ऐसे चलेगी महाराष्ट्र में सरकार, बनेगी सुपर कोआर्डिनेशन कमेटी

महाराष्ट्र में गैर-भाजपा सरकार बनाने का शिवसेना का दावा सच साबित हो गया है. तमाम जद्दोजहद के बाद शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस ने प्रदेश में सरकार बनाने के मसौदे को मंजूरी दे दी है लेकिन उसके लिए एक खास कमिटी बनाई जा रही है जो तीनों पार्टियों के बीच सामंजस्य स्थापित करे. 

ऐसे चलेगी महाराष्ट्र में सरकार, बनेगी सुपर कोआर्डिनेशन कमेटी

मुंबईः महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की सरकार बनने का रास्ता लगभग साफ हो चुका है. बड़े स्तर पर तीनों दलों के बीच सरकार बनाने को लेकर सहमति बन गई है. शिव सेना के सूत्रों के मुताबिक अगले 3 दिनों के भीतर सरकार शपथ ले लेगी. शिवसेना नेता संजय राउत शुरू से कह रहे थे कि सरकार शिवसेना ही बनाएगी. इससे पहले उद्धव ठाकरे भी ऐसा कह चुके हैं. गुरुवार शाम को आई खबरों की मुताबिक उद्धव ठाकरे ही अगले सीएम बन सकते हैं. पहले वह आदित्य को सीएम बनाना चाहते थे, जिस पर सहमति नहीं बन पा रही थी.

15 दिन पर कोआर्डिनेशन कमेटी की बैठक होगी

सरकार चलाने के लिए बाकायदा 12 सदस्यों वाली कोआर्डिनेशन कमेटी गठित की जाएगी. इस कोआर्डिनेशन कमेटी के ऊपर सुपर कमेटी होगी. इस कमेटी में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और एनसीपी के प्रमुख शरद पवार होंगे. महत्वपूर्ण मसलों पर या टकराव वाले मसलों पर सुपर कमेटी आपस में एक दूसरे से चर्चा कर या बैठक करके मसले को सुलझाएगी. जबकि रोजमर्रा के मुद्दों पर 12 सदस्यों वाली कोऑर्डिनेशन कमेटी की बैठकें होंगी. कोआर्डिनेशन कमेटी में तीनों दलों के चार -चार नेता शामिल होंगे. इसमें विधायक दल के नेता, प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश संगठन प्रभारी सहित पार्टी की ओर से नामांकित सदस्य होंगे. कॉमन मिनिमम प्रोग्राम को लागू करने के लिए हर 15 दिन पर कोआर्डिनेशन कमेटी की बैठक होगी.

शिवसेना ने छोड़ा कट्टर हिदुत्व, मुस्लिम तुष्टिकरण पर भी कम होगी बात

सूत्रों के मुताबिक, कॉमन मिनिमम प्रोग्राम लगभग तैयार है. तीनों ही दल एक दूसरे के वैचारिक दृष्टिकोण और राजनैतिक धरातल का सम्मान करते हुए सरकार चलाएंगे. इस दौरान न तो कट्टर हिंदुत्व को बढ़ावा दिया जाएगा और न ही मुस्लिम तुष्टिकरण को बढ़ावा दिया जाएगा. कांग्रेस इस बारे में पहले ही शिवसेना से समझौता कर चुकी है. हालांकि इस निर्णय पर उद्धव ठाकरे की आलोचना जारी है. कहा जा रहा है कि उन्हें साख से समझौता करना महंगा पड़ सकता है. वहीं एनसीपी ने भी शिवसेना से पूर्ण समर्थन के विश्वास के लिए केंद्रिय मंत्रिमंडल से उनके मंत्री का इस्तीफा दिलवाया है.