तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहीं ममता बनर्जी के बारे में रोचक बातें...

ममता बनर्जी लगातार तीसरी बार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रही हैं. जानिए उनसे संबंधित कुछ रोचक तथ्य.

Written by - Navin Chauhan | Last Updated : May 5, 2021, 08:05 AM IST
  • ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाली हैं
  • उपलब्धि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी भी हासिल कर लेंगी
तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहीं ममता बनर्जी के बारे में रोचक बातें...

कोलकाता: ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) लगातार तीसरी बार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रही हैं. दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित (Sheela Dixit) के बाद वो इस मुकाम पर पहुंचने वाली देश की दूसरी महिला मुख्यमंत्री बनेंगी. शीला दीक्षित ने साल 1998 से 2013 तक लगातार तीन बार दिल्ली की कमान संभाली थी. अब वही उपलब्धि पश्चिम बंगाल में ममता दीदी भी हासिल कर लेंगी.

देश में सबसे ज्यादा समय तक सत्ता पर काबिज रहने वाली महिला मुख्यमंत्रियों की बात की जाए तो ममता बनर्जी और शीला दीक्षित के अलावा दो बड़े नाम जयललिता और मायावती का है. दोनों ही चार-चार बार मुख्यमंत्री बन चुकी हैं लेकिन साल 2011 में ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में सीपीआई (एम) के लगातार 34 साल लंबे शासन को खत्म करके सत्ता पर काबिज हुई थीं. राज्य की आठवीं और पहली महिला मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद उन्होंने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा. मौजूदा चुनाव में भाजपा के कड़ी चुनौती मिलने के बाद भी ममता बनर्जी अपनी सीएम की कुर्सी बचा पाने में सफल रहीं.

नंदीग्राम में मिली हार

हालांकि, जिस नंदीग्राम ने उन्हें पहली बार राज्य की सत्ता दिलाई थी वहां के लोगों ने इस बार दीदी की ममता को स्वीकार नहीं किया और उनके पूर्व सहयोगी रहे शुवेंदु अधिकार के खिलाफ उन्हें मुंह की खानी पड़ी. शुवेंदु ने उन्हें 1,956 मत के अंतर से पराजित किया. शुवेंदु अधिकारी को जहां 1,10,764 मत मिले वहीं ममता बनर्जी केवल 1,08,808 वोट हासिल कर सकीं.

ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की ऐसी पहली मुख्यमंत्री बनने जा रही हैं जिसे विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा है. इससे पहले पश्चिम बंगाल में जो मुख्यमंत्री अपनी सीट नहीं बचा पाए. उनकी पार्टी को भी राज्य की सत्ता से बेदखल होना पड़ा था.

रेलमंत्री के पद से इस्तीफा देकर बनी थीं मुख्यमंत्री

साल 2011 जब ममता बनर्जी पहली बार पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी तब भी वह विधायक नहीं थीं. केंद्रीय रेल मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद वो मुख्यमंत्री बनी थीं. इसके बाद वो भवानीपुर सीट से विधायक निर्वाचित हुईं. हालिया चुनाव में उन्होंने भाजपा को खुली चुनौती देने के लिए भवानीपुर की बजाए नंदीग्राम से चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया था लेकिन बाजी उनके हाथ नहीं लगी. 

1984 में सोमनाथ चटर्जी को दी थी मात

ममता बनर्जी ने जब पहली बार लोक सभा चुनाव में जीत दर्ज की थी वो पश्चिम बंगाल की राजनीति में अहम मुकाम रखती है. 1984 में ममता दीदी ने दिग्गज नेता सोमनाथ चटर्जी को जाधवपुर सीट पर मात देकर सबको चौंका दिया था और संसद में पहुंचने वाली सबसे युवा सांसद बनीं थीं.

32 साल बाद हारीं चुनाव

नंदीग्राम की हार ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर की दूसरी सबसे बड़ी हार है. साल 1989 में उन्हें लोकसभा चुनाव में मालिनी भट्टाचार्य के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद उन्होंने अपनी सीट बदल ली और 1991 से मुख्यमंत्री बनने तक दक्षिण कोलकाता सीट से सांसद चुनी गईं. दीदी को 32 साल बाद हार का मुंह देखना पड़ा है.

1997 में ममता बनर्जी ने मुकुल रॉय के साथ मिलकर तृणमूल कांग्रेस की नींव रखी थी. 11 दिसंबर 1998 को ममता दीदी ने समाजवादी पार्टी सांसद दरोगा प्रसाद सरोज का कॉलर पकड़कर वेल से बाहर निकाला था, वो वेल में महिला आरक्षण बिल के विरोध में हंगामा कर रहे थे.

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