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महाराष्ट्र में ऐसे भाजपा और शिवसेना के बीच बन सकती है बात ! जानिए 7 रास्ते

महाराष्ट्र की सियासत में कब क्या होने वाला है, ये किसी को नहीं मालूम. लेकिन अगर नितिन गडकरी और मोहन भागवत ने मोर्चा संभाल लिया तो, शिवसेना और भाजपा के बीच हर तरह के समझौते जरूर हो जाएंगे.

महाराष्ट्र में ऐसे भाजपा और शिवसेना के बीच बन सकती है बात ! जानिए 7 रास्ते

नई दिल्ली: चुनाव नतीजे आने के ग्यारह दिन बाद भी महाराष्ट्र में नई सरकार को लेकर सवाल बरकरार है. कौन सी पार्टी सरकार बनाएगी, मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा, कौन सी पार्टी किसे समर्थन करेगी, कौन विपक्ष में बैठेगा, ऐसे तमाम सवाल महाराष्ट्र की सियासत में तैर रहे हैं. बीजेपी और शिवसेना की तल्खी बरकरार है. 

1). भागवत और गडकरी कराएंगे बेड़ा पार

माना जाता रहा है कि महाराष्ट्र के सियासी समीकरण को सेट करने में नितिन गडकरी का किरदार सबसे अहम होता है. ऐसे में गडकरी अबतक महाराष्ट्र की सियासत को लेकर क्यों चुप हैं? ये वाकई बड़ा सवाल है. लेकिन इन सबके अलावा माना जा रहा है कि अब सर संघचालक मोहन भागवत और केंद्रीय मंत्री गडकरी ने बवाल में कूदने का मन बना लिया है. और सरकार बना कर ही चैन की सांस लेंगे. कहा जा रहा है कि अब भाजपा और शिवसेना के बीच की तल्खी जल्द ही खत्म हो जाएगी. ये रास्ता सबसे बेहतर साबित होगा.

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2). फिर लगा आदित्य ठाकरे का पोस्टर

इसी तल्खी के बीच बीती रात शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के घर के बाहर एक बार फिर आदित्य ठाकरे के समर्थन पोस्टर लगे. इन पोस्टर में आदित्य ठाकरे को सीएम बनाने की मांग करते हुए पोस्टर में लिखा है 'माझा आमदार माझा मुख्यमंत्री' मतलब हमारा विधायक, हमारा मुख्यमंत्री.

जाहिर है शिवसेना लगातार अपने बड़े भाई भारतीय जनता पार्टी पर दबाव बना रही है. इसी के तहत शिवसेना के नेताओं ने कल राज्यपाल भागत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की. शिवसेना का कहना है कि महाराष्ट्र में सरकार गठन के लिए शिवसेना जिम्मेदार नहीं है. कुछ दिन पहले भी ऐसे पोस्टर लगे थे. लेकिन उसके बाद पोस्टर हटवा लिए गए थे. भाजपा से रिश्ते बिगाड़कर सरकार बना पाना शिवसेना के लिए मुश्किल है. ऐसे में इस मसले पर बात करके दबाव डालनी चाहिए. बार-बार पोस्टर लगवाने से बात और भी बिगड़ सकती है.

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3). चुप नहीं हो रहे संजय राउत

इस दौरान संजय राउत ने सोमवार को कहा था कि 'जो सरकार नहीं बन रही है आज तक और जो एक कंफ्यूजन बन गया है पूरे राजनैतिक माहौल में उसके लिए हम जिम्मेदार नहीं हैं. हम चाहते हैं सरकार बने और किसी की भी सरकार बनने में शिवसेना रोड़ा नहीं डाल रही है. जिसके पास बहुमत है वो सरकार बनाएगा.' राउत के तेवर भाजपा और शिवसेना के रिश्तों में ग्रहण लगाने का काम कर रहे हैं. बशर्ते शिवसेना को अपने प्रवक्ता खासकर संजय राउत की जुबान पर ताला लगवाना चाहिए.

4). फडणवीस की हलचल हुई तेज

महाराष्ट्र में सरकार को लेकर सस्पेंस के बीच सीएम देवेंद्र फडणवीस भी सोमवार को दिल्ली में गृहमंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की थी. माना जा रहा है कि अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस की मुलाकात में महाराष्ट्र में सरकार बनाने के फार्मूले पर बातचीत हुई होगी. मुलाकात के बाद फडणवीस ने कहा कि जल्द ही सरकार का गठन होगा. गठबंधन धर्म का पालन करते हुए खुद फडणवीस को भी शिवसेना प्रमुख से बात करनी चाहिए. और अमित शाह के जरिए सामंजश बिठाने का रास्ता बेहतर साबित होगा.

5). एनसीपी और कांग्रेस के साथ आएगी शिवसेना?

दो दिन पहले शिवसेना ने अपने पास बहुमत होने का दावा किया था. जिसके बाद कयास लग रहे थे कि शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने की जुगत में है. शिवसेना लगातार एनसीपी मुखिया शरद पवार की तारीफ भी कर रही है. राउत ने उस वक्त कांग्रेस नेता की भी वाहवाही की थी. इस बीच इस पूरे सियासी घटनाक्रम के बीच शरद पवार ने सोमवार को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की. मुलाकात के बाद शरद पवार ने ये कहा कि जनादेश विपक्ष में बैठने का मिला है लेकिन आगे क्या होगा ये वो नहीं बता सकते. शिवसेना अगर ये भूल करती है तो उसकी भविष्य की राजनीति खतरे में पड़ सकती है. भाजपा और शिवसेना की विचारधारा लगभग एक जैसी है. ऐसे में कांग्रेस और एनसीपी के साथ जाना उसके लिए मुश्किल बढ़ा सकती है. शिवसेना को ऐसी गलती कतई नहीं करनी चाहिए.

6). झुकने को तैयार नहीं है छोटा भाई

खबर ये भी है कि महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर शिवसेना और बीजेपी में बैक डोर बातचीत जारी है. भाजपा सूत्रों के मुताबिक शिवसेना के लिए सभी दरवाजे खुले हुए हैं. सूत्रों के मुताबिक शिवसेना ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद के साथ सरकार में 21 मंत्री पद और गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, लोक निर्माण मंत्रालय और राजस्व मंत्रालय जैसे अहम मंत्रालय चाहती है. वहीं बीजेपी शिवसेना को केवल 17 मंत्रालय देना चाहती है. साथ ही सीएम पद को लेकर भी वो शिवसेना की मांग पर झुकने को तैयार नहीं है. उसने साफ कह दिया है कि सरकार 1995 के फॉर्मूले पर ही बनेगी यानि जिसके ज्यादा विधायक, उसका सीएम. 

बार-बार ये बात बोलकर शिवसेना अपनी सहयोगी दल भाजपा के साथ झगड़े की बात की आशंका जाहिर कर रही है. अगर इसका जल्द समाधान नहीं निकला तो जनता खुद को ठगा महसूस करेगी. ऐसे में झुके बिना बाच बनाने की जरूरत है. ना कि झगड़े पर उतारू होने की.

7). सामना की आड़ में जारी है हमला

शिवसेना के साथ गतिरोध और उसके नेताओं की तल्ख बयानबाजी पर बीजेपी नेताओं ने भले ही चुप्पी साध रखी हो लेकिन भारतीय जनता पार्टी का समर्थक कहे जाने वाले अखबार 'तरुण भारत' ने शिवसेना पर हमला बोला है. महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर गतिरोध के लिए अखबार ने शिवसेना पर हमला बोला है.

अखबार ने अपने संपादकीय में लिखा है, 'हमने विक्रम और बेताल की कहानियां सुनी हैं. अब महाराष्ट्र में उद्धव और 'बेताल' की कहानी देख-सुन रहे हैं. राज्य में दो-तिहाई किसान प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ित हैं और उनका दुख और दर्द अहंकार के घेरे में फंसा हुआ है. महाराष्ट्र कभी भी शिवसेना को माफ नहीं करेगा.' सामना के जरिए लगातार शिवसेना भाजपा को निशाने पर लेती आई है. कभी कार्टून तो कभी अपने संपादकीय पर तंज के जरिए वह अपने बड़े भाई पर जबरदस्त हमला करती है. ये दबाव बनाने का बेहतर रास्ता है. लेकिन ये कभी कभी रिश्तों में दरार की यह बड़ी वजह बन सकती है.

बहरहाल बीजेपी-शिवसेना में मची खींचतान के बीच विधानसभा का कार्यकाल 8 नवंबर को खत्म हो रहा है. मतलब 9 नवंबर तक सरकार बन जानी चाहिए लेकिन जिस तरह की स्थिति सूबे में बनी हुई है. ऐसे में ये देखना बड़ा दिलचस्प होगा कि आखिर सरकार बनने का रास्ता कैसे साफ होता है.