close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

महाराष्ट्र में सरकार की सूरत साफ नहीं! तो फिर फडणवीस ने उद्धव का आभार क्यों जताया?

महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार पर बीजेपी-शिवसेना के रुख में नरमी आई है, लेकिन पेंच अभी तक सुलझा नहीं है. बीजेपी विधायक दल के नेता फड़णवीस चुने गए. इस दौरान उन्होंने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का आभार जताया.

महाराष्ट्र में सरकार की सूरत साफ नहीं! तो फिर फडणवीस ने उद्धव का आभार क्यों जताया?

नई दिल्ली: महाराष्ट्र विधानसभा के नतीजे आए अब एक हफ्ते का वक्त बीत चुका है लेकिन सरकार गठन की तस्वीर साफ होने की बजाय और उलझती जा रही है. शिवसेना अभी भी 50-50 के फॉर्मूले पर अड़ी हुई है. जिसके तरह वो बीजेपी से आदित्य ठाकरे को सीएम स्वीकार करने का लिखित आश्वासन चाहती है. उधर भाजपा साफ कर चुकी है कि सरकार तो बीजेपी-शिवसेना गठबंधन की ही बनेगी लेकिन सीएम देवेन्द्र फडणवीस ही होंगे.

फडणवीस ने जताया उद्धव का आभार

देवेंद्र फडणवीस भाजपा विधायक दल का नेता चुने गया है, लेकिन इस दौरान सबसे हैरान करने वाला पल वो था जब सीएम फडणवीस ने इस दौरान शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का आभार जताया. फडणवीस ने ये कहा कि महाराष्ट्र में जनता ने गठबंधन पर भरोसा जताया है और यहां गठबंधन की ही सरकार बनेगी.

भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद बीजेपी नेता प्रसाद लाड ने सीधे शब्दों में यह साफ कर दिया है कि 'मुख्यमंत्री भाजपा का ही होगा और देवेंद्र फडणवीस ही बनेंगे. और जहां तक फॉर्मूला का सवाल वो राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी के बीच की बातें हैं.'

शिवसेना ने बुलाई इमरजेंसी बैठक

साफ है कि बीजेपी बतौर सीएम फडणवीस से अलग कुछ भी सोचने को तैयार नहीं है. इसी कड़ी में उन्हें बगैर लाग-लपेट बीजेपी विधायक दल का नेता भी चुन लिया गया है. उधर शिवसेना ने बीजेपी की गतिविधियों को काउंटर करने के लिए गुरुवार दोपहर 12 बजे मातोश्री में इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है. दरअसल सूत्रों के हवाले से खबर है कि शिवसेना अपने अड़ियल रवैये की वजह से दो धड़ो में बंट गई है. 

पहला गुट वो है जो 50:50 के फॉर्मूले पर अड़ा हुआ है. इस गुट में है सांसद संजय राउत, विधायक अनिल परब और दिवाकर राउते जैसे नेता हैं.

जबकि दूसरा गुट उद्धव ठाकरे को नरम रुख अपनाने का दबाव डाल रहा है. इस गुट में सांसद अनिल देसाई, मंत्री सुभाष देसाई और विनायक राउत जैसे नेता शामिल हैं.

हालांकि शिवसेना के कुछ नेता ऐसे भी हैं जो न्यूट्रल हैं. न्यूट्रल नेताओं में पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर जोशी सांसद आनंदराव अडसुल और केंद्रीय मंत्री अरविन्द सावंत शामिल हैं.

ये दांव खेल सकती है भाजपा

सवाल ये है कि जब दोनों ही दल सीएम को लेकर अड़ियल हैं तो आखिर रास्ता क्या बचता है. सूत्रों की माने तो समझौता की सूरत कुछ इस तरह की हो सकती है. सीएम की कुर्सी, गृह मंत्रालय, नगर विकास मंत्रालय और राजस्व मंत्रालय बीजेपी अपने पास रखेगी. शिवसेना को मनाने के लिए बीजेपी उनके मंत्रियों का कोटा बढ़ा सकती है. शिवसेना की झोली में पिछली बार 12 मंत्री थे. जिसे बढ़ाकर बीजेपी 14 की पेशकश कर सकती है. इसके अलावा शिवसेना को डिप्टी सीएम का पद भी दिया जा सकता है. इतने से भी अगर शिवसेना नहीं मानी तो केंद्रीय मंत्रिमंडल में शिवसेना के लिए एक राज्यमंत्री का भी ऑफर दिया जा सकता है.

शिवसेना भी इस उलझन से निकलने के लिए खास रणनीति पर काम कर रही है. सूत्रों के मुताबिक बड़बोले संजय राउत को जुबान पर लगाम रखने के लिए कहा जा सकता है. इसके अलावा आदित्य ठाकरे का पहले से तय कोंकण दौरा रद्द कर दिया गया है. उन्हें मुंबई में ही रहने को कहा गया है. शिवसेना की रणनीति के मुताबिक उद्धव ठाकरे अमित शाह से बातचीत करेंगे जबकि आदित्य ठाकरे को फडणवीस के साथ बातचीत की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी. वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता सुभाष देसाई और दिवाकर रावते को बीजेपी स्टेट लीडरशिप से बातचीत की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

कुल मिलाकर बात ये है कि शिवसेना भी जमीनी सच्चाई जानती है. इसलिए वो अंदर ही अंदर बारगेनिंग का मन बना रही है ताकि सीएम की कुर्सी नहीं मिलने की सूरत में ज्यादा से ज्यादा मंत्रालय मिल सके. लेकिन भाजपा ने यह साफ कर दिया है कि महाराष्ट्र में फुल टाइम सीएम देवेंद्र फडणवीस ही बनेंगे.