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सरकार बनाने का दावा तो कर दिया, लेकिन क्यों हरियाणा में पिछड़ी भाजपा?

हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी पिछले चुनाव के मुकाबले एक-दो नहीं बल्कि 7 सीट पीछे चली गई है. ऐसे में माना जा रहा है कि यहां, जाट वोटबैंक ने भाजपा का खेल बिगाड़ दिया है.

सरकार बनाने का दावा तो कर दिया, लेकिन क्यों हरियाणा में पिछड़ी भाजपा?

नई दिल्ली: हरियाणा विधानसभा चुनाव की तस्वीर साफ हो चुकी है. बीजेपी न केवल अबकी बार 75 पार के नारे से चुक गई बल्कि बहुमत तक भी नहीं पहुंच पाई. हरियाणा में बीजेपी को लगे इस बड़े झटके की एक बड़ी वजह जाट फैक्टर माना जा रहा है. ऐसे में सवाल खड़े हो रहा है कि जाट लैंड में कैसे बिगड़ा बीजेपी का चुनावी गणित. और किसे मिला हरियाणा में जाटों का साथ.

सू्त्रों के हवाले से ये जानकारी मिल रही है कि मुख्यमंत्री और भाजपा नेता मनोहर लाल खट्टर ने राज्यपाल सत्यदेव नारायण से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है.

जाटों ने बिगाड़ा भाजपा का खेल?

2019 के विधानसभा चुनाव में एक ओर जहां भूपेंद्र सिंह हुड्डा का राजनीतिक वनवास खत्म हुआ तो वहीं दुष्यंत चौटाला भी हरियाणा की राजनीति में देवीलाल के वारिस के तौर पर उभरे. खास बात ये है कि हुड्डा और चौटाला दोनों ही हरियाणा की सियासत के जाट चेहरे हैं. पहले ही चुनाव में दुष्यंत की पार्टी JJP ने जहां 10 सीटों पर जीत का झंडा फहरा दिया तो हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस ने भी शानदार वापसी की. नतीजे बता रहे है कि कांग्रेस को सबसे ज्यादा फायदा जाट बाहुल इलाकों और ग्रामीण इलाकों में हुआ.

हरियाणा में जाटों की आबादी करीब 25 फीसदी है जबकि राज्य की 30 विधानसभा सीटों पर जाटों का प्रभाव माना जाता है. हरियाणा के करीब एक दर्जन जिलों में जाटों का दबदबा है.

ये जिले जाट बाहुल्य

  1. रोहतक
  2. सोनीपत
  3. पानीपत
  4. जींद
  5. कैथल
  6. सिरसा
  7. झज्जर
  8. फतेहाबाद
  9. हिसार 
  10. भिवानी

यही वजह है कि हरियाणा की सियासत पर दशकों से जाटों का दबदबा रहा है. लेकिन 2014 में बीजेपी ने गैर जाटों को एकजुट कर सूबे की सियासत में नई लकीर खींची थी. इसी के चलते 2014 में बीजेपी को अकेले पूर्ण बहुमत मिला तो बीजेपी ने गैर जाट मनोहर लाल खट्टर को सीएम की कुर्सी पर बिठाया.

हरियाणा में बीजेपी को जाटों का गुस्सा जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान झेलना पड़ा. जाट आरक्षण आंदोलन के बाद से ही जाट बीजेपी के नाराज थे. हालांकि लोकसभा चुनाव में हरियाणा में बीजेपी ने सभी सीटों पर जीत दर्ज की थी. लेकिन महज पांच महीने में ही पूरा सियासी समीकरण बदल गया.

  • हरियाणा में 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 58% वोट मिले
  • विधानसभा चुनावों में भाजपा को 36% वोट मिले
  • 5 महीने बाद हुए इन चुनावों में भाजपा को 22% का नुकसान हुआ है
  • 2014 विधानसभा चुनाव के मुकाबले भाजपा का वोट शेयर 3% बढ़ा है

लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी कई जाट बाहुल्य विधानसभा सीटों पर बढ़त नहीं बना पाई थी और यही कारण रहा कि विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने जाटों को पिछली बार की तुलना में कम टिकट दिए.

  • 2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 27 सीटों पर जाटों को टिकट दिए थे
  • 2019 में बीजेपी ने सिर्फ 20 जाट उम्मीदवारों को ही चुनावी मैदान में उतारा

बीजेपी आला कमान ने हरियाणा में जाटों को साधने का जिम्मा प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला को दिया था, जो खुद अपनी सीट नहीं बचा पाए. साफ है हरियाणा में जाट बनाम गैर जाट की सियासी जंग बीजेपी का खामियाजा बीजेपी को भुगतना पड़ गया.