'विधायक बचाओ अभियान' में जुटी शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस

महाराष्ट्र की राजनीति इस मोड़ पर पहुंच गई है, कि ये कहना बेहद मुश्किल हो गया है कि अगले पल कौन सा ब्रेकर आने वाला है. इस बीच कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना को अपने विधायकों पर जरा भी भरोसा नहीं रहा है. उन्होंने इसके लिए एक अभियान छेड़ दिया है.

'विधायक बचाओ अभियान' में जुटी शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस

नई दिल्ली: महाराष्ट्र का महाधर्मसंकट हो या फिर कर्नाटक का राजनीतिक नाटक रहा हो. तस्वीरें ज्यादा अलग नहीं दिख रही हैं. हर किसी ने बसों में विधायकों को भरकर होटल के भीतर कैद करने वाली खबर की चर्चा सुनी होगी. अपनी पार्टी को टूट से बचाने के लिए ये हर दल का आजमाया हुआ फंडा है. यही फॉर्मूला महाराष्ट्र में लागू किया जाने लगा है.

महाराष्ट्र में 'विधायक बचओ अभियान'

महाराष्ट्र की सियासत में अगले दिन क्या होगा ये तो दूर की बात है, अगले घंटे क्या हो जाए इसकी भविष्यवाणी करना तक बेहद मुश्किल हो गया है. राज्य में नए सीएम और डिप्टी सीएम का शपथ ग्रहण हो गया और सरकार बन गई है. मुख्यमंत्री की कुर्सी पर देवेंद्र फडणवीस बैठ गए हैं. साथ में अजित पवार उप मुख्यमंत्री की गद्दी पर विराजमान हो गए हैं. लेकिन शह और मात का खेल अब भी जारी है. आखिरी बाजी कौन जीतेगा, इस पर सस्पेंस अब भी बरकरार है. 

इस बीच अपने अपने विधायकों को सुरक्षित ठिकाने पर रखने की प्रक्रिया तेज हो चली है. मुंबई में इस वक्त एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना के खेमे में जबरदस्त हलचल है. एनसीपी की निगाहें उस नंबर पर भी टिकी है. जिसके दावे शरद पवार लगातार कर रहे हैं. शरद पवार पूरे दिन अपने विधायकों के संपर्क में रहे. तो वहीं उद्धव ठाकरे ने भी विधायकों से लगातार बात की. 

होटल में ठहरे हैं विधायक

इस वक्त मुंबई के तीन अलग-अलग होटल में इन तीनों दलों के विधायक ठहरे हुए हैं. शिवसेना ने मुंबई के होटल ललित में 100 कमरे बुक करा रखे हैं. जिनमें तीन प्रेसिडेंशियल कमरे भी हैं. इसके अलावा एनसीपी विधायकों को मुंबई के रेनेशां होटल में ठहराया गया है. एनसीपी ने यहां 60 कमरे बुक करा रखे हैं. वहीं कांग्रस ने अपने विधायकों को मुंबई के ही मैरिएट होटल में ठहरा रखा है. पार्टी ने यहां 40 कमरे बुक किए हैं. यहां पार्टी के कई कार्यकर्ताओं को इनकी सुरक्षा की भी जिम्मेदारी दी गई है. एक-एक विधायक पर तीनों पार्टियां नजर रख रही हैं. मुंबई का रेनेशां होटल वही होटल है, जो पिछले दिनों कर्नाटक के बागी कांग्रेस नेताओं को ठहराने को लेकर चर्चा में रहा था.

काफी दिनों से विधायकों पर है नजर

चुनावी नतीजे के बाद से ही तीनों पार्टियां अपने विधायकों को लेकर काफी असमंजस में हैं. इससे पहले भी शिवसेना तक को अपने विधायकों पर भरोसा नहीं था. तभी तो उन्हें बसों में भरकर होटल में शिफ्ट किया गया था. कांग्रेस ने अपने विधायकों को जयपुर तक पहुंचा दिया था. हालांकि कुछ दिन बाद उन्हें मुंबई भेजा गया और फिर खबर ये भी थी कि कांग्रेस विधायक भोपाल शिफ्ट हुए थे.

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महाराष्ट्र से पहले कर्नाटक में भी ऐसा हो चुका है. ये सिर्फ एक राज्य की कहानी नहीं है, ये कहना गलत नहीं होगा कि आज की राजनीति का चरित्र यही है. विचारधारा की खातिर जीवन खपाने की बातें यहां सिर्फ भाषणों तक सिमट कर रह गई हैं. महाराष्ट्र में विधायक बचाओ अभियान में बस से लेकर चार्टर्ड प्लेन तक का धड़ल्ले से इस्तेमाल होता आ रहा है. 

कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना का इस वक्त पारा काफी हाई है. वो आर-पार की लड़ाई के लिए ताल ठोंक रहे हैं, तो भाजपा भी सीधी चुनौती दे रही है. मौजूदा उठापटक से साफ है कि महाराष्ट्र के इस 'महा सियासी ड्रामे' का क्लाइमेक्स भी बड़ा होगा. लेकिन अगले पल कौन सा विधायक किसकी ऊंगली थामकर आगे बढ़ जाए, ये कोई नहीं जानता है. और इसी डर से कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना ने विधायक बचाओ अभियान को लेकर काफी गंभीर है.

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