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बिहार में 'जलासुर' ने पसारा पांव, बाढ़ से बेहाली का आलम

आनन फानन में केंद्र से फरक्का बैराज के और गेट खोलने की अपील की गई, जिससे गंगा में पानी का दबाव कम किया जा सके. केंद्र ने भी हालात को समझा और बैराज के सभी 109 गेट खोल दिए गए. जिससे गंगा का जलस्तर घटने लगा.

बिहार में 'जलासुर' ने पसारा पांव, बाढ़ से बेहाली का आलम

नई दिल्ली: बिहार के कुछ जिलों में नदियों में आया उफान ने एक बार फिर लोगों का जीना मुहाल कर रखा है. गंगा समेत छह नदियों ने खतरे के निशान को पार कर लिया. जिससे लाखों की आबादी मुश्किलों से घिर गई. सूबे की राजधानी पटना में गंगा की लहरें किनारों को तोड़कर रिहाइशी इलाके में घुस गईं. गंगा के तट पर बने घाट के साथ-साथ गली-मोहल्ले दरिया में तब्दील हो गए हैं. लगातार बढ़ते जलस्तर से नीतीश सरकार की परेशानी बढ़ा दी है. 

आनन फानन में केंद्र से फरक्का बैराज के और गेट खोलने की अपील की गई, जिससे गंगा में पानी का दबाव कम किया जा सके. केंद्र ने भी हालात को समझा और बैराज के सभी 109 गेट खोल दिए गए. जिससे गंगा का जलस्तर घटने लगा और पटना में लोगों ने राहत की सांस ली.

गंगा का जलस्तर घट रहा है लेकिन अभी भी वो लाल निशान के ऊपर बह रही है. जिससे दर्जन भर जिलों में हालात भयावह बने हुए हैं. 

खगड़िया का हाल बेहाल

खगड़िया का हाल ये है कि जिले के चार प्रखंडों की लगभग एक लाख की आबादी बाढ़ का दंश झेल रही है. गंगा और गंडक के पानी ने शहरी इलाके को भी घेर रखा है. सड़क से लेकर लोगों के घरों तक में सैलाब ने डेरा डाल रखा है. लोग अपना जरूरी सामान लेकर ऊंची जगहों पर जाने को मजबूर हो गए हैं.

लखीसराय में बेकाबू हुआ सैलाब

जिले की कई पंचायतों के गांव सैलाब में डूबे हुए हैं. यहां के लोगों की जिंदगी मुश्किल हालातों में गुजर रही है. उफनते सैलाब ने खाने के साथ पीने के पानी का बड़ा संकट खड़ा कर दिया है. जिले के डीएम और एसपी एनडीआरएफ टीम के साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर पीड़ितों तक मदद पहुंचाने में जुटे हैं.

भागलपुर में बाढ़ का तांडव

भागलपुर का हाल ये है कि तटीय इलाकों के साथ साथ शहरी इलाके भी बाढ़ की चपेट में हैं. इंजीनियरिंग कॉलेज, सीएमएस स्कूल, तिलकामांझी विस्वविद्यालय के पीजी छात्रावास तक में पानी घुसा हुआ है. जिसके चलते पीजी की परीक्षाएं स्थगित करनी पड़ गई हैं. दर्जनों गांव सैलाब में डूबे हुए हैं. ना सड़कों का पता है और ना ही कच्चे रास्तों का.. लोग घर बार छोड़कर ऊंची जगहों पर जीवन बिताते हुए पानी घटने का इंतजार कर रहे हैं.

मधेपुरा में लोगों में दहशत

गंगा और कोसी की लहरों ने बिहार के मधेपुरा जिले की तस्वीर भी बिगाड़ दी है. जिले के उदाकिशुनगंज अनुमंडल में आने वाले आलमनगर और चौसा प्रखंड की करीब 11 पंचायतें सैलाब में समा चुकी हैं. कोसीदियारा इलाके की लगभग एक लाख से अधिक की आबादी बुरी तरह से बाढ़ से प्रभावित हुई है. सड़कों पर दो-दो फीट तक पानी भर गया है, कई गाँवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट टुका है. लोग जान जोखिम में डालकर पानी में डूबी सड़कों पर ही आवाजाही कर रहे हैं.

बाढ़ की मार झेल रहा मुंगेर

बिहार का मुंगेर जिला भी बाढ़ की मार झेल रहा है. गंगा के जलस्तर में इजाफा होने के चलते छह प्रखंडों में बाढ़ का पानी निचले इलाकों में घुस गया है. गांवों के लोगों की जिन्दगी मुसीबतों से घिरी हुई है. लोगों का आरोप है कि जिला प्रशासन की ओर से उन्हें अब तक किसी तरह की मदद नहीं मिली है.

फरक्का बैराज के गेट खोलने के बाद गंगा का जलस्तर घटना शुरू हो गया है. माना जा रहा है कि एक दो दिन में लोगों को सैलाब के इस कहर से निजात मिल जाएगी. हालांकि लोगों की जिंदगी को पूरी तरह से पटरी पर लौटने में अभी वक्त लग सकता है.