कुर्सी के सपने पर फिरा पानी तो, शिवसेना ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा

महाराष्ट्र में सरकार और मुख्यमंत्री को लेकर चल रहे दंगल के बीच सभी पार्टियों को 6 महीने का वक्त मिल गया है. यानी प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया है, जिससे नाराज होकर शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी अर्जी लगाई है.

कुर्सी के सपने पर फिरा पानी तो, शिवसेना ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा

नई दिल्ली: महाराष्ट्र में सियासी दंगल जारी है. कुर्सी के खेल में सभी पार्टियां जोर-आजमाइश में लगी हैं. सत्ता की डोर हर दिन बीतने के साथ सुलझने के बजाय उलझती जा रही थी. महाराष्ट्र की सियासत में मंगलवार का दिन भी बड़ी उथल पुथल वाला रहा. बैठकों का दौर जारी रहा, नेताओं के बीच बातचीत जारी रही. मीडिया के सामने बयान दिए जाते रहे और शाम होते होते प्रेस कॉनफ्रेंस का दौर शुरू हुआ. महाराष्ट्र के चुनाव नतीजों ने जितनी साफ तस्वीर पेश की शिवसेना ने उसे उतना ही धुंधला बना दिया. चुनाव में एकसाथ उतरीं भाजपा-शिवसेना को जनता ने सरकार बनाने का मैनडेट दिया. लेकिन मुख्यमंत्री की मांग कर शिवसेना ने ऐसा पेंच फंसाया कि बात बीजेपी के साथ दोस्ती टूटने तक पहुंच गई.

शिवसेना ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा

शिवसेना की जिद ने राज्य को राजनीतिक अनिश्चतता के दलदल में धकेल दिया. चुनाव नतीजे आने के 19 दिन बाद भी जब कोई भी पार्टी सत्ता के करीब नजर नहीं आई तो राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर दी. कोई भी दल सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है. महाराष्ट्र चुनाव के नतीजों को आए 15 दिन का वक्त हो चुका है. ऐसे में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना ही बेहतर विकल्प है. महाराष्ट्र में राष्‍ट्रपति शासन के लिए राज्यपाल की सिफारिश को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी जिस पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के साथ ही राष्ट्रपति शासन लागू हो गया. उधर राज्यपाल के सिफारिश को शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. शिवसेना ने दो याचिकाएं दाखिल कर फौरन सुनवाई की मांग की है.

शिवसेना के वकील ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना की ओर से एक रिट पिटिशन फाइल किया गया है. जिसमें गवर्नर की उस दलील को चुनौती दी गई है कि आप सरकार नहीं बना सकते आपका दावा खारिज हो गया है, उसे रद्द करवाने के लिए ये याचिका दाखिल की गई है.

इसे भी पढ़ें: टूट गया शिवसेना का धनुष! अब बाला साहब से किया वादा कैसे पूरा करेंगे उद्धव?

सरकार बनाने को लेकर मथापच्ची

महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन पर शिवसेना एनसीपी समेत कांग्रेस ने भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि राज्यपाल भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं. इससे पहले सरकार बनाने के लिए माथापच्ची लंबी जारी रही. कांग्रेस एनसीपी के बीच कल की बातचीत को आज फिर आगे बढ़ाया. दिल्ली से खासतौर पर अहमद पटेल मल्लिकार्जुन खड़गे केसी वेणुगोपाल को मुंबई भेजा गया. जिन्होंने एनसीपी प्रमुख शरद पवार समेत एनसीपी के तमाम नेताओं से लंबी बातचीत के बाद शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस की और साफ किया कि उद्धव ठाकरे ने आधिकारिक तौर पर सोमवार शाम साढ़े 7 के बाद उनसे समर्थन की मांग की. इस पर चर्चा के लिए दोनों पार्टियों को वक्त चाहिए था.

इसे भी पढ़ें: 'यह राजनीति है, यहां कुछ भी हो सकता है'

दरअसल, कांग्रेस दुविधा में है कि शिवसेना को समर्थन दिया जाए या नहीं. ये दुविधा शिवसेना की कट्टर हिंदूवादी विचारधारा के चलते है. जल्द ही झारखंड में चुनाव होने हैं फिर दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल में चुनाव होने हैं. ऐसे में अपने मुस्लिम वोट बैंक को नाराज करने का जोखिम कांग्रेस उठाना नहीं चाहती है. लेकिन भाजपा को सत्ता से दूर करने के लिए शरद पवार सोनिया गांधी को कनविन्स करने में लगे हैं. इसीलिए कांग्रेस और एनसीपी आपस में बातचीत कर तमाम पेंच दूर कर लेना चाहते हैं ताकि कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पर सहमति बन सके.

फिलहाल राष्ट्रपति शासन लगने के बाद सभी पार्टियों को सरकार बनाने के लिए कम से कम 6 महीने का वक्त तो मिल ही गया है. लेकिन इस दौरान अपने विधायकों को बचाकर रखना भी बड़ी चुनौती होगी. कांग्रेस जिसने अपने 44 विधायकों को जयपुर के एक रिसॉर्ट में सुरक्षित रखा था उन सभी को वापस मुंबई बुला रही है. जाने से पहले राजस्थान के सीएम और कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत ने विधायकों के साथ समय बिताया और उनको पार्टी के साथ वफादार रहने की नसीहत दी. अभी जो स्थिति है उसमें कहा जा सकता है कि बातचीत जोड़ तोड़ का सिलसिला महाराष्ट्र में जारी रहेगा. इसमें कुछ चौंकाने वाले समीकरण भी बन जाए तो कोई हैरानी की बात नहीं है.