पाया'! यहां पढ़ें

चुनाव के दौरान बयानबाजियों का बाजार कितना गर्म रहता है ये हर दिन टीवी रिपोर्ट्स से आपको मालूम चल ही जाता होगा, लेकिन इन बयानबाजियों का चुनावी माहौल पर कितना असर पड़ता है, आइए बीते कुछ उदहारणों से इसकी पड़ताल करते हैं...  

चुनावी बयानबाजियों के दौर में अब तक 'किसने क्या खोया, किसने क्या पाया'! यहां पढ़ें

नई दिल्ली:  हरियाणा और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव को लेकर हर दिन चुनावी सभा और रैलियां धड़ल्ले से चल रही हैं. तमाम बड़े से छोटे राजनीतिक दल इस बात को मान कर चलते हैं कि जितनी ज्यादा बयानबाजी होगी, उतना फायदा उन्हें चुनाव परिणामों पर मिलेगा. कई बार ये भी होता है कि किसी खास बयान पर कोई नेता इतना घिर जाता है कि उसे और उसकी पार्टी को हार के रूप में इसका भुगतान करना पड़ जाता है. हरियाणा में फिलहाल यहीं रस्सा-कस्सी चल रही है भाजपा और कांग्रेस के बीच. मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी  इस नोंक-झोंक के लीड कैरेक्टर हैं .

खट्टर के बयान के पीछे ही पड़ गईं सुष्मिता 

हरियाणा के कैथल में एक रैली को सम्बोधित करते हुए निवर्तमान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के गैर-लोकतांत्रिक तरीके से अध्यक्ष चुने जाने के फैसले पर तंज कसा. उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद पार्टी के अध्यक्ष पद त्याग देते हैं, फिर 3 महीने तक ये बातें चलती हैं कि पार्टी का नया अध्यक्ष गैर-कांग्रेसी होगा, फिर यकायक सोनिया गांधी को ही अंतरिम अध्यक्ष चुन लिया जाता है. ये तो वहीं बात हुई कि "खोदा पहाड़ और निकली चुहिया." अब बस यहीं बयान जिसपर आ कर कांग्रेस अड़ गई. गुरूवार को दिए गए इस बयान को आड़े हाथों लेते हुए कांग्रेस की ऑल इंडिया महिला कांग्रेस प्रमुख सुष्मिता देव ने इसे निंदनीय और असंसदीय करार दिया. अब ये अलग बात है कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने भी खट्टर के लिए अमर्यादित टिप्पणियां भी की, जिसपर सुष्मिता देव कुछ न बोल पाईं.

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ कैंपेन की भी की आलोचना

सुष्मिता देव ने हरियाणा सरकार के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कैंपेन की आलोचना करते हुए कहा कि हरियाणा क्राइम रेट के मामले में चौथे स्थान पर है और राज्य में पुलिस की संख्या 27 प्रतिशत तक गिरी है. हालांकि, कांग्रेस के लिए ये अच्छा है कि वे हरियाणा सरकार की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कैंपेन के आंकड़ों और महिला सशक्तिकरण के मामले पर खट्टर सरकार को नहीं घेरा, वरना वे खुद घिर सकते थे.

खैर चुनाव में इन बयानबाजियों के क्या परिणाम हुए हैं, इसे कुछ केस के माध्यम से समझा जा सकता है

  • 2017 में  गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के मणिशंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री को नीच कहा. उस बयान से कांग्रेस न सिर्फ बैकफुट पर आ गई, बल्कि कांग्रेस ने गुजरात में अपनी जमीन खोनी शुरू भी कर दी.

  • 2019 का लोकसभा चुनाव तो जैसे मिसाल पेश कर रहा हो बयानबाजियों से दोहरे नुकसान का. कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी ने मंच से बार-बार मोदी सरकार पर चौकीदार चोर है का नारा दिया. इस नारे से त्रस्त जनता बिना प्रमाण खीझ गई और चौकीदार को फिर से बड़ा जनाधार दे उसे खारिज कर दिया. इसके बाद कांग्रेस के राहुल गांधी को कोर्ट से भी आदेश मिला कि वो इस बयान के लिए माफी मांगें. 

बयानों के इस दौर से किसी दल को जितना फायदा होता है, कई बार कुछ बयानों से दांव उल्टा भी पड़ जाता है. लेकिन यथार्थवाद के चिंतक मॉर्गेंथो कहते हैं कि राजनीति सिद्धांतों से बंध कर नहीं रह सकती और शायद हालिया समय में ये चिंतन उतना ही प्रासंगिक लगता है.