महाराष्ट्र में सरकार बनाने के पचड़े का क्या है बिहार कनेक्शन ?

महाराष्ट्र में बिहारियों की बेइज्जती करने वाले शिवसेना मुखिया उद्धव ठाकरे कल को अगर मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं तो उसके पीछे बिहारी खोपड़ी का ही कमाल माना जा रहा है. राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले पीके ने उद्धव ठाकरे से मुलाकात की और पार्टी के तेवर ही बदल गए.

महाराष्ट्र में सरकार बनाने के पचड़े का क्या है बिहार कनेक्शन ?

नई दिल्ली: महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाएगी, इस बात पर अब लगभग मुहर लग गई है. जिस 50-50 फॉर्मूले पर भाजपा-शिवसेना की रार हो गई थी, उसी मसौदे पर शिवसेना-एनसीपी ने मामला सेट कर लिया है. लेकिन दिलचस्प बात जो सामने निकलकर आ रही है वह यह कि महाराष्ट्र में सरकार बनाने के इस तमाम पचड़े के मास्टरमाइंड बिहार के जदयू उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर हैं. वहीं प्रशांत किशोर जो सरकार बनाने और सरकार गिराने के नुस्खे बताने में माहिर खिलाड़ी हैं. वहीं प्रशांत किशोर जो राजनीतिक स्ट्रैटेजिस्ट से राजनेता बन बैठे हैं. 

पीके ने महाराष्ट्र में बदली सरकार !

कहा जा रहा है कि प्रशांत किशोर चुनाव परिणाम के बाद के दिनों में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और वर्ली विधायक आदित्य ठाकरे से मिले थे. अब उनकी इस मुलाकात के बाद कसीदे पढ़े जाने लगे कि पीके ने ही महाराष्ट्र में गैर-भाजपा सरकार बनाने का बीज शिवसेना प्रमुख के मन-मस्तिष्क में भर डाला. ऐसा इसलिए भी माना जाता है क्योंकि प्रशांत किशोर राजनीति में कई दफा ऐसे बवाल मचा चुके हैं. खबरें तो यह भी है कि प्रशांत किशोर पश्चिम बंगाल में भी ममता बनर्जी की सरकार दोबारा बनवाने का जिम्मा ले चुके हैं. उधर, बिहार में भी 2020 में विधानसभा चुनाव है. जदयू उपाध्यक्ष चुनाव की तैयारियों में लगे हुए हैं.  

"प्रशांत किशोर शिवसेना को ले डूबे"

इस बीच महाराष्ट्र में सरकार बनाने की उठा-पटक के बीच बिहार में बयानबाजियों से सियासी पारा चढ़ने लगा. एक-एक कर सारे नेता और प्रदेश के रसूखदार चेहरे प्रशांत किशोर पर टीका-टिप्पणी में लग गए. भाजपा की महिला नेत्री से लेकर जदयू से बागी हुए नेता अजय आलोक ने प्रशांत किशोर को आड़े-हाथों लिया. महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन के ऐलान के बाद भाजपा की महिला मोर्चा नेत्री व सोशल मीडिया की राष्ट्रीय प्रभारी प्रीति गांधी ने ट्वीट कर कहा कि "प्रशांत किशोर शिवसेना को ले डूबे." उनके बताए फॉर्मूले पर ही शिवसेना ने दांव खेला.

अजय आलोक ने कहा "जय मातर साहब"

उधर, जदयू के पूर्व प्रवक्ता अजय आलोक ने भी अपने बागी तेवर दिखाते हुए ट्वीट किया. उन्होंने कहा कि "एक हैं मास्टर स्ट्रैटेजिस्ट, पिछले कुछ दिनों से शिवसेना उनसे ज्ञान ले रही थी. नतीजा सब देख रहे हैं. अब महामहिम ने और समय नहीं दिया लगता है. इस पहलू पर तो मास्टर साहब ने ध्यान ही नहीं दिया. नतीजा देख ही रहे हैं न तीन में ना तेरह में. कहते हैं न कि गफलत में सब गए. माया मिली न राम. जय मातर साहब." 

हालांकि, अजय आलोक ने यह ट्वीट तब किया था जब महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन के लक्षण दिखने लगे थे, लेकिन अब मामला बदल गया है. महाराष्ट्र में मास्टर स्ट्रैटेजिस्ट की बुद्धि ने अपना कमाल दिखा दिया है और अब प्रदेश में राष्ट्रपति शासन नहीं बल्कि गठबंधन की सरकार बनेगी. फिर चाहे वह किसी बिहारी की कृपा से ही क्यों न हुआ हो.