हरियाणा के चुनाव में कितना जरूरी बाबा फैक्टर, इस बार कैसी बयार

चुनाव में बाबा फैक्टर कितने अहम होते हैं, ये हरियाणा के अब तक के चुनावी दांवपेंच से बखूबी परखा जा सकता है. क्या है हरियाणा मे बाबा फैक्टर का पूरा खेल, आइए जानते हैं...

हरियाणा के चुनाव में कितना जरूरी बाबा फैक्टर, इस बार कैसी बयार

नई दिल्ली: हरियाणा के चुनावी रण में इस बार कुछ ऐसे रसूखदार व्यक्तियों की अनुपस्थिति में हो रहा है जिनका अलग ही जलवा हुआ करता था. तमाम बड़े से बड़े राजनीतिक चेहरे उनके दरबार में हाजिरी दर्ज कराने जरूर जाते थे. उस हाजिरी का मकसद बाबाओं के आशीर्वाद को पा लेना था  और उस आशीर्वाद में सरकार बनाने और सरकार गिराने की शक्ति होती थी. हरियाणा के सियासी खेल में अक्सर दो बाबाओं का दबदबा देखने को मिला है. लेकिन हरियाणा के विधानसभा चुनाव के इन दो दशकों के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है कि इस पर किसी चमत्कारी बाबा का प्रभाव नहीं होगा. मतलब ये कि इस बार का चुनावी दंगल विशुद्ध राजनीतिक खेल पर ही टिका हुआ है बजाए कि चमत्कारी शक्ति के.

दरअसल, हरियाणा में बाबा राम रहीम का सिक्का चलता था. वहीं बाबा राम रहीम जो फिलहाल यौन शोषण के मामले में जेल की हवा खा रहे हैं. हरियाणा में  90 विधानसभा सीट है जिसमें से तकरीबन 30 सीटों पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष  रूप से बाबा राम रहीम और रामपाल बाबा का दबदबा कायम था. न सिर्फ चुनाव के दौरान बल्कि अन्य अवसरों पर भी विधायक से ले कर सांसदों का इन बाबाओं के दरबार में आना जाना लगा रहता था. कांग्रेस, भाजपा के अलावा अन्य क्षेत्रीय दलों  के नेता भी राम रहीम के पास पहुंचते थे.

दरबार में लगी रहती थी राजनेताओं की लाइन

चुनाव के दौरान दरबारी गतिविधियों के बढ़ जाने का एकमात्र साफ कारण था. बाबा राम रहीम का प्रभाव उनके श्रद्धालुओं पर कितना था उसका पता इस बात से भी चलता है जब राम रहीम को गिरफ्तार करने डेरा पहुंची टीम पर हमला कर
भयानक हिंसा की गई. डेरा सच्चा सौदा के नाम से मशहूर बाबा राम रहीम की एक अपील प्रत्याशी व पार्टी को एक बड़ा जनाधार दिला थी. यहीं कारण है कि राम रहीम हो या रामपाल बाबा इनके दरबारों में खजाने का एक बड़ा भाग राजनेताओं
की गाढ़ी कमाई से आता था. 

वोट बैंक में तब्दीली का रास्ता संत के द्वार से 

सतलोक आश्रम विवाद मामले में दोषी संत रामपाल फिलहाल हिसार जेल में बंद हैं. रामपाल का प्रभाव भी हरियाणा की राजनीति में कुछ कम नहीं था. रामपाल क्योंकि आर्य समाज के गुणों के संरक्षण का मुद्दा उठाते थे तो हरियाणा में एक बड़े वर्ग पर इनका भी प्रभाव था जिसे वोट बैंक में तब्दील करने के लिए बड़े-बड़े राजनेता भी संपर्क साधने की जद्दोजहद में लगे रहते थे. 2019 के विधानसभा चुनाव में इनकी गैर-मौजूदगी में चुनावी समीकरण कितना बदला हुआ नजर आ रहा है और इसके क्या परिणाम निकलने वाले हैं, ये देखना दिलचस्प होगा.