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क्या कहता है हरियाणा का मिजाज, फिर चलेगा 'मोदी मैजिक' या कांग्रेस करेगी कमबैक?

साल 2014 में हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजे जब सामने आए तो राजनीति में एक जादुई जीत का इतिहास लिखा गया. सूबे में भारतीय जनता पार्टी 4 सीट से छलांग मारकर सीधे 47 सीटों पर पहुंच गई. लेकिन इस बात को 5 साल बीत चुके हैं. चुनाव सिर पर है और सवाल सिर्फ एक है. क्या भाजपा इस बार सीएम के सिंहासन को बचा पाने में कामयाब हो पाएगी या हरियाणा में एक बार फिर जादुई बदलाव की दास्तां दर्ज की जाएगी.

क्या कहता है हरियाणा का मिजाज, फिर चलेगा 'मोदी मैजिक' या कांग्रेस करेगी कमबैक?

नई दिल्ली: 5 साल पहले साल 2014 में जब लोकसभा चुनाव के बाद हरियाणा में विधानसभा चुनाव हुए तो उस वक्त के नतीजों ने हर किसी को सन्न कर दिया था. इसकी वजह भाजपा की जादुई जीत थी. सूबे में चुनावी बिगुल बज चुका है, कशमकश का दौर जारी है. सभी सियासी पार्टियां और सियासतदान अपनी एड़ी-चोटी का जोर लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. ऐसे में हरियाणा का क्या मिजाज है, राज्य की जनता ने इस बार क्या मूड बनाया है? इसकी जानकारी तो आने वाली 24 तारीख को ही मिल पाएगी. 

हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए मतदान आने वाले 21 अक्टूबर किया जाएगा और मतगणना 24 अक्टूबर को होगी. ऐसे में प्रचार का दौर हर रोज रफ्तार पकड़ता जा रहा है. जहां एक तरफ मनोहर लाल खट्टर की सेना इस जंग में अपनी उपाधियों को गिनाने का काम कर रही है तो राहुल के खेमे वाले कांग्रेसी कार्यकर्ता इस युद्ध को करो या मरो की तरह लड़ने का काम कर रहे हैं. ये कहना गलत नहीं होगा कि इस चुनाव में इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) को भी अपने वजूद की लड़ाई लड़नी है. 

क्या कहते हैं साल 2009 के चुनावी नतीजे?

ये वो दौर था जब हरियाणा में भाजपा अपने वजूद को तलाशने के लिए मजबूर हो गई थी. कांग्रेस की ताकत के सामने बीजेपी का किला धराशयी हो गया था. भाजपा की उम्मीदों को तबाह करने में जितना कांग्रेस की भूमिका थी उतनी ही इंडियन नेशनल लोकदल ने अपना किरदार निभाया था. शायद वो बीजेपी के बुरे दौर में से एक था. जहां, लोकसभा चुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा था तो वहीं हरियाणा विधानसभा में उसकी मेहनत मिट्टी में मिल गई थी. हरियाणा के 90 विधानसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की झोली में सिर्फ 4 सीटें आईं. तो वहीं कांग्रेस पार्टी ने 41 सीटों के साथ अपना दम दिखाया. इस रेस में इनेलो ने भी अपना दबदबा कायम रखते हुए 30 सीटों को अपने नाम कर लिया. बाकी 15 सीटों पर अन्य दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की.

10 साल में काफी कुछ बदल गया

आज हम साल 2009 से 10 साल आगे आ चुके हैं. ऐसे में काफी कुछ बदल चुका है. देश पर लंबे समय तर राज करने वाली कांग्रेस का बुरा वक्त आज से 5 साल पहले ही शुरू हो गया था. जब भारतीय जनता पार्टी ने 2014 में नरेंद्र मोदी नाम के शख्स को अपना अर्जुन बनाकर सियासी युद्ध के मैदान में उतारा था. कांग्रेस के सारे किले को तबाह करते हुए नरेंद्र मोदी की सेना आगे बढ़ती जा रही है. मोदी मैजिक इस कदर लोगों के सिर पर चढ़ गया है जैसे इंदिरा गांधी का वो एक दौर हुआ करता था. ऐसे में हरियाणा में होने वाले चुनाव में कांग्रेस की राह कांटे भरी राह से कम नहीं है. वो भी तब जब हरियाणा में कांग्रेस पार्टी के सबसे बड़ा चेहरा और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुडा एक के बाद एक लगातार बड़े विवादों में घिरते चले जा रहे हैं. हालांकि राजनीति में कुछ भी कहना बेहद मुश्किल है. जिस प्रकार से बीजेपी ने 2014 में बड़ी छलांग लगाते हुए 4 सीट से 47 सीट पर पहुंच गई थी. तो 2019 में अगर कोई उतटफेर देखा गया तो कोई बड़ी बात नहीं होगी.

कांग्रेस और INLD के लिए मुश्किल क्यों?

जिस वक्त कांग्रेस पार्टी ने और इनेलो ने शानदार जीत दर्ज की थी वो कांग्रेस पार्टी के लिए स्वर्णिम काल था. लेकिन आज के हाला बिल्कुल इतर हैं ऐसे में ये एक बहुत बड़ा फैक्टर है, जिससे इस चुनाव में इन दोनों ही पार्टियों के लिए सत्ता की कुर्सी अपने नाम कर पाना इतना आसान नहीं होगा. हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव के नतीजों में हरियाणा उन राज्यों में शुमार था जहां सभी लोकसभा सीटों पर भाजपा ने बड़ी ही आसानी से अपना कब्जा जमा लिया. आम चुनाव को अभी कुछ ही महीने बीते हैं ऐसे में हरियाणा की जनता का मिजाज और झुकाव एकतरफा बीजेपी की ओर था. हाल ही में एक रिपोर्ट आई थी जिसमें बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना का बहुत बड़ा असर इस प्रदेश में देखने को मिला है. 

चुनावी बादल सिर पर हैं, वोटों की बारिश की तारीख तय है. 21 अक्टूबर को होने वाली बारिश किसके लिए खुशहाली लेकर आएगी और किसकी लिए बाढ़ और बर्बादी का सितम... ये तो आने वाले 24 अक्टूर को साफ हो जाएगा.