आखिर ऐसी क्या बात कि देर रात शरद पवार से मिलने पहुंचे उद्धव ठाकरे?

महाराष्ट्र में अब शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन की सरकार का रास्ता तय हो गया है. लेकिन सबसे गैर-भाजपा सरकार बनाने की बेचैनी सबसे अधिक शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को थी और इतनी थी कि वे आधी रात को एनसीपी प्रमुख शरद पवार के पास पहुंच गए. किस मामले में क्या बात हुई, यह सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं.

आखिर ऐसी क्या बात कि देर रात शरद पवार से मिलने पहुंचे उद्धव ठाकरे?

मुबंई: सरकार बनाने की बेचैनी से परेशान शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे देर रात शरद पवार से मिलने उनके आवास पहुंचे. गठबंधन की सूरत में यह लगभग तय है कि शिवसेना के उद्धव ठाकरे ही मुख्यमंत्री बनेंगे. लेकिन जब से यह तय हुआ है तब से शिवसेना प्रमुख से रहा नहीं जा रहा. वह किसी भी तरह से सरकार बनाने का मौका अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहते. देर रात शरद पवार के घर पहुंचे आखिर ऐसी क्या बात करने पहुंचे थे जो शाम तक बैठकों में नहीं की जा सकी ? यह भी कि क्या सीएम बनने के अलावा राज्य सरकार में मंत्रियों के नाम पर सहमति बनाने पहुंचे थे या अहम मंत्रालयों को लेकर, इसकी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है. 

लंबी खींचतान के बाद ठाकरे परिवार से सीएम तय

गुरुवार को लंबी खींचतान के बाद इतना तो तय हो गया कि महाराष्ट्र में गैर-भाजपा सरकार बनेगी और तीनों पार्टियां कम सीटें जीतने के बावजूद भाजपा को विपक्ष में बैठने को मजबूर करेंगी. सरकार बनाने का मैराथन जो तकरीबन 26 दिनों तक चला, उसमें सबकी नजर इसपर थी कि मुख्यमंत्री कौन होगा. आखिरकार यह लगभग तय है कि ठाकरे परिवार पहली बार प्रत्यक्ष रूप से राजनीति में नजर आएगी और उद्धव ठाकरे अपनी पुरानी परंपरा से परे मुख्यमंत्री बन सकते हैं. लेकिन बात यहां कुछ और ही थी. दरअसल, तीनों पार्टियों में 42 मंत्रिपद को लेकर अब तक कोई सहमति बन सकी है या नहीं इसकी जद्दोजहद लगी हुई है. 

रोटेशनल मुख्यमंत्री की बात पर पलटी शिवसेना

जो सबसे अहम बातें हैं जिसपर तीनों पार्टियों के बीच सहमति बन नहीं पा रही वह है रोटेशनल मुख्यमंत्री और दूसरा कि कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में मुद्दों और एजेंडों पर सबकी सहमति. दिलचस्प बात यह है कि भाजपा के साथ 50-50 फॉर्मूले पर अड़ी शिवसेना अब एनसीपी और कांग्रेस के साथ गठबंधन में ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री पद बांटने को तैयार नहीं हो रही. तब जब कि शिवसेना एनसीपी से मात्र 2 सीटें ही ज्यादा जीत पाई है. फिर भी उद्धव ठाकरे की महत्वाकांक्षा उन्हें मजबूर कर रही है कि वे राज्य में मुख्यमंत्री पद किसी से न बांटें. इसके अलावा पार्टियों के अंदर कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में राजनीतिक विचारधारा अलग होने की वजह से भी सहमति नहीं बन पा रही.

सामंजस्य के लिए बनाई गई है कॉर्डिनेशन कमिटी

दरअसल, कांग्रेस और एनसीपी यह चाहती है कि धर्म निरपेक्षता के मसले पर सबकी सहमति बन जाए लेकिन हिंदुत्व एजेंडे वाली पार्टी शिवसेना धर्म निरपेक्षता के मुद्दे को कॉमन मिनिमम प्रोग्राम से अलग रखना चाहती है. हालांकि, तीनों दलों ने मिलकर एक कॉर्डिनेशन कमिटी का गठन किया है जिसका काम होगा हर 15 दिन पर सभी दलों से बातचीत कर उनके बीच किसी बात पर असहमति को लेकर सामंजस्य स्थापित करना. इसके अलावा तीनों दलों में किसानों को लेकर योजनाओं और नौकरी से लेकर रोजगार तक के लिए भी एक मिनिमम प्रोग्राम बनाया गया है.

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शुक्रवार को यानी आज तीनों दलों के विधायकों की साथ ही बैठक होगी और इसके बाद शनिवार को राज्यपाल के पास एक साझा चिठ्ठी भेज सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे.