हैदराबाद : चुनाव प्रचार समाप्ति के बाद बीजेपी की उम्मीदें मजबूत कम मुश्किल ज्यादा हैं

हालांकि हैदराबाद के निकाय चुनावों में स्मृति, योगी, नड्डा, शाह जैसे महारथियों के उतरने पर पर बीजेपी को उम्मीद तो नज़र आई है लेकिन ओवैसी के गढ़ में जीत दर्ज करना वास्तव में इतना भी आसान नहीं है..

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Nov 30, 2020, 11:09 AM IST
  • बीजेपी ने झोंकी पूरी ताकत
  • निकाय तो बहाना है, पार्टी को पैर जमाना है
  • पिछला चुनाव था निराशाजनक
  • मिली थीं केवल पांच सीटें
हैदराबाद :  चुनाव प्रचार समाप्ति के बाद बीजेपी की उम्मीदें मजबूत कम मुश्किल ज्यादा हैं

नई दिल्ली.   ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनावों हेतु अंतिम दिन का चुनाव प्रचार रविवार को समाप्त हो गया. अब प्रतीक्षा है 1 दिसंबर की जिस दिन यहां मतदान होना है. बीजेपी ने निकाय चुनावों को माध्यम बना कर ओवैसी के गढ़ में सेन्धमारी की जोरदार कोशिश की है. यहां के निकाय चुनावों में पार्टी ने अपने दिग्गजों की मौजूदगी दर्ज कराके ओवैसी बन्धुओं को कड़ा राजनैतिक संदेश दिया है. 

बीजेपी ने झोंकी पूरी ताकत

हैदराबाद निकाय चुनावों को लेकर बीजेपी ने अपनी दूर की दृष्टि स्पष्ट कर दी है. इन चुनावों में पूरी ताकत झोंकते हुए पार्टी ने ओवैसी और टीआरएस को सशंकित कर दिया है. यद्यपि बीजेपी नेताओं को इस बात को लेकर कोई गलतफहमी नहीं है कि यहां अपनी पैठ बनाना आसान नहीं है किन्तु मोदी और शाह के नेतृत्व में पार्टी को यहां भी उम्मीदों की किरण दिखाई दे रही है. 

निकाय तो बहाना है, पार्टी को पैर जमाना है

निकाय चुनाव में बीजेपी की आक्रामकता वास्तव में दर्शनीय है जिसने सिद्ध कर दिया है कि पार्टी न विरोधियों को हल्के में लेती है न ही किसी चुनाव को.  हैदराबाद निकाय चुनाव को बीजेपी ने इस गंभीरता से लिया है कि लगता है कि ये यहां के लोकसभा चुनाव हों. अपनी पूरी शक्ति के साथ चुनावों में उतर कर बीजेपी ने औवैसी और टीआरएस के लिये खतरे की घंटी बजा दी है. 

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पिछला चुनाव था निराशाजनक 

बीजेपी के लिये यहां 2016 के चुनाव में काफी निराशाजनक रहे थे. बीजेपी को गठबंधन में यहां सत्तारूढ़ दल टीआरएस के 99 और ओवैसी की एआईएमआईएम के 44 सीटों की तुलना में केवल पांच सीटें ही मिल पाईं थीं. लेकिन इस बार बीजेपी नेताओं ने अपनी जनसभाओं में सीधा दावा किया है कि शहर का  अगला मेयर भगवा दल का प्रतिनिधी होगा. हालांकि यह एक बहुत दुष्कर सफलता होगी किन्तु मोदी-शाह की बीजेपी के लिये इस तरह की चुनौतियों पर जीत हासिल करना कोई नई बात नहीं है.

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