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गडकरी ने खारिज की अड़चने, 'मेरे मुख्यमंत्री बनने का सवाल ही नहीं'

महाराष्ट्र की राजनीति ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है कि कुछ भी कयास लगा पाना बेहद मुश्किल होता जा रहा है. इस बीच नितिन गडकरी ने ये साफ कर दिया है कि वो महाराष्ट्र की कमान नहीं संभालेंगे. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस सियासी उठापटक पर कब लगेगा फुलस्टॉप?

गडकरी ने खारिज की अड़चने, 'मेरे मुख्यमंत्री बनने का सवाल ही नहीं'

नई दिल्ली: महाराष्ट्र की सियासत में शिवसेना थोड़ा भी झुकने को तैयार नहीं है. उद्धव अड़े हुए हैं कि किसी भी तरह ठाकरे परिवार का भविष्य यानि आदित्य ठाकरे सीएम की कुर्सी पर काबिज हो जाएं.  इधर भारतीय जनता पार्टी को भी समझ नहीं आ रहा कि क्या किया जाए. आज गडकरी नागपुर तो पहुंचे हैं लेकिन उन्होंने भी साफ कर दिया कि वो सीएम पद की रेस में नहीं हैं.

नितिन गडकरी की सफाई

हर कोई ये जानने की कोशिश कर रहा था कि आखिर शिवसेना और भाजपा के बीच महाराष्ट्र में छिड़े घमासान को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने चुप्पी क्यों साध रखी है. इस बीच गडकरी आग नागपुर पहुचे और उन्होंने कह दिया कि वो दिल्ली से महाराष्ट्र लौटना नहीं चाहते है. गडकरी ने ये भी बताया कि शिवसेना से बातचीत जारी है और फैसला भी जल्द ही होगा.

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि 'भाजपा और शिवसेना दोनों के गठबंधन को बहुमत मिला है और जल्दी ही निर्णय होगा. जहां तक बीजेपी का सवाल है, हमारे नेता के रूप में देवेन्द्र जी का चयन हुआ है और उनके ही नेतृत्व में महाराष्ट्र में सरकार बननी चाहिए. मैं अब दिल्ली में हूं और मुझे महाराष्ट्र में आने का सवाल ही नहीं उठता है.'

जारी है कशमकश का दौर

आपको बता दें, महाराष्ट्र में सरकार को एनडीए के अन्य सहयोगी भी परेशान हैं कि क्या किया जाए. रामदास अठावले ये तो कह रहे हैं कि सरकार एनडीए की ही बनेगी. लेकिन, वो ये नहीं बता पा रहे कि कब बनेगी? इतना जरूर कह रहे हैं कि जल्द ही बीजेपी और शिवसेना में बात बन जाएगी. इस रस्साकशी के बीच भाजपा नेता चंद्रकांच पाटिल भी राजभवन पहुंचे और राज्यपाल कोश्यारी से मुलाकात की. हालांकि बाहर आकर मुलाकात को राजनैतिक हालात पर मंथन की बैठक बताया. ये भी कहा कि आखिरी फैसला तो आलाकमान का ही होगा.

इधर कांग्रेस और एनसीपी वेट एंड वॉच के नुस्खे पर कायम हैं. वो दोनों ही दो विरोधियों के बीच छिड़े संग्राम को देख रही हैं. और शिवसेना टस से मस होने को राजी नहीं है. तो सरकार बनाने का फॉर्मूला होगा क्या?

क्या है महाराष्ट्र का सियासी समीकरण

288 विधायकों वाली विधानसभा में बीजेपी के पास 105 सीट हैं. बहुमत का आंकड़ा 145 है. और शिवसेना यदि साथ न आए, लेकिन फ्लोर टेस्ट के वक्त एनसीपी सदन से बाहर चली जाए तो बहुमत का आंकड़ा 118 पहुंचता है. ऐसे में भाजपा निर्दलीयों के साथ मिलकर बहुमत हासिल कर सकती है.

फिलहाल के हालात में भाजपा के पास दो ही रास्ते नजर आते हैं. सरकार बनानी है तो या तो शिवसेना को किसी भी तरह मना लिया जाए. या फिर एनसीपी बीजेपी के लिए बात बना दे. गडकरी और शरद पवार के रिश्तों को देखकर प्लान बी बीजेपी के लिए ज्यादा मुश्किल भी नजर नहीं आता. तीसरा रास्ता राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने का बचता है. यदि दोनों ही बात नहीं बनती हैं तो बीजेपी राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकती है. और दोबारा चुनाव में 288 सीट पर अकेले लड़कर बहुमत हासिल करने की कोशिश कर सकती है.