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झारखंड के चुनावी चक्कर में सभी दल हुए घनचक्कर

भाजपा के चुनावी विजय रथ को रोकने के लिए झारखंड विधानसभा में गठबंधन की जगह महागठबंधन की नींव रख दी है. इस महागठबंधन में सीट बंटवारे का समीकरण भी तय कर लिया गया. इस मामले में विपक्षी पार्टियां कम से कम NDA गठबंधन से आगे चल रही हैं. 

झारखंड के चुनावी चक्कर में सभी दल हुए घनचक्कर

रांची: झारखंड में पांच चरण में चुनाव कराई जाएगी. इसकी घोषणा पहले ही चुनाव आयोग ने कर दी है. चुनावी सरगर्मी में मौजूदा विपक्षी पार्टियां खासकर JMM और कांग्रेस ने सीट शेयरिंग फॉर्मुला तैयार कर लिया. झारखंड में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर झामुमो और कांग्रेस के अलावा बिहार की बड़ी पार्टी राजद भी महागठबंधन का हिस्सा बनी है. महागठबंधन ने झामुमो को 43 सीट, कांग्रेस को 31 सीट और राजद को 7 सीट के साथ चुनावी मैदान में उतरने का मसौदा तैयार कर लिया गया है.

हेमंत सोरेन होंगे महागठबंधन के नेतृत्वकर्ता

बैठक में सीट बंटवारे के अलावा यह भी तय हुआ कि महागठबंधन के नेता या यूं कहें कि प्रदेश में मुख्यमंत्री पद का मुख्य चेहरा सर्वसम्मति से झामुमो प्रमुख हेमंत सोरेन होंगे. इससे पहले यह कयास लगाया जा रहा था कि सीट बंटवारे को लेकर मामला फंस सकता है. इतना ही नहीं कयास यह भी लगाया जा रहा था कि झामुमो और कांग्रेस के अलावा इस गठबंधन में कोई अन्य पार्टी नहीं होगी. तमाम दावे झूठे साबित हुए, तमाम कयास धरे के धरे रह गए. झारखंड विधानसभा चुनाव में तमाम क्षेत्रीय दलों के बीच गठबंधन बनाने का पहला पड़ाव है जिसे झामुमो ने पार कर लिया है.

 
महागठबंधन के मसौदे पर नहीं राजी हुए मरांडी 

महागठबंधन के पहले अटकले तो यह भी लगाईं जा रहीं थीं कि JVM यानी झारखंड विकास मोर्चा भी महागठबंधन में एक बड़ा घटक दल हो सकता है. लेकिन कांग्रेस के बार-बार मान-मनौवल के बाद भी झाविमो प्रमुख बाबुलाल मरांडी शायद राजी नहीं हो पाए. दरअसल, झाविमो प्रमुख इस बार अलग ही मूड में हैं. उन्होंने पहले भी संकेत दे दिए थे कि वे चुनावी मैदान में अकेले नजर आ सकते हैं. हालांकि, इसके पीछे क्या राज इसपर से पर्दा नहीं हटाया लेकिन कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मरांडी खुद को मुख्यमंत्री पद का नेता घोषित करने की मांग पर अड़े थे जो झामुमो के हेमंत सोरेन के रहते पूरा हो नहीं सकता था. 

दुष्यंत चौटाला की तरह किंगमेकर बनना चाहते हैं मरांडी

इसके अलावा झाविमो के मुखिया बाबुलाल मरांडी को इस बात से ऐतराज था कि झामुमो और कांग्रेस में सीट बंटवारे के बाद कुछ ही सीटें मसलन 15-18 के आसपास ही झाविमो को दी जाएगी. जबकि झाविमो इस बार किसी और ही रंग में नजर आ रही है. झाविमो का कहना है कि पार्टी अकेले चुनाव लड़ना चाहती है. दरअसल, सूत्रों का कहना है कि बाबुलाल मरांडी झारखंड में हरियाणा के जजपा प्रमुख दुष्यंत चौटाला की तरह किंगमेकर बनने का सपना संजोए बैठे हैं. उनका मानना है कि किसी भी गठबंधन की बहुमत न आ पाने की स्थिति में झाविमो सरकार बनाने के लिए किंगमेकर की भूमिका निभाएगी. हालांकि बाबुलाल मरांडी ने यह कबूलने से इंकार किया है. 

प्रदेश में खुल सकता है तीसरा मोर्चा

अब कुछ दल ऐसे भी हैं जिन्हें फिलहाल साथी की जरूरत है. पिछले दिनों बिहार की एक और बड़ी पार्टी जदयू ने भी यह ऐलान कर दिया कि वह भी झारखंड के चुनावी रण में उतरेगी. किसके साथ, फिलहाल इसपर कोई सहमति या बातचीत की सूचना नहीं मिल सकी है. ऐसे में अगर झाविमो, जदयू और अन्य छोटे-छोटे दल साथ आ कर Third Front  या यूं कहें कि तीसरा मोर्चा खोल दें तो झारखंड में चुनावी करवट दिलचस्प मोड़ ले सकता है. मालूम हो कि जदयू ने पहले ही इशारा किया है कि वह झारखंड में गैर-भाजपा किसी भी दल के साथ गठबंधन करने को तैयार है. एक दिलचस्प बात यह भी है कि पिछले दिनों झारखंड में चुनावी सरगर्मी के बीच बिहार के मुख्यमंत्री ने झामुमो और कांग्रेस को प्रदेश की भ्रष्ट पार्टी कह दिया था लेकिन भाजपा और झाविमो के बारे में बहुत ज्यादा टिप्पणी करने से बचते रहे. 

NDA दोबारा जीत को लेकर है आश्वस्त

वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री रघुवर दास के कामों के बल पर आत्मविश्वास से ओत-प्रोत NDA सरकार ने हालांकि गठबंधन और सीट बंटवारे पर कोई मसौदा तैयार नहीं किया. लेकिन आजसू के साथ गठबंधन में आने वाली भाजपा झारखंड में दोबारा सरकार बनाने को लेकर जरा आश्वस्त दिख रही है. पार्टी का दावा है कि एनडीए को पिछली बार से भी ज्यादा सीटें मिलेगी और प्रदेश में भगवा झंडा फिर लहराएगा.