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हिंदुत्व के नायक को याद कर, PM मोदी ने महाराष्ट्र में खेला 'मास्टरस्ट्रोक'

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सियासी उठापटक का दौर बादस्तूर जारी है. इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सूबे की सियासत में सावरकर को याद करके बड़ा दांव खेला है. भाजपा ने अपने घोषणापत्र में वीर सावरकर को भारत रत्न देने का वादा किया है.

हिंदुत्व के नायक को याद कर, PM मोदी ने महाराष्ट्र में खेला 'मास्टरस्ट्रोक'

नई दिल्ली: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी राजनीतिक पार्टियां अपने एड़ी-चोटी तक का जोर लगाने में जुटी हुई है. इस बीच महाराष्ट्र की सियासी महाभारत को मथने के लिए अब सबसे बड़े महारथी मैदान में उतर आए है. प्रदेश की सियासत के सेंटर स्टेज पर एक बार फिर वीर सावरकर आ गए है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को बैक-टू-बैक तीन रैलियां की. हर रैली में पीएम मोदी कांग्रेस और एनसीपी पर जमकर बरसे. 

भाजपा और मोदी का सबसे बड़ा दांव

इस बीच पीएम मोदी ने अकोला की रैली में महाराष्ट्र की सियासी बिसात पर अपना सबसे बड़ा दांव चला. पीएम मोदी ने अपने भाषण में संविधान निर्माता बाबा साहब अंबेडकर के साथ-साथ वीर सावरकर और ज्योतिबा फुले का जिक्र कर एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की.

प्रधानमंत्री ने कहा कि 'ये वीर सावरकर के ही संस्कार हैं कि राष्ट्रवाद को हमने राष्ट्र निर्माण के मूल में रखा है. वहीं दूसरी तरफ वो लोग हैं जिन्होंने बाबा साहेब का कदम-कदम पर अपमान किया, उन्हें दशकों तक भारत रत्न से दूर रखा. ये वो लोग हैं जो वीर सावरकर का अपमान करते हैं. जम्मू कश्मीर और लद्दाख में बाबा साहब अंबेडकर के संविधान को पूरी तरह लागू न करने के प्रयासों के पीछे भी ऐसे ही लोगों की दुर्भावना है.'

'भारत रत्न दिलाने का वादा'

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए जारी घोषणापत्र में भाजपा ने स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर को भारत रत्न दिलाने का वादा पहले ही किया है. बीजेपी और महाराष्ट्र में उसकी सहयोगी शिवसेना लंबे समय से सावरकर को भारत रत्न देने की वकालत करते रहे हैं. लेकिन इस बार बीजेपी ने सावरकर को भारत रत्न दिलाने का वादा अपने चुनावी घोषणा पत्र में लिखकर किया है. बीजेपी ने घोषणापत्र में सावरकर के अलावा सावित्री बाई फुले को भी भारत रत्न दिलाने का वादा किया गया है. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ये बयान भाजपा के वायदे को सच्चा साबित करने का काम कर रहा है.

पीएम मोदी ने वीर सावरकर और ज्योतिबा फुले के जरिए महाराष्ट्र के सियासी समीकरणों को साधने की कोशिश की है. वीर सावरकर को भारत रत्न दिलाने का वादा कर बीजेपी ने एक ओर जहां मराठी अस्मिता का दांव खेला है. तो ज्योतिबा फुले का नाम भारत रत्न के लिए आगे कर बीजेपी ने दलित वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है.

क्या है महाराष्ट्र में सीटों का गणित

  • महाराष्ट्र की कुल 288 विधानसभा सीट
  • 29 सीटें अनसूचित जाति के लिए आरक्षित
  • राज्य में दलित मतदाताओं की संख्या करीब 13 फीसदी

कौन थे सवारकर

वीर सावरकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारी नेता थे. आजादी के आंदोलन में सावरकर का नाम ही भारतीय क्रांतिकारियों के लिए उनका संदेश था. उनकी पुस्तकें क्रांतिकारियों के लिए गीता के समान थीं. हालांकि आजादी के माध्यमों के बारे में गांधीजी और सावरकर का नजरिया अलग-अलग था. अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ आवाज बुलंद करने पर वीर सावरकर को दोहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ आवाज उठाने के लिए उन्हे लंबे वक्त तक जेल में रहना पड़ा. वीर सावरकर 1911 से 1921 तक अंडमान की जेल में रहे. अंडमान के एकांत कारावास में जेल की दीवारों पर कील और कोयले से कविताएं लिखीं और फिर उन्हें याद किया. सावरकर की सबसे बड़ी खासियत ये थी कि वो एक महान क्रांतिकारी के साथ-साथ इतिहासकार, समाज सुधारक, विचारक, चिंतक, साहित्यकार भी थे. आजादी के आंदोलन में सावरकर का अहम योगदान था लेकिन हिंदुत्व को लेकर उनके विचारों के कारण कांग्रेस हमेशा से सावरकर की कड़ी आलोचकर रही है. ऐसे में सावरकर को भारत रत्न देने का वादा कर बीजेपी ने एक ओर जहां महाराष्ट्र में इमोश्नल कार्ड खेला है तो वहीं कांग्रेस के लिए ये गले में ऐसी हड्डी की तरह है जिसे वो न उगल सकती है न निगल सकती है.

370 पर विरोधियों को खूब कोसा

इसके अलावा पीएम ने कहा कि 'मैं हैरान हूं कि छत्रपति शिवाजी की धरती पर आजकल राजनीतिक स्वार्थ के कारण ऐसी आवाजें उठायी जा रही हैं और इनकी बेशर्मी देखिए कि ये खुलेआम कह रहे हैं कि महाराष्ट्र के चुनाव से अनुच्छेद 370 का क्या लेना देना? महाराष्ट्र से जम्मू कश्मीर का क्या संबंध? अनुच्छेद 370 हटने से आप सभी खुश हैं, लेकिन उनका चेहरा उतर गया है, उन्हें दर्द हो रहा है. जैसे पाल-पोसकर कर रखा जाने क्या चला गया. इनके द्वारा संभाल के रखी 370 देशवासियों के चरणों में न्यौछावर हो गई.'

महाराष्ट्र की सियासत में हिंदुत्व के साथ-साथ दलित वोटबैंक बेहद अहम है. कांग्रेस समेत तमाम विरोध दल जहां भीमा कोरेगांव की घटना को हथियार बनाकर दलितों को लुभाने की कोशिशों में जुटे हैं तो वहीं अब बीजेपी ने ज्योतिबा फुले को भारत रत्न दिलाने का वादा कर दलितों को अपने पाले में लाने के लिए बड़ा दांव खेला है.