बम-बारूद से प्यार करने लगे थे Yash Chopra, मां के आंसुओं ने बनाया बॉलीवुड का 'किंग ऑफ रोमांस'

बॉलीवुड में अपनी मेहनत से खुद को स्थापित करने के बाद यश चोपड़ा (Yash Chopra) ने धीरे-धीरे हिंदी सिनेमा के कलेवर को बदलना शुरू कर दिया.

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Sep 27, 2021, 06:46 AM IST
  • बलराज फिल्मों से जुड़े थे यश चोपड़ा के भाई
  • यश चोपड़ा ने फिल्मों में किए दो बड़े एक्सपेरिमेंट
बम-बारूद से प्यार करने लगे थे Yash Chopra, मां के आंसुओं ने बनाया बॉलीवुड का 'किंग ऑफ रोमांस'

नई दिल्ली: आज देश के महान फिल्मकार रहे यश चोपड़ा (Yash Chopra Birthday) का जन्मदिन है. यश 27 सितंबर 1932 को लाहौर में पैदा हुए थे. फिल्म में करियर शुरू करने के बाद यश चोपड़ा को हिंदी फिल्मों की दुनिया में 'किंग ऑफ रोमांस' के नाम से पहचाना जाने लगा. दरअसल, साठ के दशक में हिंदी सिनेमा में सक्रिय होने के बाद चोपड़ा लगातार आगे बढ़ते रहे और उन्होंने इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

बॉलीवुड में अपनी मेहनत से खुद को स्थापित करने के बाद यश चोपड़ा (Yash Chopra) ने धीरे-धीरे हिंदी सिनेमा के कलेवर को बदलना शुरू कर दिया. उनकी बनाई रोमांटिक फिल्में पहले की फिल्मों से बिल्कुल अलग और खास अंदाज में लोगों के बीच आने लगी. यश चोपड़ा ने रोमांस के अलावा और भी कई तरह की कामयाब फिल्में बनाईं, लेकिन उनको रोमांस की फिल्मों से ही असली पहचान मिली है. 

यही वजह है कि फिल्मों में प्यार को नए तरह से लोगों के बीच पेश करने की वजह से यश को लोग 'किंग ऑफ रोमांस' के नाम से पुकारने लगे. उनकी बनाई 'दीवार', 'काला पत्थर' जैसी फिल्में आज भी हिंदी सिनेमा में मील का पत्थर मानी जाती हैं.

इस गलती पर रात भर रोती रहीं थी मां
यश चोपड़ा जब जवान थे, तब उनकी दोस्ती गलत लड़कों से हो गई थीं. यश चोपड़ा के ये सभी दोस्त चोरी और मारपीट में एक्टिव थे. एक बार यश को उसके एक दोस्त ने छोटे-छोटे बम दिए जो उन्होंने अपने घर में छिपा कर रखे थे. एक रोज बम गलती से फट गए. जब यश की मां को पता चला कि घर में यश बम लाकर रख रहे हैं, तो वह खूब रोईं. उन्होंने न यश को डांटा, न मार-पिटाई की, बस वह रात भर रोती रहीं.

फिर यश ने मां से मांगी माफी
इस घटना का यश चोपड़ा के जीवन पर काफी गहरा असर पड़ा. इसके बाद सुबह यश ने अपनी मां के पास जाकर माफी मांगते हुए कहा कि अब वह ऐसा कभी नहीं करेंगे, जिससे उन्हें रोना पड़े. फिर मां ने उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए अपने रिश्तेदार के पास रोहतक भेज दिया. 

बलराज फिल्मों से जुड़े थे यश चोपड़ा के भाई
देश की आजादी के बाद यश चोपड़ा और उनका परिवार हिंदुस्तान आ गया. यहां यश के बड़े भाई मुंबई में रहते हुए काम के लिए बलराज फिल्मों से जुड़ गए. यश चोपड़ा के बड़े भाई चाहते थे कि वह इंजीनियरिंग करने लंदन जाए, लेकिन यश चोपड़ा को बॉलीवुड भ गया. इसके बाद वह अपने भाई की फिल्मों में पांच सौ रुपए महीने पर बतौर असिस्टेंट डाइरेक्टर काम करने लगे.

यश चोपड़ा ने फिल्मों में किए ये दो एक्सपेरिमेंट
यश चोपड़ा ने एक निर्देशक के तौर पर हिंदी सिनेमा में अपने करियर की शुरूआत 1959 में फिल्म 'धूल का फूल' से की. फिर साल 1961 में यश चोपड़ा ने फिल्म 'धर्म पुत्र' का निर्देशन किया. इसके बाद यश ने सबसे पहले बॉलीवुड में मल्टीस्टारर फिल्में बनाने के चलन को शुरू किया. इनकी फिल्मों में अब एक के बजाय कई स्टार होते थे. फिर यश ने ही सबसे पहले बिना गाने वाले फिल्मों को बनाना शुरू किया. इसके अलावा, फिल्मों में रोमांस को अलग-अलग तरह से पर्दे पर दिखाने के लिए भी यश जाने जाते हैं. 

जब मुमताज के साथ रिश्ते पर पत्नी ने पूछे सवाल 
एक समय यश चोपड़ा की जिंदगी में ऐसा भी आया जब वह एक्ट्रेस मुमताज के काफी करीब आ गए. इन दिनों मुमताज की खूबसूरती के कई दीवाने थे. इस दौरान मुमताज और यश चोपड़ा को लेकर रिलेशनशिप की खबरें भी सामने आईं. मीडिया रिपोर्ट्स में तो इस बात का भी जिक्र है कि जब यश चोपड़ा शादी कर रहे थे तब उनकी होने वाली पत्नी पामेला ने निर्देशक के एक दोस्त से पूछ लिया था कि मुमताज और यश के बीच कुछ है क्या. इसी वजह से पत्नी के साथ रिश्ते में कई बार खटास भी आई. 
 
फिल्म फेयर समेत कई पुरस्कार
यश चोपड़ा को 11 बार फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया. उन्हें 1964 में प्रदर्शित फिल्म ‘वक्त’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इसके बाद 2006 से 2008 तक तीन बार पावर अवार्ड से भी सम्मानित किए गए. इसके अलावा, यश को पद्म पुरस्कार से लेकर दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. 

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