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महाराष्ट्र में वोटरों को लुभाने की मची होड़! क्या कहता है शिवसेना का 'वचननामा'

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सभी सियासतदानों ने अपनी-अपनी कमर कस ली है. हर कोई एड़ी-चोटी का जोर लगाने में जुटा हुआ है. इस बीच शिवसेना ने अपने घोषणापत्र में कांग्रेस वाला वादा शामिल किया है. 

महाराष्ट्र में वोटरों को लुभाने की मची होड़! क्या कहता है शिवसेना का 'वचननामा'
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे

नई दिल्ली: महाराष्ट्र से हरियाणा तक इन दिनों चुनावी मौसम चल रहा है. देश के दो राज्यों की कमान अगले पांच साल किसे दी जाए जनता को इसका फैसला करना है. ऐसे में सियासी दलों के बीच मतदाताओं को लुभाने की होड़ मची है. वोटरों को लुभाने के लिए सियासी दलों ने वादों की झड़ी लगा दी है. घोषणा पत्रों में ऐसे-ऐसे वादे किए जा रहे हैं जिन्हे पूरा करना अगर नामुमकिन नहीं तो आसान भी नहीं है.

शनिवार को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए शिवसेना ने अपना घोषणा पत्र जारी किया है. पार्टी मुखिया उद्धव ठाकरे, उनके बेटे आदित्य ठाकरे ने चुनावी घोषणा पत्र को वचननामा नाम दिया. लेकिन नाम से ज्यादा रोचक इन वचननामे में किए गए वादे है.

शिवसेना का वचननामा

  • 10 रुपये में भोजन 
  • 1000 भोजनालय बनाएंगे 
  • एक रुपये में स्वास्थ्य जांच
  • किसानों को कर्ज माफ 
  • गरीब किसानों को सालाना 10,000 रु. की सहायता
  • भूमिपुत्रोँ को नौकरी मे 80% आरक्षण
  • 300 यूनिट तक बिजली दर में 30% की कमी 
  • गरीब लड़कियों को ग्रेज्युएशन तक शिक्षा मुफ्त
  • 15 लाख छात्रों को स्कॉलरशिप 
  • सभी नागरिकों को घर

शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने इस दौरा कहा कि 'ये पूरा वचननामा काफी रिसर्च के बाद हुआ है. जब वचननामा बनाया तो हर एक वचन को जो भी फाइनेन्शियल एस्टिमेट है, पांच साल के लिए कितना लगेगा, हर साल के लिए कितना लगेगा, वो सब करके ही हमने वचन दिए है. जैसा कि हमने कहा कि हम जाहिरनामा नहीं करते वचन देते है और वचन पूरा करते है.'

  • महाराष्ट्र का सियासी इतिहास

महाराष्ट्र का गठन साल 1960 में हुआ था, जहां अबतक 27 कार्यकाल में 19 मुख्यमंत्री बने हैं.

सबसे लंबे वक्त तक सीएम

  • वसंत नाइक 3 बार 4097 दिनों तक
  • शरद पवार 3 बार 2413 दिनों तक
  • विलासराव देशमुख 2 बार 2681 दिनों तक

कितनी बार किसकी सरकार

  • कांग्रेस 23 बार
  • शिवसेना 2 बार
  • भाजपा 1 बार
  • पीडी फ्रंट 2 बार

चुनावों में वोट के लिए मुफ्त की रेवड़ियां बांटने के वादे तो राजनीतिक दल बिना सोचे समझे कर देते है. लेकिन, कई वादे ऐसे होते है जिन्हें पूरा करना आसान नहीं होता है. मध्य प्रदेश में किसानों के कर्जमाफी के वादे पर कांग्रेस सत्ता में आई थी. मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बने हुए एक साल होने को जा रहा है. किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा अभी भी सियासत की हवा में गोते लगा रहा है. हालांकि इसके बावजूद चुनावी वादे करने में कोई सियासी दल पीछे रहना नहीं चाहता है और कर्जमाफी का वादा किए जा रहा है.