दिल्ली चुनावः क्या सिर्फ सुभाष चोपड़ा हार के जिम्मेदार हैं, क्यों देना पड़ा इस्तीफा

दिल्ली में जिस तरह से कांग्रेस के नेता चुनावी अभियान में ढिलाई बरत रहे थे, उससे चुनाव परिणाम का अंदाजा लग रहा था. दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी शीला दीक्षित के नेतृत्व में 15 साल तक सत्ता में रही है और अब 10 साल तक सत्ता से बाहर रहने वाली है.

दिल्ली चुनावः क्या सिर्फ सुभाष चोपड़ा हार के जिम्मेदार हैं, क्यों देना पड़ा इस्तीफा

नई दिल्लीः दिल्ली विधानसभा चुनाव के परिणाम आ चुके हैं और कांग्रेस की हालत पांच साल पहले की ही तरह है. इस बार भी देश की सबसे पुरानी और राजनीतिक विरासत कही जाने वाली पार्टी को दिल्ली में जीरो नंबर मिले हैं. आप की जीत और भाजपा की हार के बीच कांग्रेस का कहीं नामलेवा नहीं बचा है और इसी हालत को देखते हुए दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने मंगलवार शाम इस्तीफा दे दिया. करारी हार के बाद चोपड़ा ने पद से इस्तीफा दे दिया है. दिल्ली में कांग्रेस केवल 3 सीटों पर जमानत बचा पाई है, बाकी सभी सीटों पर कांग्रेस की जमानत तक जब्त हो गई है. 

कांग्रेस के हाथ लगी 2015 की स्थिति
कांग्रेस दिल्ली में एक भी सीट बचा पाने में सफल नहीं रही है. हार की जिम्मेदारी लेते हुए सुभाष चोपड़ा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. कांग्रेस 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में भी एक भी सीट हासिल नहीं कर पाई थी. वहीं भारतीय जनता पार्टी भी केवल 3 सीटें हासिल कर पाई थी. 2020 के चुनाव में भाजपा को 8 सीटें हासिल करने में कामयाबी मिली है तो वहीं आम आदमी पार्टी को 62 सीटों पर जीत हासिल हुई है. 

15 साल सत्ता में रही कांग्रेस 10 साल रहेगी बाहर
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस की दिग्गज नेता शीला दीक्षित के बाद से ही कांग्रेस पार्टी दिल्ली में शिथिल पड़ गई थी. कांग्रेस के नेता न तो उतनी सक्रियता से विधानसभा चुनावों में उतरते नजर आए, न ही पार्टी का शीर्ष नेतृत्व दिल्ली चुनाव के लिए गंभीर नजर आया. दिल्ली कांग्रेस की एक बार फिर करारी हार हुई है. यहां तक राहुल गांधी की रैली भी बिल्कुल प्रचार के अंतिम चरण में हुई.

दिल्ली में जिस तरह से कांग्रेस के नेता चुनावी अभियान में ढिलाई बरत रहे थे, उससे चुनाव परिणाम का अंदाजा लग रहा था. दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी शीला दीक्षित के नेतृत्व में 15 साल तक सत्ता में रही है और अब 10 साल तक सत्ता से बाहर रहने वाली है.

कांग्रेस के दफ्तर पर सन्नाटा
कांग्रेस में बड़े स्तर पर कैंपेनिंग में कमी दिखी. जहां पार्टी की जीत के बाद आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता अपने दफ्तर में खुशियां मनाते दिखे, वहीं कांग्रेस के दफ्तर में सन्नाटा पसरा रहा. कांग्रेस यह मानकर चल रही थी कम से कम 1 से 3 सीटों के बीच सीटें आ ही जाएंगी, लेकिन कांग्रेस शू्न्य पर सिमटी रही. कांग्रेस को दिल्ली की जनता ने दूसरी बार भी खारिज कर दिया.

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सुभाष चोपड़ा ने ली हार की जिम्मेदारी
दिल्ली कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने हार की जिम्मेदारी ली है. केजरीवाल सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार दिल्ली की जनता को गुमराह करने में सफल रहे. उन्होंने 3 हजार करोड़ रुपये विज्ञापनों में खर्च दिए. सुभाष चोपड़ा ने यह भी कहा कि शीला दीक्षित के 15 साल के कार्यकाल में  जितना काम हुआ, वहां तक कोई भी पार्टी नहीं पहुंच पाई. 

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