महाराष्ट्र में पॉलिटिकल सर्जिकल स्ट्राइक! आधी रात का 'प्लान', सुबह हो गया 'काम'

अमित शाह की रणनीति और नरेंद्र मोदी की नीति ने महाराष्ट्र के सियासत में बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक किया है. इस स्ट्राइक में भाजपा के योद्धा देवेंद्र फडणवीस और एनसीपी नेता अजित पवार चुने गए. आधी रात में बने प्लान ने विरोधियों के सपनों को धराशायी कर दिया.

महाराष्ट्र में पॉलिटिकल सर्जिकल स्ट्राइक! आधी रात का 'प्लान', सुबह हो गया 'काम'

नई दिल्ली: महाराष्ट्र में शुक्रवार की रात सड़कों पर सब कुछ सामान्य था. कभी ना थकने वाली मुंबई अपनी रफ्तार में दौड़ रही थी. आम लोगों को इस बात का कोई अंदाज़ा नहीं था कि महाराष्ट्र में अगली सुबह एक बड़ा बदलाव आने वाला है. कोई नहीं जानता था कि राष्ट्रपति शासन सिर्फ इसी रात भर के लिए है. और अगली सुबह महाराष्ट्र में नई सरकार कमान संभालनेवाली है.

भाजपा की सर्जिकल स्ट्राइक

भारतीय जनता पार्टी ने महाराष्ट्र की राजनीति में जो सर्जिकल स्ट्राइक किया, उसके बाद सभी विरोधी चारों खाने चित हो गए. इस सर्जिकल स्ट्राइक में भाजपा ने शिवसेना से धोखे का बदला लिया और उसे ऐसा सबक सिखाया, जिसे वो ताउम्र भुला नहीं पाएगी. मुंबई में तो शुक्रवार की रात लोगों में इस बात की चर्चा थी कि उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बनने को राजी होंगे या नहीं. शाम को ही एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने शिवसेना और कांग्रेस नेताओं के साथ मीटिंग के बाद कहा था कि उद्धव ठाकरे के नाम पर तीनों दल सहमत हैं.

शाम 7:30 बजे

एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार शरद पवार मीडिया के सामने आकर ये इशारा करते हैं कि तीनों पार्टियों में मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए उद्धव ठाकरे के नाम पर सहमति बन गई है. शरद पवार के इस बयान के बाद उद्धव ठाकरे और कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने सस्पेंस बढ़ा दिया था. उन्होंने कहा था कि अभी बात बाकी है. लेकिन किसी को इस बात का एहसास नहीं था कि इस रात के बाद उनके लिए कुछ बाकी नहीं रहनेवाला.

इधर कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना की मीटिंग खत्म हुई. और उधर भाजपा के खेमे में बड़े प्लान पर काम आगे बढ़ चुका था. मुंबई से लेकर दिल्ली के बीच तैयार हुआ. ये आधी रात का वो प्लान था, जिसके तहत सुबह तक सारा काम हो जानेवाला था.

रात 8:30 बजे

सूत्रों के मुताबिक मुंबई में आधी रात के इस प्लान के बारे में एनसीपी नेता अजित पवार और बीजेपी के बीच अंदरखाने बात बन चुकी थी. दोनों के बीच सरकार बनाने पर जल्द कदम बढ़ाने की बात तय हुई. कुछ घंटे पहले तक एनसीपी-कांग्रेस और शिवसेना की बैठक में अजित पवार एनसीपी विधायक दल के नेता के नाते मौजूद थे. इसलिए उन्हें तीनों दलों के बीच चल रही, सरकार बनाने की हर बात पता थी. माना जा रहा है कि अजित पवार ने इसको लेकर बीजेपी को ब्रीफ किया और फिर वे सुपर एक्टिव हो गए.

रात 12:30 बजे

रात साढ़े 8 से रात साढ़े बारह बजे तक, यानी पूरे 4 घंटे बीजेपी नेता और अजित पवार अगली रणनीति तय करने में जुटे रहे. इसके बाद फॉर्मूला तय हो गया. फिर भाजपा नेताओं के साथ अजित पवार ने राजभवन का रुख किया. जो अजित पवार 5 घंटे पहले तक अपने चाचा शरद पवार के साथ बैठकर भाजपा और शिवसेना नेताओं के साथ मीटिंग कर रहे थे. वही अजित रात साढ़े 12 बजे राज्यपाल से मिलने राजभवन पहुंच चुके थे. अजित पवार ने भाजपा को समर्थन देने की चिट्ठी राज्यपाल को सौंपी. और भारतीय जनता पार्टी ने अजित पवार की समर्थन वाली चिट्ठी के साथ सरकार बनाने का दावा पेश किया.

रात 1 बजे

राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने रात करीब 1 बजे ई-मेल कर केंद्र से राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफारिश की. इसके बाद दिल्ली में हलचल तेज हो गई. नियम के मुताबिक जब भी गवर्नर राष्ट्रपति शासन को हटाने की अनुशंसा करते हैं, तो इसके लिए कैबिनेट के बहुमत की मंजूरी जरूरी होती है. इसके बाद प्रस्ताव राष्ट्रपति को भेजा जाता है. फिर राष्ट्रपति  राज्य में राष्ट्रपति शासन हटाने के फैसले को वापस लेते हैं. माना जा रहा है कि रात 1 बजे के बाद कैबिनेट ने राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफारिश को मंजूरी दी.

राष्ट्रपति शासन हटाए जाने की उल्टी गिनती शुरू होने के बाद भाजपा नेताओं और अजित पवार ने अगले कदम को बेहद सीक्रेट रखा. उनकी पूरी कोशिश इस बात की थी कि नई सरकार के बारे में कांग्रेस और शिवसेना को कोई भनक ना लगने पाए. हालांकि अब तक ये रहस्य है कि आधी रात के इस प्लान के बारे में एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार को कुछ पता था या नहीं. या फिर सब कुछ पता था. और वो कुछ भी पता नहीं होने का दांव एक रणनीति की तरह चल रहे हैं.

सूत्रों की मानें तो शुरू में बीजेपी के ऑपरेशन लोटस की जानकारी सिर्फ 4 लोगों को थी.

  • प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी
  • गृहमंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह
  • देवेंद्र फडणवीस
  • अजित पवार

सूत्रों की मानें तो बीजेपी नेता चंद्रकांत पाटिल, भूपेंद्र यादव और गिरीश महाजन को पार्टी की तरफ से रात में अचानक बताया गया कि उन्हें सुबह में देवेंद्र फडणवीस से मिलना है. उन्हें कहा गया था कि तीनों नेताओं को सुबह 6 बजे मुख्यमंत्री निवास वर्षा में मिलना था. जहां फडणवीस फिलहाल रह रहे हैं. चंद्रकांत पाटिल, भूपेंद्र यादव और गिरीश महाजन को तब तक ये पता नहीं था कि सुबह की इस बैठक के फौरन बाद ही देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं.

सुबह 5:47 बजे

उधर दिल्ली में भी हलचल तेज थी. मुंबई में सुबह 6 बजकर 50 मिनट पर सूर्योदय होना था. सूरज की किरणें मुंबई में जब तक पहुंचती. उससे पहले ही दिल्ली से राष्ट्रपति शासन हटाने का आदेश पहुंच गया. शनिवार सुबह 5 बजकर 47 मिनट पर राष्ट्रपति शासन हटाने की अधिसूचना जारी हुई. इसके साथ ही राज्य से राष्ट्रपति शासन हटाने का रास्ता साफ हो गया. सूर्योदय होते-होते, फडणवीस के बंगले पर पार्टी नेताओं की पहले से तय बैठक खत्म हो चुकी थी. उन तक शपथ ग्रहण का बुलावा पहुंच चुका था. इस पूरे प्रकरण को इतना सीक्रेट रखा गया कि नए सीएम के रूप में देवेंद्र फडणवीस के दोबारा शपथ ग्रहण का विरोधी दलों की तो छोड़िए. राज्य बीजेपी के बड़े नेताओं तक को कुछ पता नहीं था.

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शपथ ग्रहण का न्योता मिलने के बाद देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार को राजभवन पहुंचते देर नहीं लगी. यहां राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने देवेंद्र फडणवीस को सीएम पद की शपथ दिलाई. इसके बाद अजित पवार को उप मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई.

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