उद्धव ठाकरे ने विधायकों के सामने रोया अपना दुखड़ा

महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर हो रही देरी की वजह से उद्धव ठाकरे बैकफुट पर हैं. उन्होंने शिवसेना विधायकों के साथ हुई अपनी बैठक में अपना दर्द कुछ इस तरह बयां किया. उद्धव इसलिए भी परेशान हैं क्योंकि उनके 17 विधायकों के तेवर बगावती होने की खबर आ रही है. 

उद्धव ठाकरे ने विधायकों के सामने  रोया अपना दुखड़ा
शिवसेना विधायकों के सामने उद्धव ठाकरे ने गिनाई अपनी मजबूरियां

मुंबई: शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अपने विधायको के सामने अपराधबोध महसूस कर रहे हैं. क्योंकि चुनाव परिणाम आने के 25 दिन बाद भी सरकार का गठन नहीं हो पाया है. उन्होंने अपने निवास मातोश्री पर शिवसेना विधायकों के साथ बैठक की. 

उद्धव ने फोड़ा भाजपा पर ठीकरा
उद्धव ठाकरे ने अपने विधायकों के साथ बैठक में महाराष्ट्र में सरकार बनाने में हो रही देरी की पूरी जिम्मेदारी भाजपा के उपर डाली. उन्होंने अपने विधायकों को भाजपा की शिवसेना से वादाखिलाफी के किस्से सुनाए. मीटिंग में  उद्धव ठाकरे ने असंतुष्ट  विधायकों को बताया कि क्यों वह कांग्रेस एनसीपी का साथ लेकर महाराष्ट्र में अपना मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं. 

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शिवसेना की बैठक के अंदर हुई कुछ ऐसी बातें
सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि मातोश्री में हुई बैठक में सभी विधायकों ने उद्धव ठाकरे से मांग की है कि मुख्यमंत्री वही बनें. 
उद्धव ठाकरे ने इसका जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने दिवंगत बालासाहेब को वचन दिया था कि वे मुख्यमंत्री पद पर एक शिवसैनिक को बैठाएंगे, ये कुर्सी उन्होंने अपने लिये नही मांगी है. 
जिसके बाद विधायकों ने एक स्वर में कहा जनता के बीच से चुनकर आए किसी नेता को मुख्यमंत्री पद पर आसीन किया जाना चाहिए. लेकिन उन्होंने ये फैसला उद्धव ठाकरे पर ही छोड़ दिया. 
सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि महाराष्ट्र के  मुख्यमंत्री पद के लिए शिवसेना विधायक एकनाथ शिंदे के नाम पर ज्यादातर विधायकों ने अपनी सहमति दी. 
यानी शिवसेना की तरफ से मुख्यमंत्री पद के लिए एकनाथ शिंदे का नाम फिलहाल सबसे आगे चल रहा है. 

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उद्धव ने भाजपा को बताया धोखेबाज
शिवसेना विधायकों को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा बीजेपी ने हमे धोखा दिया और हमे NDA से बाहर निकाल दिया. 
उद्धव का ये भी आरोप था कि मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने दीपावली के समय 50-50 फॉर्मूले के लिए हामी भरी थी. लेकिन बाद में वह  झूठ बोलने लगे.
उद्धव ने कश्मीर का उदाहरण देते हुए कहा कि कश्मीर में PDP जैसे विपरीत विचारधारा के दलों के साथ सरकार बना सकते  है,मुख्यमंत्री पद के लिये compromise कर सकते है,लेकिन हमारे साथ ऐसा करने के लिए तैयार नहीं हुए. 
उद्धव ने पीएम मोदी और अमित शाह पर भी आरोप लगाया कि जब गठबंधन टूटा तो इसे रोकने के लिये भाजपा अध्यक्ष और प्रधानमंत्री मोदी ने बीचबचाव नहीं किया. इसकी बजाए हमें NDA से बाहर निकाल दिया गया. इसीलिए शिवसेना को ये निर्णय लेने पर मजबूर होना पड़ा.

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शिवसेना के मुख्यमंत्री पद के लिए तीन नामों पर चर्चा
बैठक में सभी विधायक चाहते है कि उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने. लेकिन उद्धव मुख्यमंत्री नही  बनते है  तो एकनाथ शिंदे,सुभाष देसाई,संजय राउत इन तीन के नामो की चर्चा हो रही है, लेकिन सबसे आगे नाम एकनाथ शिंदे का चल रहा है. 
हालांकि सभी विधायकों से कहा गया है कि मुख्यमंत्री पद के संभावित नामों की चर्चा पर विधायक बात न करें. जिसके बाद सभी शिवसेना विधायकों ने एक स्वर में उद्धव ठाकरे के फ़ैसले को आखिरी फैसला मानने की बात कही. 

बहरहाल शिवसेना कांग्रेस एनसीपी मिलकर सरकार बनाएगी यह लगभग तय है,लेकिन मुख्यमंत्री कौन बनेगा इस बात को लेकर सस्पेन्स कायम है

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