एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना के गठबंधन को गडकरी ने क्यों बताया मौकापरस्ती का गठबंधन

इस वक्त शिवसेना की स्थिति छाप-तिलक छिनने के बाद पहचान खोने जैसी है. एनसीपी-कांग्रेस से शिवसेना के गठबंधन को नितिन गडकरी ने मौकापरस्ती बताया है. ध्यान दिया जाना चाहिए गडकरी, संजय राउत की तरह बड़बोले नहीं हैं. इसलिए अगर वह कुछ कह रहे हैं तो उसके तर्कसंगत मायने भी हैं. इस गठबंधन को लेकर एक शख्स ने सुप्रीम कोर्ट ने याचिका भी दायर की है. यह बताता है कि जनता भी अपने चुने हुए प्रतिनिधि के इस रुख से नाराज है.

एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना के गठबंधन को गडकरी ने क्यों बताया मौकापरस्ती का गठबंधन

मुंबईः महाराष्ट्र में सरकार बनाने का मसले का अभी अंत होता नहीं दिख रहा है. करीब महीने भर से जारी इस प्रकरण पर प्रदेश के कद्दावर भाजपा नेता नितिन गडकरी की अब खास टिप्पणी आई है. वह अधिकतर मौकों पर अब तक खामोश ही रहे हैं, इसलिए उनका बोलना कई हद तक सार्थक ही लग रहा है. शुक्रवार को एक बातचीत में नितिन गडकरी ने कहा कि एनसीपी-कांग्रेस और शिवसेना का गठबंधन मौकापरस्ती का गठबंधन है. ऐसी सरकार टिकेगी नहीं. गडकरी के इस कथन में कहना कम और समझना अधिक वाली बात चरितार्थ हो रही है. उन्होंने इसके पीछे की वजह बताई है कि दोनों ही कांग्रेस और शिवसेना की वैचारिक धाराएं बिल्कुल अलग हैं.

बोले गडकरी, इस गठबंधन में वैचारिक तालमेल नहीं 
नितिन गडकरी महाराष्ट्र की राजनीति के माहिर खिलाड़ी रहे हैं. उन्होंने कहा कि वैचारिक तालमेल न होने के कारण यह गठबंधन टिकेगा नहीं. इसके आगे जोड़ा कि शिवसेना और बीजेपी का गठबंधन न होना देश, विचारधारा, हिंदुत्व और महाराष्ट्र के लिए हानिकारक है.

इसे ऐसे समझा जाना चाहिए कि शिवसेना जिस विचारधारा पर चलती है, कांग्रेस उसका पूरी तरह से विरोध करती है. कांग्रेस जिस विचारधारा पर चलती है, उसका शिवसेना विरोध करती आई है. यहां तक की एनसीपी के विचार शिवसेना से बेहद अलग हैं. इसलिए इनका मिलना महाराष्ट्र में स्थिरता सरकार देने के लक्षण हैं ही नहीं. 

शिवसेना की छवि को धक्का तो लगा ही है
शिवसैनिक और भाजपा का लंबा अलायंस इसलिए भी रहा है क्योंकि वैचारिक आधार पर दोनों दल एक जैसी सोच रखते आए हैं. हिंदुत्व की प्रखर विचारधारा के तौर पर महाराष्ट्र का नाम सबसे आगे हैं. वहीं शिवसेना वीर शिवाजी और मराठा वीरों को अपना प्रेरक मानती है. भाजपा की हिंदुत्ववादी छवि और शिवसेना का हिंदुत्ववाद मिलकर एक हो जाते हैं. इसी आधार पर मराठा मानुष ने इस गठबंधन को वोट किया था.

अब जब शिवसेना अपने ही विरोधी  यानी कि जिसके खिलाफ चुनाव लड़ा उन्हीं के साथ सरकार बना रही है तो मराठी मानुष इसे सीधे तौर पर धोखे की तरह देख रहे हैं. कांग्रेस की ओर से मिली कट्टर हिंदुत्व छोड़ने की शर्त से शिवसेना की छवि को चोट पहुंच रही है. नितिन गडकरी का बयान इसी ओर इशारा कर रहा है. 

एनसीपी भी समझौते की शर्त पर ही साथ आई है
इस गठबंधन की शुरुआत एनसीपी की ही ओर से दी गई शर्त पर हुई है. शरद पवार ने शर्त रखी थी कि अगर शिवसेना साथ आना चाहती है तो पहले भाजपा के साथ अपने सभी संबंध खत्म करके आए. शिवसेना, एनडीए के साथ जुड़ी पार्टी है.

इसका सीधा मतलब था कि एनडीए से शिवसेना को अलग होना पड़ेगा. इसके लिए केंद्रिय मंत्रिमंडल से शिवसेना के मंत्री अरविंद सावंत ने इस्तीफा दे दिया. यानी कि साफ है कि अपनी छाप-तिलक सब मिटवा कर शिवसेना जिस पाले में जा खड़ी हुई है, वहां उसकी पहचान ही नहीं रही है.  

आखिर ऐसी क्या बात कि देर रात शरद पवार से मिलने पहुंचे उद्धव ठाकरे?

इस गठबंधन के खिलाफ याचिका भी दायर हुई है
महाराष्ट्र में एनसीपी औैर कांग्रेस गठबंधन ने शिवसेना को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने के संभावित फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. महाराष्ट्र के एक शख्स ने इस संभावित तिकड़ी सरकार बनाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है.

महाराष्ट्र निवासी एस आई सिंह ने चुनाव बाद एनसीपी-शिवेसना-कांग्रेस गठबंधन के खिलाफ याचिका दाखिल की है. इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अपील की गई है कि वह गवर्नर को निर्देश दें कि वह जनादेश के खिलाफ कांग्रेस और एनसीपी को सरकार बनाने का न्योता न दें.