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यूपी में जलसंकट से दहशत, प्रयागराज का ऐसा है हाल...

कई इलाकों में बने घरों को सैलाब ने अपने आगोश में ले रखा है. घर का जरूरी सामान लेकर लोगों ने पहली मंजिल और छतों पर डेरा डालने पर मजबूर हैं. जलस्तर बढ़ने से सड़कों पर पानी का जमावड़ा लग गया है.

यूपी में जलसंकट से दहशत, प्रयागराज का ऐसा है हाल...

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के कई जिलों में नदियों का रौद्र रूप देखा जा रहा है. बढ़ते जलस्तर और पानी के तांडव के चलते लोगों में दहशत का माहौल है. यूपी के प्रयागराज का हाल शब्दों में बयां कर पाना काफी मुश्किल है. गंगा और यमुना की लहरों ने कछारी इलाकों से होते हुए रिहाइशी इलाकों में ठिकाना बना लिया है. खतरे के निशान से ऊपर बह रही इन दोनों नदियों ने ढाई लाख की आबादी को हैरान परेशान कर रखा है. 

नदियों के विकराल रूप से घर, मकान, दुकान सब कुछ पानी में समाया हुआ है. पक्के मकान आधे से ज्यादा पानी में डूबे हुए हैं जबकि कच्चे मकानों का तो वजूद ही नहीं बचा है. 

ऐसे हालात की क्या है वजह?

राजस्थान से पानी छोड़े जाने के बाद खतरे के निशान के पार पहुंचीं गंगा-यमुना ने प्रयागराज को दर्जन भर से ज्यादा इलाकों को घेर रखा है. हालांकि अब गंगा के बढ़ने की रफ्तार थम गई है और वो स्थिर हो गई है. वहीं यमुना का पानी धीरे-धीरे घट रहा है लेकिन अभी भी हालात सुधरे नहीं हैं. जिले के हड्डी गोदाम, इकराम नगर, ऐनुद्दीनपुर, नैनी, करेली, जेके आशियाना, गड्ढा कॉलोनी, करैलाबाग, बख्शी कला, बख्शी मोढ़ा, सदियापुर, ककरहा घाट, गऊघाट, बलुआघाट जैसे इलाके पूरी तरह पानी में समाए हुए हैं. इन इलाकों में रहने वाले लोगों की जिन्दगी मुश्किलों से घिरी हुई है.

कई इलाकों में बने घरों को सैलाब ने अपने आगोश में ले रखा है. घर का जरूरी सामान लेकर लोगों ने पहली मंजिल और छतों पर डेरा डालने पर मजबूर हैं.

जलस्तर बढ़ने से सड़कों पर पानी का जमावड़ा लग गया है. जिसके चलते गंदगी, कूड़ा-कचड़ा और सीवर का गंदा पानी जमा हो गया है.

सिंचाई बाढ़ खंड के विशेषज्ञों ने अगले 48 घंटे में गंगा और यमुना का जलस्तर घटने का अनुमान जताया है. पहले गंगा और यमुना का रौद्र रूप देखते हुए 1978, 2013 और 2016 में आई भयानक बाढ़ जैसे हालात पैदा होने की आशंका जताई जा रही थी लेकिन अब दोनों नदियों के शांत होने से लोगों ने राहत की सांस ली है. हालांकि बाढ़ में डूबे इलाकों का हाल सुधरने में अभी वक्त लग सकता है.