अपने ही परिवार से जूझकर 'जननायक' बने हैं दुष्यंत चौटाला

हरियाणा की राजनीति आज दुष्यंत चौटाला की हां और ना पर टिकी हुई है. भाजपा और कांग्रेस जैसे दिग्गज राष्ट्रीय पार्टियां उनकी हां के इंतजार मे पलक पांवड़े बिछाए बैठी है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुष्यंत को यह मुकाम हासिल करने के लिेए अपने ही परिवार से जूझना पड़ा था- 

अपने ही परिवार से जूझकर 'जननायक' बने हैं दुष्यंत चौटाला

चंडीगढ़ः त्रिशंकु होने की तरफ बढ़ रही हरियाणा विधानसभा में महज 11 महीने पहले ही बनी जननायक जनता पार्टी किंगमेकर बनकर उभर रही है. इसके अध्यक्ष दुष्यंत चौटाला पर भाजपा-कांग्रेस दोनों डोरे डाल रहे हैं. ऐसे में दुष्यंत जैसा राजनेता अनायास ही हरियाणा की राजनीति को अपने चौटाला परिवार के आंगन में खींच ले जाता हुआ दिखता है, जहां कभी कद्दावर नेता और डिप्टी पीएम रहे देवीलाल शान से बैठे हैं, और पांच बार हरियाणा सीएम रहे ओम प्रकाश चौटाला खेले हैं. लेकिन आज उसी आंगन का राजनीतिक बंटवारा हो चुका है और नौजवान पीढ़ी अलग हो चुकी है. जानते हैं चौटाला परिवार के इस अलगाव की कहानी-

यहां से हुई अलगाव की शुरुआत
तारीखें इतिहास बनाती हैं और इनेलोडी के आज के वर्तमान का इतिहास महज एक साल पहले की घटना में छिपा है. दरअसल 3 अक्टूबर 2018 को गुरुग्राम में कार्यकर्ताओं की एक बैठक हुई. इसमें ओमप्रकाश चौटाला पहुंचे थे और बेटे अभय चौटाला की तारीफ की, लेकिन युवा नेता दुष्यंत का नाम नहीं लिया. अभय चौटाला दुष्यंत के चाचा हैं. कह गया कि ओपी चौटाला की इस बात पर दुष्यंत के कट्टर समर्थक बुरा मान गए और इसे उनका अपमान समझ लिया. यहीं से आगे के विरोध की जमीन तैयार हो गई. इसके तीन दिन बाद 6 अक्टूबर को अभय चौटाला गोहाना में होने वाली एक रैली तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे थे. यहां पर गुरुग्राम की घटना से नाराज दुष्यंत के समर्थकों ने हंगामा कर दिया. अभय गोहाना से लौट आए 

गोहाना रैली में क्या हुआ
इसके अगले ही दिन 7 अक्टूबर को गोहाना में रैली थी. इनेलो की इस रैली में मंच पर चौटाला परिवार था. ताऊ देवीलाल के सम्मान में की गई इस रैली का नाम सद्भावना सम्मान रैली रखा गया था, लेकिन इस सद्भावना के बीच परिवार का सौहार्द बिगड़ गया. हुआ यह है कि युवा नेता दुष्यंत चौटाला जो कि तब हिसार सांसद बन चुके थे, वह एक ट्रैक्टर रैली का नेतृत्व करते हुए सभा स्थल पर पहुंचे और इसके बाद मंच पर गए. इसी बीच दुष्यंत के समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की. उन्होंने एक तरह से ऐलानिया नारे लगाए. हमारा नेता कैसा हो, दुष्यंत चौटाला जैसा हो. इसके बाद मंच से अभय चौटाला के बोलने की बारी आई तो दुष्यंत समर्थक शोरगुल करते रहे. दुष्यंत बोलने खड़े हुए तो सभी चुप रहे. इसके बाद दादा ओपी चौटाला ने मंच पर दुष्यंत को फटकार भी लगाई. इसके बाद जब ओपी खुद बोलने खड़े हुए तो एक तरीके से चेतावनी देते हुए कहा कि यह जो नारे लगाने और हो हल्ला मचाने का काम करते हैं वह एक तरीके से माहौल बिगाड़ने का काम करते हैं. ऐसे लोग सुधर जाएं नहीं तो चुनाव से पहले उन्हें हम पार्टी से निकालकर बाहर कर देंगे.

फिर अमल में लाई गई नाराजगी
इसके बाद ओपी चौटाला ने दुष्यंत के छोटे भाई दिग्विजय को पहले जमीन दिखाई. दिग्विजय ने ही रैली में युवाओं की भीड़ जुटाई थी. वह इनेलो के स्टूडेंट और यूथ फ्रंट के मुखिया थे. ओपी चौटाला ने तुरंत ही इसकी सब जिला इकाई भंग कर दीं. हिसार और दादरी की जिला इकाई के प्रधान भी बदल दिए गए, इन्हें दुष्यंत का करीबी माना जाता था. इस तरह पार्टी में दुष्यंत का कद छोटा हो गया. इसके बाद जो हुआ सभी जानते हैं. पार्टी से निकाले जाने के बाद दिसंबर 2018 में दुष्यंत चौटाला ने नई पार्टी खड़ी की, नाम रखा जननायक जनता पार्टी.

इतिहास ने खुद को दोहराया


चौटाला परिवार का आज का अलगाव-टकराव राजनीतिक गलियारे की चर्चित कहानी है. जिन ओमप्रकाश चौटाला की नारजागी ने आज एक परिवार में दो राजनीतिक पार्टियां खड़ी की हैं, वही स्थिति कभी उनके पिता देवीलाल के सामने भी रही थी. देवीलाल के भी दो बेटे थे ओमप्रकाश और रणजीत. देवीलाल ने अपना राजनीतिक वारिस ओमप्रकाश को बनाया और नाराज रणजीत कांग्रेस चले गए. आज ओमप्रकाश भी अपने बेटे और प्रपौत्र के बीच यही स्थिति होते देख रहे हैं.