महाराष्ट्र में बनेगी सरकार या लगेगा राष्ट्रपति शासन? यहां पढ़ें: पूरा फॉर्मूला

महाराष्ट्र की सियासी रणभूमि पर हुए जंग में जो नतीजे आए, उसके बाद वहां की सियासत में उठापटक का दौर लगातार तेज होता जा रहा है. इस रिपोर्ट के जरिए पढ़िए, कि क्या हो सकता है महाराष्ट्र में बनने वाली सरकार का फॉर्मूला-

महाराष्ट्र में बनेगी सरकार या लगेगा राष्ट्रपति शासन? यहां पढ़ें: पूरा फॉर्मूला

नई दिल्ली: महाराष्ट्र में पल पल हालात बदल रहे हैं. चुनाव के बावजूद प्रदेश केयरटेकर सरकार के हाथों में है. कुर्सी का खेल जारी है, लेकिन 18 दिन बाद भी नई सरकार नहीं बन सकी है तो उसकी बड़ी वजह शिवसेना का अड़ियल रवैया है. भारतीय जनता पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी बनने के नाते राज्यपाल ने सरकार बनाने का सबसे पहले न्यौता दिया, लेकिन जरूरी संख्या न होने के चलते भाजपा ने सरकार बनाने से मना कर दिया. फिर बारी आई शिवसेना की जो दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है. 

शिवसेना के बाद अब एनसीपी

राज्यपाल ने शिवसेना को एक दिन का समय दिया जिसमें उसे सरकार बनाने की मंशा साफ करने को कहा गया. शिवसेना ने सरकार बनाने का दावा तो किया लेकिन सहयोगी पार्टियों का समर्थन पत्र नहीं ला सके. लिहाजा राज्यपाल ने तीसरी सबसे बड़ी पार्टी एनसीपी को सरकार बनाने के लिए बुलावा भेजा. एनसीपी ने राज्यपाल का निमंत्रण स्वीकार तो कर लिया है और आज रात साढ़े आठ बजे तक जवाब देने को कहा है. लेकिन अगर महाराष्ट्र विधानसभा की मौजूदा स्थिति पर नजर डालें तो कहा जा सकता है कि गैर बीजेपी सरकार बनाने के लिए शिवसेना एनसीपी और कांग्रेस को साथ आना ही होगा.

महाराष्ट्र चुनाव की 288 सीटों के लिए हुए चुनाव में बीजेपी को 105 सीटें, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 कांग्रेस को 44 और अन्य को 29 सीटें मिली हैं. बहुमत के लिए जादुई आंकड़ा 145 है.

भाजपा फिलहाल वेट एंड वॉच की स्थिति में है. कुर्सी का खेल शिवसेना एनसीपी और कांग्रेस के बीच चल रहा है. आज एनसीपी राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश करेगी तो उसे कांग्रेस और शिवसेना के समर्थन पत्र की ज़रूरत पड़ेगी तब जाकर संख्या बहुमत के आंकड़े के पार पहुंचेगा. ये समीकरण तो बनता नहीं दिखता क्योंकि शिवसेना कभी एनसीपी की अगुवाई में सरकार में शामिल नहीं होगी. शिवसेना की भाजपा से लड़ाई शिवसैनिक को मुख्यमंत्री बनाने को लेकर है बाला साहब को दिए वादे को लेकर है.

शिवसेना के बड़बोले नेता संजय राउत ने ये बात बोल भी चुकी है. उन्होंने कहा कि 'शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरेजी ने एक बात स्पष्ट कही है कि आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री शिवसेना का होगा. मैं कहता हूं कि अगर उद्धव जी ने कहा है कि मुख्यमंत्री शिवसेना का होगा तो इसका मतलब है कि हम किसी भी कीमत पर राज्य को शिवसेना का मुख्यमंत्री देंगे.'

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महाराष्ट्र में सस्पेंस बरकरार

साफ है कि शिवसेना ने जिस मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए बीजेपी के साथ 30 साल पुरानी दोस्ती तोड़ दी तो एनसीपी कांग्रेस क्या हैं. एक बात और है कि एनसीपी की शर्त के मुताबिक ही शिवसेना के केंद्र में मंत्री अरविंद सावंत ने इस्तीफा दे दिया है. आदित्य ठाकरे का कहना है कि सरकार बनाने का उनका दावा अभी खारिज नहीं हुआ है. अगर ऐसा है तो शरद पवार शिवसेना को समर्थन दे सकते हैं. लेकिन पेंच कांग्रेस को लेकर है जिसने अभी तक शिवसेना को समर्थन का ऐलान नहीं किया है. लेकिन सूत्रों की मानें तो जयपुर में जमा कांग्रेस के कम से कम 37 विधायक शिवसेना के साथ मिलकर सरकर बनाने के पक्ष में हैं. शरद पवार भी सोनिया गांधी को मनाने की कोशिश कर रहे हैं. एनसीपी और कांग्रेस मिलकर सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है.

एनसीपी के 54 और कांग्रेस के 44 विधायक हैं जिनकी कुल संख्या 98 होती है. इनमें कुछ निर्दलीय जोड़ दिए जाएं तो भी संख्या 145 से काफी दूर होगी.

अगर कांग्रेस, शिवसेना को समर्थन नहीं देती तो महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगने का चांस बढ़ जाएगा. जो कोई नहीं चाहता. 6 महीने से लेकर 3 साल तक के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है. राष्ट्रपति शासन के दौरान भी राज्यपाल राजनीतिक पार्टियों को बहुमत साबित करने के लिए न्योता दे सकता है.

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बीजेपी फिलहाल शांति से तमाशा देख रही है. उसकी नजर शिवसेना एनसीपी कांग्रेस के असंतुष्ट विधायकों पर है. इसी डर से सबने विधायकों को घेर कर रखा हुआ है. अब महाराष्ट्र के सियासी पावर प्ले में सत्ता किसके हाथ लगती है ये आज साफ हो सकता है.