'हमारे पास 119 विधायकों का समर्थन, बनाएंगे सरकार'

महाराष्ट्र में अभी सरकार बन नहीं पाई है, लेकिन एक और बयान ने तहलका मचा दिया है. सरकार बनाने से पूरी तरह अलग हो चुकी भाजपा के खेल में दोबारा आने के संकेत मिल रहे हैं. प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील ने कहा है कि पार्टी के पास 119 विधायकों का समर्थन है.

'हमारे पास 119 विधायकों का समर्थन, बनाएंगे सरकार'

मुंबईः महाराष्ट्र विधानसभा का हाल तो भगवान भरोसे. 20 दिन से जारी बयानबाजी का अभी तक कोई अर्थ कोई मायने नहीं निकल रहे हैं, लेकिन बयान देने में कोई कमी नहीं आ रही है. एनसीपी, शिवसेना का गठबंधन तुड़वा चुकी है. कांग्रेस शिवसेना से उसकी हिंदुत्व वाली पहचान छीन रही है, शिवसेना दोनों की बातें मानने में फंसी है, लेकिन सरकार नहीं बन पा रही है. कुर्सी पर काबिज होने की इन कोशिशों के बीच भाजपा की ओर से बड़ा बयान आ गया है. इससे हर आंखें और हर कान फिर से भाजपा की ओर टिक गई हैं. 

महाराष्ट्र में सरकार बनाने से इनकार कर चुकी भाजपा ने दावा किया है कि उसके पास 119 विधायकों का समर्थन है और वह जल्दी ही सत्ता में लौटेगी. भाजपा के महाराष्ट्र में प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील ने ऐसे वक्त में यह बयान दिया है, जब शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के साथ सरकार बनाने की कोशिश में जुटी है. वहीं एनसीपी के मुखिया शरद पवार ने कहा है कि हम पूरे 5 साल तक साझा सरकार चलाएंगे.

पाटील ने दावा किया कि भाजपा को कुछ निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन हासिल है और हमारे साथ पूरे 119 हैं. मीडिया से बात करते हुए पाटील ने कहा, भाजपा राज्य में सबसे बड़ी पार्टी है और हमारे पास अब कुल 119 विधायकों का समर्थन है. इस आंकड़े के साथ बीजेपी सरकार बनाएगी. शिवसेना की ओर से सरकार गठन की कोशिशों को लेकर पाटील ने कहा कि हम राज्य के राजनीतिक हालात पर नजर रख रहे हैं.

सीएम पद साझा न करने पर टूटा गठबंधन
288 विधानसभा सीटों वाले राज्य में 24 तारीख को नतीजे आए थे. इसी दिन हरियाणा में भी चुनाव परिणाम आया था. महाराष्ट्र में गठबंधन को क्लियर वोट मिलने के कारण स्थिति साफ लग रही थी, जबकि हरियाणा में मामला फंसता दिख रहा था. इसके बाद भी वहां पहले सरकार बन गई, कैबिनेट का गठन हो गया और महाराष्ट्र में बना बनाया गठबंधन टूट गया. किसी भी दल या गठबंधन के सरकार न बना पाने पर बुधवार को राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन लगा दिया था.

भाजपा और शिवेसना ने एक साथ चुनाव लड़ा था और 161 सीटें जीती थीं. चुनाव के बाद शिवसेना ने भाजपा से सीएम पद साझा करने की बात कही, जिस पर सहमति न बनने के बाद दोनों दलों ने अपने रास्ते अलग कर लिए.

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