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हरियाणा में आखिर कहां चूकी कांग्रेस, जाटों ने बिगाड़ा खेल

हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव परिणामों में भाजपा भले ही सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है लेकिन कांग्रेस को भी इस परिणाम से बहुत फायदा हुआ है. 2014 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले कांग्रेस के वोट शेयर और सीट में भी बढ़ोत्तरी हुई है

हरियाणा में आखिर कहां चूकी कांग्रेस, जाटों ने बिगाड़ा खेल

चंडीगढ़: बुरे दौर से गुजर रही कांग्रेस के लिए यह एक अच्छी खबर हो सकती है. हरियाणा विधानसभा चुनाव परिणामों से राजनीतिक पंडितों की मानें तो कांग्रेस की खोई हुई जमीन हरियाणा में लौट सकती थी अगर कांग्रेस की कमान पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा को सौंप दी जाती. दरअसल, कांग्रेस ने शुरूआती चुनाव प्रचार में हुड्डा की जगह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर पर भरोसा जताया था जिसका कुछ खास फायदा होता नजर नहीं आया. 

कांग्रेस के प्रदर्शन से खुश हैं पार्टी अध्यक्षा

चुनाव परिणाम में किसी भी पार्टी को जनाधार नहीं मिल सका. इसके बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपनी-अपनी ओर से सरकार बनाने के दावे करते नजर आए. भूपिंदर हुड़्डा ने गैर-भाजपा पार्टियों को कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने का न्यौता तक दे डाला था. हालांकि, किंगमेकर जजपा के भाजपा को समर्थन के ऐलान के बाद निराश कांग्रेस प्रमुख भूपिंदर हुड्डा शनिवार को कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी से मिलने नई दिल्ली पहुंचे. मुलाकात के बाद हुड्डा ने मीडिया को जानकारी दी कि पार्टी प्रमुख खुश हैं हरियाणा में कांग्रेस के प्रदर्शन पर, और हो भी क्यों न, कांग्रेस ने इस परिणाम की उम्मीद नहीं की थी.

 

हुड्डा को अहमियत न देना पड़ा महंगा
राजनीतिक विश्लेषकों ने इशारों-इशारों में कांग्रेस की कुछ भूलों को पार्टी के जनाधार के करीब नहीं जा पाने का जिम्मेदार बताया. अशोक तंवर को चुनाव के दौरान लंबे समय तक पार्टी प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने का कांग्रेस को कुछ भी हासिल नहीं हो सका. कांग्रेस भूपिंदर सिंह हुड्डा के रहते जो जाट वोटों का समर्थन उठा सकती थी, उस रही-सही कसर को भी बहुत फलने-फूलने का मौका न मिला. राज्यसभा सांसद रही कुमारी शैलजा को पार्टी ने अंतिम क्षणों में कमान सौंपी तब तक दुष्यंत चौटाला कि जजपा ने काफी कुछ समेट लिया था. हरियाणा के युवा और नए वोटरों पर जजपा के रणनीतिकारों में से एक दिग्विजय चौटाला ने पहले ही सभी पार्टियों को मात दे दी थी. 

चुनावी सभाओँ में कांग्रेस ने की कंजूसी
इसके अलावा कांग्रेस के स्टार प्रचारकों की सुस्ती ने भी पार्टी का बेड़ा गर्क ही किया. हरियाणा में जहां एक ओर भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तमाम स्टारप्रचारकों की लंबी कतार ने दनादन चुनावी सभाएं की, वहीं कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी और सोनिया गांधी तक सभाएं करने में कंजूसी बरतते नजर आए. शायद यहीं कारण है कि कांग्रेस के जाने-माने चेहरे और प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला भी चुनाव हार गए. 

कांग्रेस के लिए एक कमी यह भी रही कि पार्टी ने दलित वोटरों को अपनी ओर खींचने पर ही सारा ध्यान लगा दिया जबकि यह बात किसी से छुपी नहीं कि हरियाणा में जाट वोटरों की बहुलता ही सरकार का फैसला करते आई है. हालांकि कांग्रेस को 28 फीसदी मत मिले हैं और पार्टी ने 31 सीटों पर जीत दर्ज की है.