क्या कर्नाटक-गोवा के रास्ते पर पहुंच गई है महाराष्ट्र की विधानसभा

महाराष्ट्र विधानसभा का सियासी गतिरोध उलझते-उलझते सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे जा पहुंचा है. अब थोड़ी ही देर में कोर्ट में इस पर सुनवाई शुरू होगी. इस तरह के हालात बनते ही पिछले साल गोवा और कर्नाटक का हाल याद रहा है. यहां भी सरकारों का गठन महज जनादेश के आधार पर नहीं हुआ है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट की मुहर से हुआ है. लगता है महाराष्ट्र विधानसभा कर्नाटक और गोवा के हालात में पहुंच गई है. 

Written by - Vikas Porwal | Last Updated : Nov 24, 2019, 11:24 AM IST
    • 2017 में हुए थे गोवा विधानसभा चुनाव, सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप रहा था
    • कर्नाटक में बनी भाजपा सरकार को एक बार गिरना पड़ा था

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क्या कर्नाटक-गोवा के रास्ते पर पहुंच गई है महाराष्ट्र की विधानसभा

मुंबईः महाराष्ट्र में महीने भर की मुद्दतों के बाद सरकार बनी भी तो मामला तुरंत ही खटाई में पड़ गया. हुआ यह कि रात भर उद्धव ठाकरे सोचते रहे कि वह कौन से कोट-पैंट पहनकर शपथ लेंगे और सुबह आंख खुली तो पता चला कि देवेंद्र फडणवीस सीएम कुर्सी पर बैठ चुके हैं. सुबह-सुबह ही प्रदेश से राष्ट्रपति शासन हट चुका है और राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने भाजपा-एनसीपी की संयुक्त सरकार पर मुहर लगा दी है. अजीत पवार भी डिप्टी सीएम बन गए. चाचा शरद पवार नाराज हो गए. यह सब घटनाक्रम हुआ शनिवार को. शाम तक मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. एनसीपी-कांग्रेस और शिवसेना की मांग है कि सुप्रीम कोर्ट इस तरह की असंवैधानिक सरकार को पलट दे और 24 घंटे में फ्लोर टेस्ट का आदेश दे. 

लेकिन ऐसा पहली बार तो नहीं हो रहा है
कोर्ट में मामला गया है तो उसे कोर्ट पर ही छोड़ते हैं. वहां से जो निर्णय आएगा वह सिर-माथे, लेकिन ध्यान देने वाली बात है कि ऐसा पहली बार तो नहीं हो रहा है. बीते कुछ सालों में राज्य सरकारों का जो गठन हुआ है, वह सीधे-सीधे जनादेश पर नहीं हुआ है.

उनमें कहीं न कहीं थोड़ी पार्टी की तिकड़म, विधायकों की अदल-बदल और राज्यपाल का निर्णय और आखिरी में सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर सरकार बनाने की दावेदारी पेश हुई है. डालते हैं ऐसे ही कुछ मामलों पर नजर, जहां सरकार बनाने के फैसले में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय शामिल रहा है.

दो साल पहले गोवा की सरकार बनी थी
2017 में जब गोवा विधानसभा के चुनाव हुए तो वहां जनादेश कांग्रेस के साथ था. 40 सीट की इस विधानसभा में कांग्रेस ने 18 सीटों पर फतह हासिल की. भाजपा सिर्फ 13 सीट ही निकाल पाई थीं. इसके अलावा अन्य सीटें राज्य के क्षेत्रीय दलों एमजीपी और जीएफपी के पास थीं. देर रात भाजपा ने दोनों ही दलों का समर्थन हासिल कर लिया और मनोहर पर्रिकर को सीएम बनाना तय हुआ है. इसके बाद भाजपा ने सरकार बनाने की दावेदारी पेश कर दी. राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने उन्हें सरकार बनाने का न्योता दिया. पर्रिकर सीएम पद की शपथ लेने जा रहे थे.

कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई और शपथ ग्रहण रोकने की मांग की. कोर्ट ने शपथ ग्रहण तो नहीं रोका, लेकिन 16 मार्च 2017 को विश्वासमत हासिल करने को कहा. पर्रिकर इसमें सफल रहे और गोवा में भाजपा सरकार बनीं. सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद भी कांग्रेस ठगी सी रह गई. 

सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे से निकली है कर्नाटक सरकार
2018 में ही कर्नाटक सरकार का गठन भी अदालत-कचहरी करने के बाद ही हो सका है. यहां पर भाजपा को 104 सीटें मिलीं, कांग्रेस को 78 और जेडीएस के हिस्से 37 सीटें आईं. राज्यपाल ने सबसे अधिक सीटों पर जीत हासिल करने वाली पार्टी यानी भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया. कांग्रेस और जेडीएस ने इसका विरोध किया है और सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए. यहां दोनों दलों ने सुप्रीम कोर्ट के सामने तुरंत फ्लोर टेस्ट कराए जाने की मांग रखी.

कोर्ट ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके बीएस येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने का आदेश दिया. इससे पहले येदियुरप्पा को विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया था. कांग्रेस ने इसका विरोध किया.

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कांग्रेस ने कहा था, तुरंत हो फ्लोर टेस्ट
15 दिन का समय दिए जाने पर कांग्रेस का कहना था कि ऐसा करके राज्यपाल ने विधायकों की खरीद-फरोख्त के लिए रास्ता साफ कर दिया है. बाद में कांग्रेस ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और अदालत ने कहा कि 19 मई 2018 को शाम चार बजे ही बहुमत साबित करना होगा.

बीजेपी की सरकार विधानसभा में फ्लोर टेस्ट का सामना नहीं कर सकी और मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने इस्तीफा दे दिया. इसके बाद कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार बनी. हालांकि कांग्रेस इस सरकार को 14 महीने भी नहीं संभाल पाई और और फिर से राज्य में भाजपा की सरकार बनीं.

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