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तो फूट के चलते बैकफुट पर आ गई शिवसेना! पढ़ें: 3 अहम सबूत

शिववसेना ने गुरुवार को आनन-फानन में अपने विधायक दल की बैठक बुलाई थी, जिसमें आदित्य ठाकरे के बजाय एकनाथ शिंदे को नेता चुना गया. माना जा रहा है कि ये कदम शिवसेना के बैकफुट पर जाने का सबसे अहम सबूत है, लेकिन इसके पीछे की वजह अंदरूनी फूट बताई जा रही है.

तो फूट के चलते बैकफुट पर आ गई शिवसेना! पढ़ें: 3 अहम सबूत

नई दिल्ली: महारष्ट्र में मुख्यमंत्री की ताजपोशी को लेकर शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी के बीच अबतक बात नहीं बन पाई है. इन सबके बीच सबसे बड़ी खबर ये आ रही है कि शिवसेना ने बैकफुट पर जाने का मूड बना लिया है. और इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह पार्टी में फूट बताई जा रही है.

सबूत नंबर 1

दो धड़ों में बंट गई शिवसेना!

दरअसल सूत्रों के हवाले से ये जानकारी सामने आ रही है कि अड़ियल रवैये के चलते शिवसेना के अंदर गुटबाजी शुरू हो गई है. कहा ये भी जा रही है कि पार्टी में दो धड़े बंट गए हैं. जिसके बाद उसके पास कोई चारा नहीं बच रहा है. विधायक दल की बैठक में जो कुछ भी हुआ उसके बाद ये समझना और भी आसान हो जाता है कि शिवसेना के लिए सीएम की कुर्सी वाली जिद उसकी मुश्किलें बढ़ाने का काम कर रही है.

सबूत नंबर 2

ऐसी क्या मजबूरी थी?

ये सवाल इसलिए अहम है क्योंकि अचानक से बुधवार को शिवसेना ने अपनी एक इमरसेंजी मीटिंग बुलाई, आदित्य ठाकरे का दौरा रद्द कर दिया गया. और अचानक से इस बैठक में आदित्य ठाकरे की बजाय एकनाथ शिंदे को विधायक दल का नेता चुन लिया गया. और एकनाथ को नेता चुनने का प्रस्ताव खुद आदित्य ठाकरे ने रखा. जो शिवसेना आदित्य ठाकरे को 2.5 साल के लिए मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रही है, आखिर उसके लिए ऐसी क्या मजबूरी थी? जो उसे शिंदे को विधायक दल का नेता चुनने के लिए मजबूर कर दिया. इस मजबूरी की सबसे बड़ी वजह यही बताई जा रही है कि भाजपा से शिवसेना के इस रवैये को लेकर पार्टी दो धड़ों में बंट गई है. जिसके डैमेज कंट्रोल के लिए वो बैकफुट पर जाने को मजबूर हो गई.

इन धड़ों में बंटी शिवसेना

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार पहला गुट वो है जो 2.5-2.5 साल के फॉर्मूले पर अड़ा हुआ है. इस धड़े में है संजय राउत, अनिल परब और दिवाकर राउते जैसे नेता शामिल हैं. जबकि दूसरा धड़ा उद्धव ठाकरे को नरम रुख अपनाने पर जोर दे रहा है. इस गुट में अनिल देसाई, सुभाष देसाई और विनायक राउत जैसे कई नेता शामिल हैं. इसके अलावा कुछ ऐसे भी नेता हैं, जो बिल्कुल शांत बैठे हैं. 

सबूत नंबर 3

भाजपा के दावे के मायने

हाल ही में भाजपा से राज्यसभा सांसद संजय ककडे ने दावा किया था कि शिवसेना के तकरीबन 45 विधायक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के संपर्क में हैं. और वो सभी गठबंधन की सरकार और फडणवीस को सीएम बनाने के पक्ष में हैं. भाजपा का ये दावा शिवसेना की परेशानी बढ़ाने वाले दावे से कतई कम नहीं था. जिसके बाद से ही शिवसेना में टूट की बात बाहर आने लगी. संभवतः ये माना जा रहा है कि शिवसेना के विधायक दल की बैठक से जो संकेत आए हैं. वो सीधे दौर पर उसके बैकफुट पर जाने की बात साबित करते दिखाई दे रहे हैं. अब ऐसे में अगर शिवसेना अंदरूनी फूट के चलते बैकफुट पर गई है, तो इसमें ज्यादा हैरानी की बात नहीं है.