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भाजपा-शिवसेना के झगड़े में निर्दलियों की मौज

मात्र 56 सीटें जीतकर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज होने का सपना देख रही शिवसेना को भाजपा ने किनारे करने का मन बना लिया है. जिसके लिए निर्दलीय विधायकों को भाजपा के पाले में खींचने का काम शुरु हो गया है. महाराष्ट्र में सियासी दांव पेंच को देखकर लगता है कि शिवसेना को अपनी जिद बहुत महंगी पड़ने वाली है. लेकिन दोनों के झगड़े से निर्दलीय विधायकों की मौज हो गई है. 

भाजपा-शिवसेना के झगड़े में निर्दलियों की मौज
कब सुलझेगा झगड़ा, कब बनेगी महाराष्ट्र में सरकार

मुंबई: महाराष्ट्र में भाजपा का कुनबा बड़ा होता जा रहा है. अब तक कुल 6 निर्दलीय विधायक भाजपा के समर्थन का पत्र सौंप चुके हैं. इसमें से दो विधायकों ने तो पिछले 24 घंटे में मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणनवीस से मुलाकात करके उन्हें अपना समर्थन पत्र सौंपा. 

बढ़ रहा है भाजपा का कुनबा
महाराष्ट्र विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी का कुनबा बढ़ता जा रहा है. अब भाजपा के साथ कुल 7 निर्दलीय विधायक हैं. जिन्होंने अपने समर्थन का पत्र भाजपा को सौंप दिया है. इनके नाम हैं-
1. जन सुराज पार्टी के विनय कोरे
2. युवा स्वाभिमानी पार्टी के रवि राणा
3. गीता जैन
4. राजेन्द्र राउत
5. महेश बालदी
6. विनोद अग्रवाल
7. किशोर जोरगेवार
महाराष्ट्र विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के कुल 105 विधायक हैं. इन सात निर्दलीय विधायकों के साथ भाजपा की गिनती 112 तक पहुंच जाती है. भारतीय जनता पार्टी कुल 15 निर्दलीय विधायकों के समर्थन का दावा कर रही है. अगर उसका दावा सच है तो महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा का संख्या बल 120 तक पहुंच जाता है.  

ये है महाराष्ट्र का गणित 

महाराष्ट्र में विधानसभा की 288 सीटें हैं. सरकार बनाने के लिए आधी से ज्यादा यानी 145 सीटों की जरुरत है. पिछले हफ्ते गुरुवार को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के आए नतीजों में बीजेपी 105 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. वहीं उसकी सहयोगी शिवसेना ने 56 सीटों पर अपना कब्जा जमाया है. एनसीपी के खाते में 54 सीटें आई हैं जबकि कांग्रेस 44 सीटें जीतकर चौथे स्थान पर रही है. लेकिन सत्ता की चाभी निर्दलीय विधायकों के हाथ में हैं. जिनकी संख्या 29 है. इसमें से 15 भाजपा के साथ हैं, जबकि 6 ने शिवसेना का समर्थन करने का फैसला किया है. बाकी 8 निर्दलीयों का रुख अभी तक स्पष्ट नहीं है. 

महाराष्ट्र विधानसभा में क्या है संभावना

महाराष्ट्र में सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा को सरकार बनाने का मौका मिल सकता है. क्योंकि कोई भी और दल बहुमत के आस पास भी नही है. इन परिस्थितियों में शपथ लेने के तुरंत बाद भाजपा को सदन में विश्वास मत साबित करना होगा. जिसके लिए उसे एनसीपी को वाकआउट करने के लिए राजी करना होगा. 
अगर एनसीपी मतदान के समय विधानसभा से वाकआउट कर जाती है. तो सदन का संख्या बल 238 ही रह जाएगा. ऐसी परिस्थिति में बहुमत साबित करने के लिए 118 विधायकों की जरुरत पड़ेगी. निर्दलीयों को साथ मिलाकर भाजपा के पास फिलहाल 120 विधायक दिखाई दे रहे हैं. जिनकी सहायता से वह आसानी से बहुमत साबित कर सकती है. 

लेकिन सरकार पर हमेशा मंडराएगा खतरा
एनसीपी अगर वाकआउट करने के लिए राजी हो जाए तो भाजपा अल्पमत की सरकार बना सकती है. लेकिन उसकी यह सरकार हमेशा निर्दलीय विधायकों के रहमो करम पर टिकी हुई रहेगी. जो कि कभी भी सरकार गिराने की स्थिति में रहेंगे. ऐसे में सरकार को उनकी उचित अनुचित हर मांग स्वीकार करनी पड़ेगी. 
इसलिए बेहतरी इसी में है कि भाजपा और शिवसेना अपने मतभेद दूर करते हुए आपस में मिलकर सरकार बनाएं. क्योंकि राज्य में चुनाव भी इन दोनों पार्टियों ने मिलकर ही लड़ा था. ऐसे में यह दोनों अपना झगड़ा फिर से भुला देते हैं तो महाराष्ट्र को एक स्थायी सरकार मिलेगी और महाराष्ट्र की जनता को एक बेहतर शासन मिलेगा. जिसके लिए उन्होंने मतदान किया है.