Bihar Election में दलबदलुओं की मौज

बिहार में चुनाव (Bihar election) है. जिसमें दलबदलुओं की बहार है. कम से आधा दर्जन बड़े नेता चुनाव से ऐन पहले पार्टी बदल चुके हैं.  इनमें छोटी- बड़ी हर पार्टी के नेता शामिल हैं.   

Bihar Election में दलबदलुओं की मौज

पटना: बिहार में चुनाव से पहले  कोई नीतीश की कैबिनेट से सीधे लालू की लालटेन उठाकर चुनावी मैदान में ताल ठोंक रहा है. कोई लालटेन छोड़कर जेडीयू में आ गया है.  कुछ नेताओं ने चुनाव से पहले विचारधारा की गठरी उतार फेंकी है और जीत के लिए जातिबंधन कर नया मोर्चा बना रहे हैं. 

पाला बदलने का खेल जारी
कहा जाता है कि वो नेता ही क्या जो चुनावी मौसम में पाला बदलने का हुनर ना जाने. वो नेता ही क्या जो विचारों की पोटली लादे खाक छानता फिरे. वो नेता ही क्या जो मौका परस्ती में माहिर ना हो. वो नेता ही क्या जो विचारों को चुनावी फायदे के लिए सूली पर टांग ना सके. 
क्योंकि सियासत में चुनाव का मौसम और बहारों में बसंत का मौसम एक जैसे हैं.  बसंत में जैसे पुराने पत्ते पेड़ को छोड़ जाते हैं. वैसे ही चुनावों के मौसम में नेता अकसर पार्टी को छोड़ जाते हैं. 

रामविलास को कहा जाता है मौसम वैज्ञानिक
 बिहार में तो एक नेता ऐसे हैं जिन्हें विरोधी भी मौसम वैज्ञानिक कहते हैं.  ये आंधी और तूफान की जानकारी देने वाले मौसम वैज्ञानिक नहीं हैं. बल्कि ये वो नेता हैं जो चुनाव से पहले सियासी मौसम का मिजाज भांप लेते हैं और उसी पाले में जा बैठते जहां चुनाव के बाद सत्ता आनी ही आनी है. 
लालू यादव ने रामविलास पासवान को यूं ही सियासत के मौसम वैज्ञानिक का खिताब नहीं दिया. चुनावी मौसम का मिजाज ही कुछ ऐसा होता है कि ये अनुमान लगाना मुश्किल होता है कि नेता जी समाजवादी विचारधारा के राही हैं या फिर किसी और पंथ के. 

उधर चुनाव का शंखनाद हुआ इधर नेताओं का मन डोलने लगता है. वफादारी और विचारधारा की पोटली खूंटी में टांगकर जिताऊ पार्टी के दफ्तर की रेस शुरू हो जाती है. 
बिहार में चुनाव का ऐलान क्या हुआ पार्टियों में पाला बदलने का ऐसा खेल शुरू हुआ है कि जो आज आरजेडी के मंच में हैं कल जेडीयू के मंच पर दिखाई देते हैं. जो आज महागठबंधन में हैं कल किसी नए मोर्चे में दिखाई देते हैं. बिहार में 243 सीटों पर हो रहे सियासी घमासान में दल बदलने का खेल पुरजोर जारी है. 
 लालू ने नीतीश को बताया है ‘पलटूराम’?
लालू यादव और नीतीश कुमार के बीच की जुगलबंदी ने बिहार की सियासत को सिरे से  बदल दिया. दोनों ने बारी बारी से  15-15 साल सत्ता की मलाई खाई. इस दौरान लालू और नीतीश के रिश्तों में उतार चढ़ाव आता रहा.  नीतीश ने कई बार लालू का साथ छोड़ा और कई बार लालू का हाथ पकड़ा. 
बात साल 2015 की है जब बिहार में सत्तावापसी के बाद नीतीश और लालू यादव की पार्टी सरकार में थी. लेकिन धीरे- धीरे रिश्तों में कडुवाहट घुलने लगी. नीतीश ने तेजस्वी को डिप्टी सीएम के पद से हटने को कह दिया लेकिन लालू प्रसाद यादव अड़ गए कि तेजस्वी इस्तीफा नहीं देंगे. अगर नीतीश कुमार को अलग होना है तो हो जाएं.
लालू अड़े रहे और तेजस्वी डिप्टी सीएम के पद पर डटे रहे. नतीजा फिर वही हुआ नीतीश ने लालू का साथ एक बार फिर छोड़ दिया और बीजेपी के साथ हो लिए. 
जिसके बाद नाराज लालू ने नीतीश कुमार को ‘पलटूराम’ तक कह डाला. तब लालू ने एक कॉर्टून को ट्वीट करते हुए लिखा था कि नीतीश को खुद नहीं मालूम कहां-कहां, कब-कब, क्यों, कैसे और किसलिए उन्होंने पलटियां मारी हैं? 
 2015 के चुनाव में लालू और नीतीश की पार्टियों ने मिलकर चुनाव लड़ा था और दोनों ने बड़ी जीत हासिल की थी. हालांकि लालू यादव सबसे ज्यादा सीट पाकर बिहार के चैंपियन बनकर उभरे थे.  लेकिन राजनीति के दो चैंपियन ज्यादा दिन तक साथ नहीं रह पाए. 
इस चुनाव में भी दोनों के बीच जबरदस्त सत्ता संग्राम छिड़ा है. हालांकि लालू प्रचार से दूर रांची में रहने को मजबूर हैं क्योंकि वो अदालत से चारा घोटाले में दोषी ठहराये गए हैं. लिहाजा लालू की जगह अब उनके बेटे चचा नीतीश पर जुबानी तीर चला रहे हैं. 

इस चुनाव के बड़े दलबदलू
इस बार के दलबदलू नेताओं ने सबसे पहला नंबर श्याम रजक का आता है. जो कुछ दिन पहले तक नीतीश कुमार से गलबहियां कर रहे थे. उनकी सरकार में मंत्री थे. लेकिन चुनाव से कुछ दिन पहले नीतीश को जली कटी सुनाने लगे और सरकार से बाहर हो गए.

नीतीश ने श्याम रजक को पार्टी से निकाला तो 11 साल बाद फिर लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी में आ गए.

बिहार की राजनीति के राम-श्याम !
बिहार की राजनीति में रामकृपाल यादव और श्याम रजक की जोड़ी को राम-श्याम की जोड़ी के तौर पर जाना जाता है. दोनों लालू प्रसाद से बेहद खास शिष्य रहे हैं लेकिन अब दोनों के रास्ते जुदा हैं. रामकृपाल यादव जहां बीजेपी में जा चुके हैं. वहीं श्याम रजक 2009 तक आरजेडी में ही थे लेकिन फिर जेडीयू में चले गए थे.

लवली आनंद ने बदला पाला
1990 के दशक में बाहुबली नेता आनंद मोहन का बिहार की राजनीति में जलवा भी था और जलजला भी. उनकी पत्नी लवली आनंद अब अपने बेटे चेतन आनंद के साथ आरजेडी में शामिल हो गई हैं. लालटेन खेमे में आने के बाद लवली आनंद ने नीतीश कुमार पर निशाना साधा और कहा कि बिहार को बदहाली से निकालने और विकास की पटरी पर लाने के लिए वो आरजेडी में आई हैं.

RLSP के प्रदेश अध्यक्ष ने मारी पलटी
उधर राष्ट्रीय लोक समता पार्टी बिहार के विकास का खाका खींचने के लिए नया मोर्चा बना रही है. इधर उनके प्रदेश अध्यक्ष ही पार्टी को गुडबॉय बोलकर चलते बने. इतना ही नहीं पार्टी के दूसरे बड़े नेता माधव आनंद भी पार्टी छोड़ गए. दोनों ने लालू की लालटेन थाम ली है.

जाहिर है न दल बड़ा ना राजनीति का धर्म. यही है पलटू राजनेताओं का मर्म. नेताओं के लिए ये मौसम चुनावी है और सियासी जंग में जिसे जहां जीत की उम्मीद दिख रही है वो उसी के साथ जा रहा है. 

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