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यूपी में 'पानी' का सितम, खतरे के निशान से ऊपर पहुंची नदियों का तांडव

गंगा का स्तर इतना बढ़ चुका है कि घाटों से होता हुआ पानी शहर की सड़कों तक पहुंच गया है. सड़कों पर लबालब पानी भरा हुआ है और गली-मोहल्लों के हालात बद-से-बदतर हो गए हैं.

यूपी में 'पानी' का सितम, खतरे के निशान से ऊपर पहुंची नदियों का तांडव

देश के कई हिस्सों में बाढ़ और बारिश का कहर बरप रहा है. इसमें खासकर उत्तर भारत पर खासा प्रभाव देखा जा रहा है. उत्तर प्रदेश के कई जिले भयंकर बाढ़ की मार झेल रहे हैं. यहां गंगा और यमुना समेत सूबे में बहने वाली कई नदियां खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं. जिससे लोगों के दिलों में खौफ पैदा हो गया है.

पानी के बढ़ते स्तर को देखकर हर कोई सहमा हुआ है. इसमें सबसे भयानक तस्वीरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और प्रयागराज से सामने आ रही हैं.

  • काशी में गंगा का विकराल रूप

शिव की नगरी काशी यानी बनारस में गंगा की लहरें तबाही मचाने पर आमादा है. वाराणसी में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर 71.32 मीटर पर पहुंच गया है. जो खतरे के निशान से लगभग 5 सेमी ऊपर है. गंगा किनारे बने पक्के घाट पानी में डूब चुके हैं. काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के लिए देश के दूसरे हिस्सों से आए पर्यटकों को काफी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है. पर्यटकों का कहना है कि बाढ़ में सबकुछ डूबा हुआ है. उनलोगों को पानी से इतना ज्यादा डर लग रहा है कि वो कहीं घुमने भी जाने से कतरा रहे हैं.

गंगा का पानी इतना बढ़ चुका है कि घाटों से होता हुआ वो शहर की सड़कों तक पहुंच गया है. सड़कों पर लबालब पानी भरा हुआ है और गली-मोहल्लों के हालात बद-से-बदतर हो गए हैं. इसका सीधा असर लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है. जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और कारोबार ठप हो चुका है.

  • वरुणा ने भी धारण किया रौद्र रूप

गंगा के खतरे के निशान के ऊपर जाने के बाद इसकी सहायक नदी वरुणा ने भी रौद्र रूप धारण कर लिया है. गंगा और वरुणा में आए उफान के चलते 50 से ज्यादा गांव पानी में डूब गए हैं. जिससे हजारों लोग बेघर हो गए हैं. प्रशासन ने लोगों को बाढ़ राहत कैंपों में पहुंचाया है. साथ ही बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री भी बांटी जा रही है.

  • भीषण बाढ़ की चपेट में गाजीपुर

बनारस से सटा गाजीपुर जिला भी इस समय भीषण बाढ़ की चपेट में है. यहां भी गंगा खतरे के निशान से करीब एक मीटर ऊपर बह रही है. गंगा की उफनती लहरों से तबाही मची हुई है. गंगा का जलस्तर एक सेमी प्रति घंटा के रफ्तार से बढ़ रहा है.

गंगा के लगातार बढ़ाव के चलते सौ से ज्यादा गांव के लोग बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं. इन गांवों में फंसे लोगों तक मदद पहुंचाना मुश्किल हो रहा है. गंगा, गोमती के साथ ही टोंस, बेसों जैसी नदिया भी उफान पर हैं. बाढ़ प्रभावित इलाकों में तैनात एनडीआरएफ की टीमें लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचा रही हैं. जिले में हजारों की आबादी सड़क पर रहने को मजबूर है.

  • प्रयागराज में यमुना का कहर

प्रयागराज में भी गंगा और यमुना नदियां खतरे के निशान को पार कर लोगों की जिंदगी में तबाही लाने पर उतारू हैं. गंगा और यमुना में आई भयंकर बाढ़ के बाद तटवर्ती इलाके पानी में समा चुके हैं. पांच लाख घर इस समय बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं. 

गंगा और यमुना के इस रौद्र रूप के चलते हजारों लोग अपना घर-बार छोड़ने को मजबूर हो गए हैं. लोगों को उनके घरों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है. स्कूल बंद कर दिए गए है. कई लोगों ने तो अपने जरूरी सामान के साथ नावों पर ही आशियाना बना लिया है. 

सूबे के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने हेलीकॉप्टर से बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया. उनके साथ प्रयागराज के डीएम भी मौजूद थे. उन्होंने बाढ़ पीड़ितों को हर संभव राहत और मदद मुहैया कराने का निर्देश दिया.

दरअसल उत्तर भारत के कई राज्यों में हुई भीषण बारिश के बाद अलग अलग बैराजों का पानी नदियों में छोड़ा गया है. राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश में इस बार जबरदस्त बारिश हुई है. जिससे इन राज्यों के बांध लबालब भरे हुए हैं. कई जगह क्षमता से ज्यादा पानी भर गया है. जिसके चलते भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया. गंगा और यमुना जैसी नदियों में आया यही पानी तबाही मचा रहा है.