इस हादसे ने हमेशा के लिए तोड़ दिया विशाल भारद्वाज का सपना, बनना चाहते थे क्रिकेटर

फिल्मकार विशाल भारद्वाज आज किसी पहचान के मौहताज नहीं हैं. उन्होंने केवल अपने दम पर इंडस्ट्री में खास पहचान हासिल की है. आज उनकी फिल्मों का इंतजार दुरियाभर के दर्शकों को रहता है.

Last Updated : Aug 4, 2021, 10:59 AM IST
  • विशाल भारद्वाज ने अब तक इंडस्ट्री को एक से एक बेहतरीन फिल्में दी हैं
  • विशाल को आज जन्मदिन के मौके पर दुनियाभर से शुभकामनाएं मिल रही हैं
इस हादसे ने हमेशा के लिए तोड़ दिया विशाल भारद्वाज का सपना, बनना चाहते थे क्रिकेटर

नई दिल्ली: एक होते हैं फिल्मकार, एक होते हैं कलाकार, फिर आते हैं विशाल भारद्वाज (Vishal Bhardwaj). एक डायरेक्ट, म्यूजिक कंपोजर, सिंगर, लिरिसिस्ट, लेखक और निर्माता हर प्रतिभा में निपुण. जिन्होंने न तो कभी हारना सीखा और न ही कभी दर्शकों को निराश किया है. विशाल के बारे में एक और बात ये भी खास है कि वह जिंदगी में कभी रिस्क लेने से नहीं डरे. उनकी इसी हिम्मत और जज्बे ने उन्हें हिन्दी सिनेमा की मशहूर हस्तियों के बीच लाकर खड़ा कर दिया है.

विशाल ने दी कई बेहतरीन फिल्में

विशाल भारद्वाज का जन्म 4 अगस्त 1965 को उत्तर प्रदेश में बिजनौर में हुआ था. छोटे से शहर से मायानगरी तक का उनका सफर बेहद रोमांचक रहा.

'ओमकार', 'मकबूल', 'डेढ इश्किया' और 'हैदर' जैसी फिल्में देने वाले विशाल भारद्वाज ने शायद कभी खुद भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन वह दुनियाभर में सफल फिल्मकार के रूप में जाने जाएंगे। दरअसल, विशाल के सपने तो कुछ और ही हुआ करते थे.

क्रिकेटर बनना चाहते थे विशाल

कम ही लोग जानते हैं कि विशाल भारद्वाज क्रिकेटर के तौर पर पहचान हासिल करना चाहते थे. हालांकि, किस्मत तो उनके लिए पहले ही कुछ और सोच कर बैठी थी, और किस्मत के आगे कहां कभी किसी की चल पाई है. विशाल उन दिनों मेरठ में थे. यहीं रहते हुए उन्होंने स्टेट लेवल पर अंडर-19 क्रिकेट खेल था. हालांकि, उसी दौरान हुए एक हादसे ने विशाल की जिंदगी हमेशा के लिए बदल कर रख दी.

विशाल के साथ हुआ था ये हादसा

विशाल भारद्वाज टूर्नामेंट से पहले प्रैक्टिस कर रहे थे. लेकिन तभी उनके अंगूठे की हड्डी टूट गई, जिसकी वजह से विशाल दोबारा क्रिकेट नहीं खेल पाए. जल्दी ही विशाल को इस बात का अहसास हो गया कि क्रिकेटर बनकर उनका भविष्य उज्ज्वल नहीं है. ऐसे में उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री का रुख कर लिया.

17 साल की उम्र में दिया था म्यूजिक

विशाल भारद्वाज जब सिर्फ 17 साल के थे तब उन्होंने एक गाने में म्यूजिक दिया था. इससे सुनने के बाद उनके पिता उनके इस टैलेंट से काफी प्रभावित हुए.

दरअसल, विशाल के पिता संगीत प्रेमी रहे हैं और इस क्षेत्र में काम भी कर चुके हैं. ऐसे में उन्होंने बेटे की मुलाकात संगीतकार उषा खन्ना से करवाई. इसके बाद उषा खन्ना ने 1985 में रिलीज हुई अपनी फिल्म यार कसम में विशाल के इसी संगीत का इस्तेमाल भी किया.

1995 में शुरू हुआ संगीत करियर

विशाल भारद्वाज ने 1995 में रिलीज हुई फिल्म 'अभय' से संगीतकार के तौर पर अपना सफर शुरू किया. हालांकि, उन्हें गुलजार की फिल्म 'माचिस' ने खास पहचान दिलाई. इसके बाद विशाल ने 2002 में आई फिल्म 'मकड़ी' से डायरेक्टर के तौर पर अपनी नई पारी शुरू की. आज विशाल उस मुकाम पर हैं जहां वह किसी पहचान के मोहताज नहीं रह गए हैं. उनके चाहने वाले आज दुनियाभर में मौजूद हैं.

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